बिहार के सारण जिले में जहरीली शराब पीने से हुई 5 लोगों की मौत, 5 की स्थिति गंभीर
By एस पी सिन्हा | Updated: March 13, 2026 19:05 IST2026-03-13T19:05:56+5:302026-03-13T19:05:56+5:30
बताया जा रहा है कि 11 मार्च को जहरीली शराब पीने से इन पांचों की तबियत बिगड़ गई थी। सिरदर्द, पेटदर्द, उल्टी-दस्त और आंखों से दिखाई न देने जैसी शिकायतों के बाद इनकी मौत हो गई।

बिहार के सारण जिले में जहरीली शराब पीने से हुई 5 लोगों की मौत, 5 की स्थिति गंभीर
पटना: बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के बीच जहरीली शराब से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शराबबंदी के 10वें साल में प्रवेश करनेके बीच एक बार फिर सारण जिले से जहरीली शराब का कहर सामने आया है। यहां 5 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से होने की खबर है। बताया जा रहा है कि 11 मार्च को जहरीली शराब पीने से इन पांचों की तबियत बिगड़ गई थी। सिरदर्द, पेटदर्द, उल्टी-दस्त और आंखों से दिखाई न देने जैसी शिकायतों के बाद इनकी मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जहरीली शराब पीने से अन्य पांच लोगों की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल छपरा रेफर किया गया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। बताया जा रहा है कि जिले के मशरक के पूरब टोला गांव में जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। लोगों को चक्कर आने लगा और आंखों के सामने धुंधलापन छाने लगा।
इसके बाद परिजन उन्हें तुरंत इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज शुरू किया, लेकिन कुछ लोगों की हालत काफी गंभीर थी। इसी दौरान दो लोगों की मौत हो गई, जबकि अन्य को बेहतर इलाज के लिए छपरा रेफर कर दिया गया।
मृतकों में शामिल रघुवर महतो पिछले दो दिनों से शराब बेचने के आरोप में पुलिस हिरासत में था। उसकी तबीयत अचानक खराब होने के बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक में भर्ती कराया गया था। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने प्राथमिक इलाज के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए सदर अस्पताल छपरा रेफर कर दिया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जहरीली शराब पीने से जिनकी स्थिति नाजूक है, उनमें पूरब टोला गांव के बबन महतो, मिंटू महतो, मंटू कुमार और कुंदन महतो शामिल हैं। इसके अलावा किशुनपुरा गांव के दूधनाथ शर्मा को भी इलाज के लिए रेफर किया गया है। रेफर किए गए लोगों ने डॉक्टरों को बताया कि उन्होंने पेय पदार्थ का सेवन किया था। इसके बाद उनकी आंखों के सामने धुंधलापन आने लगा और घबराहट महसूस होने लगी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, दो दिन पहले तख्त टोला गांव में संतोष महंतों की भी मौत हुई थी। हालांकि उस समय परिजनों ने इसे बीमारी से हुई मौत बताया था। लेकिन गांव के कुछ लोगों का कहना है कि उस घटना में भी पेय पदार्थ के सेवन की आशंका थी। फिलहाल पुलिस इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लोगों ने किस तरह का पेय पदार्थ पिया था और वह कहां से आया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेनीय है कि पिछले 10 साल में शराबबंदी के दौरान जहरीली शराब से हुई मौतों के बारे में सरकारी आंकड़ा अलग है और स्वतंत्र एजेंसियों के आंकड़े अलग। विधानसभा में इस बाबत पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया है कि अब तक जहरीली शराब से 190 लोगों की जहरीली शराब से मौत हो चुकी है।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल इसकी पुष्टि करते हैं। बता दें कि सरकार केवल उन मौतों को जहरीली शराब से हुई मौत बताती है, जहां पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट में जहरीले पदार्थ (मिथाइल एल्कोहल) के सेवन की बात कही गई है।
दूसरी ओर, स्वतंत्र एजेंसियों के आंकड़े इसे 300 तक बता रहे हैं। अप्रैल, 2025 में की रिपोर्ट बताती है कि जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या सितंबर 2024 तक 266 दर्ज की गई थी। इनमें से 156 की तब तक पुष्टि हो चुकी थी। मार्च 2025 तक यह आंकड़ा 190 तक पहुंच गया था।
वहीं, एनसीआरबी के डेटा की बात करें तो 2016 से 2021 के बीच जहरीली शराब से केवल 23 मौतें दिखाई गई थीं। हालांकि पुलिस की आंतरिक रिपोर्ट में इसी दौरान का डेटा 199 बता रहा था। सारण, सीवान, गया, भोजपुर, बक्सर और गोपालगंज में जहरीली शराब से होने वाली मौतों की संख्या सबसे ज्यादा रहा।