WPL में जाकिर खान की आवाज में गूंजी प्रबुद्ध सौरभ की स्त्री-केंद्रित कविता

विमेंस प्रीमियर लीग अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। इस वर्ष के आयोजन में क्रिकेट के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को भी विशेष स्थान दिया गया। लीग के दौरान विभिन्न अवसरों पर संगीत और कला से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य खेल के मंच को व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ देना रहा। इसी क्रम में गणतंत्र दिवस के अवसर पर वड़ोदरा में आयोजित एक विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 19, 2026 22:41 IST2026-02-19T22:40:12+5:302026-02-19T22:41:02+5:30

Zakir Khan voice in WPL Prabuddha Saurabh women-centric poem resonates | WPL में जाकिर खान की आवाज में गूंजी प्रबुद्ध सौरभ की स्त्री-केंद्रित कविता

WPL में जाकिर खान की आवाज में गूंजी प्रबुद्ध सौरभ की स्त्री-केंद्रित कविता

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HighlightsWPL में जाकिर खान की आवाज में गूंजी प्रबुद्ध सौरभ की स्त्री-केंद्रित कविता

विमेंस प्रीमियर लीग अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। इस वर्ष के आयोजन में क्रिकेट के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को भी विशेष स्थान दिया गया। लीग के दौरान विभिन्न अवसरों पर संगीत और कला से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य खेल के मंच को व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ देना रहा। इसी क्रम में गणतंत्र दिवस के अवसर पर वड़ोदरा में आयोजित एक विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

इस प्रस्तुति में बॉलीवुड लेखक-कवि प्रबुद्ध सौरभ की कविता को कॉमेडियन ज़ाकिर ख़ान द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह कार्यक्रम विमेंस प्रीमियर लीग के मैच से पूर्व स्टेडियम में आयोजित किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे। कविता पाठ के साथ मंच पर संगीत और सामूहिक गायन की प्रस्तुति भी दी गई, जिससे कार्यक्रम को एक सांस्कृतिक स्वरूप मिला।

प्रस्तुति की परिकल्पना और निर्देशन संगीत निर्देशक असीम त्रिवेदी ने किया। उनके नेतृत्व में लगभग 40 युवतियों के समूह ने मेडले और कोयर के रूप में कविता को स्वरबद्ध किया। समूह गायन और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से कविता के भावों को प्रस्तुत किया गया। संगीत, सामूहिक गायन और वाचिक पाठ के संयोजन ने कार्यक्रम को प्रभावशाली बनाया।

कविता की केंद्रीय पंक्ति “ये हमारा हिन्दुस्तान है” रही, जो पूरी प्रस्तुति में प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई। कविता में भारत की महिला शक्ति की यात्रा को विषय बनाया गया। इसमें आज़ादी के बाद के भारत में महिलाओं की स्थिति, उनके सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियाँ और समान अधिकारों की दिशा में चल रहे संघर्ष को रेखांकित किया गया। साथ ही वर्तमान समय में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, आत्मविश्वास और उपलब्धियों को भी कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

कविता की कुछ पंक्तियों में स्वतंत्रता के बाद के दौर में महिलाओं के संघर्ष और असमानताओं की झलक दिखाई देती है, वहीं बाद के हिस्से में आज की भारतीय नारी की चेतना और आत्मनिर्भरता को सामने रखा गया है। इस क्रमिक प्रस्तुति ने कविता को एक समय-यात्रा का स्वरूप दिया, जिसमें सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया को दर्शाया गया।

कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी। खेल के माहौल में आयोजित इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और कुछ समय के लिए मैदान को एक वैचारिक और सांस्कृतिक मंच में बदल दिया। 

यह प्रस्तुति ज़ाकिर ख़ान के लिए भी उल्लेखनीय रही। हाल ही में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कुछ वर्षों के लिए स्टैंड-अप कॉमेडी से विराम लेने की घोषणा की थी। उस घोषणा के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति मानी जा रही है। इस अवसर पर उन्होंने हास्य से अलग, गंभीर और संवेदनशील स्वर में कविता का पाठ किया, जिसे दर्शकों ने सराहा।

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