मुंबईः द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच दिवंगत रमाकांत आचरेकर के शुरुआती शिष्यों में से एक और अपनी बल्लेबाजी के कारण दोस्तों के बीच ‘मुंबई के विवियन रिचर्ड्स’ के नाम से मशहूर अनिल गुरव अपनी कुछ गलत पसंद के कारण कभी उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाए और इसका उन्हें जीवन भर पछतावा रहा। आचरेकर के सबसे बेहतरीन शिष्यों में से एक माने जाने वाले गुरव कभी क्लब स्तरीय क्रिकेट से आगे बढ़कर मुंबई टीम में जगह नहीं बना पाए। उनका का मंगलवार को यहां नालासोपारा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। अनिल गुरव का 31 मार्च 2026 को 61 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
वह व्यक्ति जिसे कभी मुंबई का विव रिचर्ड्स कहा जाता था, जिसने सचिन तेंदुलकर को वह बल्ला उधार दिया था, जिससे उन्होंने अपना पहला प्रतिस्पर्धी शतक बनाया था। क्लब स्तर की क्रिकेट से आगे कभी भी मुंबई टीम में जगह नहीं बना पाए थे। मंगलवार को नालासोपारा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया।
गुरव शारदाश्रम विद्यामंदिर में दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली से कुछ साल बड़े थे और कहा जाता है कि कोच अचरेकर भारत के लिए खेलने वाले इन दोनों बल्लेबाजों को अपने वरिष्ठ खिलाड़ी को नेट पर अभ्यास करते देखने के लिए भी ले जाते थे। रमाकांत अचरेकर ने भी उन्हें शुरुआत में ही पहचान लिया था और उनकी स्टंप पर सिक्का रखकर उनकी प्रतिभा को उजागर किया था।