US Tariff On India: रिसर्च कर रहे हैं और देख रहे?, अमेरिकी उच्चतम न्यायालय फैसले पर वाणिज्य मंत्रालय का बयान

By सतीश कुमार सिंह | Updated: February 21, 2026 18:48 IST2026-02-21T18:41:17+5:302026-02-21T18:48:28+5:30

US Tariff On India: भारत को अब पहले के 25 प्रतिशत के बजाय केवल 10 प्रतिशत के जवाबी सीमा शुल्क का ही सामना करना होगा।

US Tariff On India Studying Developments India US Order On Trump's Tariffs Researching watching Commerce Ministry statement US Supreme Court decision | US Tariff On India: रिसर्च कर रहे हैं और देख रहे?, अमेरिकी उच्चतम न्यायालय फैसले पर वाणिज्य मंत्रालय का बयान

US Tariff On India

Highlightsट्रंप ने अपने फैसले का खंडन करने वाले दो न्यायाधीशों को नामित किया था। शुक्रवार को न्यायालय ने छह-तीन के बहुमत से फैसला सुनाया। दरें लगाने और वैश्विक व्यापार को अस्त-व्यस्त करने के लिए भरोसा किया था।

नई दिल्ली: वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सरकार अमेरिका में सीमा शुल्क से जुड़े ताजा घटनाक्रम और उसके संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रही है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “शुक्रवार को सीमा शुल्क के बारे में आया अमेरिकी उच्चतम न्यायालय का फैसला हमारे संज्ञान में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संबंध में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया है।” न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ को अवैध घोषित करने के फैसले पर अपनी प्रारंभिक प्रतिक्रिया में भारत ने कहा कि वह घटनाक्रम के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। हमने कल (शुक्रवार) टैरिफ पर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर ध्यान दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है," मंत्रालय ने कहा। "अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ कदम उठाए गए हैं। हम इन सभी घटनाक्रमों के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं।

ट्रंप के शुल्क आदेश रद्द होने के बाद भारत पर 10 प्रतिशत शुल्क ही लगेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापक शुल्क आदेशों को उच्चतम न्यायालय की तरफ से रद्द कर दिए जाने के बाद अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर नया वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा की है जिसके तहत भारत को अब पहले के 25 प्रतिशत के बजाय केवल 10 प्रतिशत के जवाबी सीमा शुल्क का ही सामना करना होगा।

ट्रंप ने अपने व्यापक शुल्कों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का फैसला आने पर कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में ‘‘कुछ नहीं बदलेगा’’ और भारत को शुल्क देना होगा। शुक्रवार को न्यायालय ने छह-तीन के बहुमत से फैसला सुनाया। 1977 का वह कानून जिस पर ट्रंप ने व्यक्तिगत देशों पर अचानक दरें लगाने और वैश्विक व्यापार को अस्त-व्यस्त करने के लिए भरोसा किया था।

राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। ट्रंप ने अपने फैसले का खंडन करने वाले दो न्यायाधीशों को नामित किया था। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि मुझे न्यायालय के कुछ सदस्यों पर शर्म आती है, बिल्कुल शर्म आती है कि उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने का साहस नहीं है।

ट्रंप के खिलाफ शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में भारतीय मूल के वकील

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक प्रभाव वाले वैश्विक टैरिफ को निरस्त करने संबंधी ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में एक भारतीय मूल के वकील हैं, जिन्होंने अमेरिका की शीर्ष अदालत में इन शुल्कों की अवैधता के खिलाफ दलील दी।

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