लखनऊः उत्तर प्रदेश में बीते दस दिनों में असमय हुई बरसात और ओलावृष्टि तथा कई जिलों के तमाम गांवों में लगी आग के रबी की फसलों को भारी नुकसान हुआ. किसानों द्वारा मेहनत से उगाए गए गेहूं कहीं ओलावृष्टि के कारण खराब हो गया तो कहीं आग लगने के चलते खेतों में ही जल गया. किसानों के साथ घटित ऐसी प्राकृतिक आपदा का संज्ञान लेते हुए योगी सरकार राज्य को आपदाग्रस्त घोषित करने की तैयारी कर रही है.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से जो नुकसान हुआ है, बीमा कंपनियां उसका सर्वे कर राहत देंगी,
परंतु वह सबको राहत नहीं दे पाएंगी. अब हमारा यह प्रयास है कि राज्य को आपदाग्रस्त घोषित करते हुए हर पीड़ित किसान को राहत प्रदान की जाए. ताकि प्राकृतिक आपदा का शिकार हुए दो करोड़ से अधिक किसानों की मदद की जा सके.
डीएम किसानों की मदद करें
सरकार की इस मंशा के तहत, सूबे के सभी जिलों में डीएम (जिलाधिकारी) को कहा गया ही कि जिले में किसानों के नुकसान का आकलन करते हुए मदद की जाए. जिले के सभी गांवों में प्रत्येक प्रभावित किसान और बटाईदार के नुकसान का सटीक, निष्पक्ष और समयबद्ध आकलन कर तत्काल क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए.
जिला स्तर पर राजस्व, कृषि और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए शीघ्र सर्वेक्षण कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाए, ताकि राहत वितरण में कोई देरी न हो. मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को बीमा कंपनियों के साथ सक्रिय तालमेल बनाकर फसल बीमा दावों के जल्द निस्तारण के निर्देश भी दिए हैं.
जबकि कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को किसानों से सीधे संपर्क कर उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने को कहा, ताकि अधिकतम राहत सुनिश्चित हो सके. पीड़ित किसानों को राज्य आपदा राहत कोष से पर्याप्त धनराशि तत्काल उपलब्ध कराने के लिए मुख्ब्यमंत्री ने राजस्व विभाग को भी निर्देशित किया है.
मुख्यमंत्री ने कहा है कि सभी जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि प्रभावित किसानों को पारदर्शी और त्वरित सहायता मिले और जहां जरूरत हो, वहां राहत शिविर स्थापित किए जाएं. सूबे के जिन जिलों में अग्निकांड की घटनाओं से किसानों का नुकसान हुआ है, उसका संज्ञाने लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह 24 घंटे के भीतर जनहानि और पशुहानि की स्थिति में पीड़ित को राहत राशि उपलब्ध कराएं और पात्र लाभार्थियों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत शीघ्र लाभान्वित किया जाए.
जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराया जाएगा. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राहत व पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य होगी और इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी.
सभी जिलों को जारी की गई आपदा की राशि
राहत कार्य में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राहत आयुक्त कार्यालय ने सभी जिलों को पीड़ित किसानों को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए 25-25 प्रतिशत राशि देने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से अतिरिक्त आपदा राशि जारी करने की मांग को लेकर मसौदा तैयार करना शुरू किया है.
राहत आयुक्त के अनुसार, 33 प्रतिशत फसलों की क्षति होने पर ही उसे आपदा की श्रेणी में रखा जाता है. इसलिए सभी जिलाधिकारियों से वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का तेजी से आकलन कर तत्काल रिपोर्ट भेजने को कहा गया है. ताकि इस रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश को आपदाग्रस्त घोषित कर केंद्र से आर्थिक मदद पाने का प्रयास किया जाए.
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में दो करोड़ से अधिक किसानों ने गेहूं की फसल बोई थी और करीब एक करोड़ किसानों के रवि की अन्य फसलों को खेत उगाया था. भारी बरसात, ओलावृष्टि और खेतों में पड़े गेहूं के ठेरों में लगी आग से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. प्राकृतिक आपदा का शिकार का हुए इन क्साइनोन की मदद के लिए प्रदेश सरकार उनकी मदद के लिए आगे आई है.