यूपी में 10 वर्ष में ऐसे बढ़ा बजट का आकार?, 8.65 लाख करोड़ रुपए में से 2.85 लाख करोड़ रुपए नहीं हुए खर्च?
By राजेंद्र कुमार | Updated: April 2, 2026 16:55 IST2026-04-02T16:53:18+5:302026-04-02T16:55:13+5:30
यूपी में हर साल बढ़ा बजट का आकार,पर खर्च नहीं हुआ पूरा बजट! मार्च 2026 में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय स्वीकृत हुई जारी.

file photo
लखनऊः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बीते दस वर्षों से सूबे के आम बजट के आकार में इजाफ़ा करती चलाई आ रही हैं. इसे नीति के चलते ही बीती 11 फरवरी को सरकार ने 9,12,696.35 लाख करोड़ रुपए का बजट सदन में पेश किया था. जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने दो अनुपूरक बजट के जरिए कुल 8,65,736.06 लाख करोड़ रुपए के बजट को सदन से मंजूर करता था.
इस हकीकत के साथ ही यह भी सत्य है कि सूबे की योगी सरकार सदन से स्वीकृत कराए गए बजट को बीते दस वर्षों में एक बार भी पूरा खर्च नहीं कर सकी. वर्ष 2025-26 करीब 8.65 लाख करोड़ रुपए के बजट के साथ भी ऐसा ही हुआ है. बजट की धनराशि को इसी 31 मार्च तक खर्च किया जाना था, लेकिन सूबे की सरकार 8.65 लाख करोड़ रुपए में से 2.85 लाख करोड़ रुपए खर्च ही नहीं कर सकी.
दस वर्ष में ऐसे बढ़ा बजट का आकार
वित्तीय वर्ष बजट आकार (करोड़ रुपए में)
2017-18 3,84,659.71
2018-19 4,28,384.52
2019-20 4,79,701.10
2020-21 5,12,860.72
2021-22 5,50,278.78
2022-23 6,15,518.97
2023-24 6,90,242.43
2024-25 7,36,437.71
2025-26 8,65,736.06
2026-27 9,12,696.35
जिसके चलते 2.85 लाख करोड़ रुपए की ये धनराशि वापस हो गई. सरकार के कोषवाणी पोर्टल के मुताबिक 31 मार्च तक योगी सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट का महज 5.79 लाख करोड़ रुपए ही खर्च सकी. वह भी तक सिर्फ मार्च में विभिन्न सरकारी विभागों के एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की बिल पास किए.
इन विभागों की बड़ी धनराशि नहीं हुई खर्च
राज्य के विकास कार्यों के लिए प्रदेश सरकार के भारी भरकम बजट की धनराशि का इस साल भी पूरा खर्च ना हो पाना यह दर्शा रहा है कि सूबे में पूरे साल बजट खर्च करने की रफ्तार सभी सरकारी विभागों में सुस्त रही है. फिर मार्च में सभी सरकारी विभागों में बजट की स्वीकृत धनराशि को खर्च करने की होड मची और के माह के भीतर ही एक लाख करोड़ रुपए की धनराशि खर्च करने आदेश जारी किए गए.
फिर भी करीब 2.85 लाख करोड़ रुपए खर्च नहीं किए जा सके. कोषवाणी पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा धनराशि वित्त विभाग (ऋण सेवा व अन्य व्यय) में लगभग 1.23 लाख करोड़ वापस हुई. इसके अलावा वित्त विभाग (पेंशन व भत्ते) में 28,894 करोड़ रुपए, प्राथमिक शिक्षा विभाग में 21,266 करोड़ रुपए, समाज कल्याण विभाग में 15,182 करोड़ रुपए और पीडबल्यूडी महकमे में 2500 करोड़ रुपए खर्च नहीं किए जा सके. हालांकि इस बार पीडब्ल्यूडी में स्वीकृत बजट को खर्च करने का रिकार्ड बेहतर हुआ है.
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव एके चौहान का कहना है कि विभाग ने 86 प्रतिशत बजट खर्च कर रिकॉर्ड बनाया है. पीडब्ल्यूडी की ही तरह तरह प्राथमिक शिक्षा विभाग, गृह विभाग, पेंशन विभाग ने भी बजट खर्च करने के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है. वित्त विभाग के अफसरों के अनुसार, प्राथमिक शिक्षा विभाग ने 82,337 करोड़ रुपए के बजट में से 61,071 करोड़ रुपए खर्च किए.
गृह विभाग ने पुलिस महकमे की योजनाओं में 33,551 और वित्त विभाग ने पेंशन संबंधी योजनाओं मेँ 49,312 करोड़ रुपए खर्च सक्रिय विभागों मेँ अपने को शामिल कर लिया है. वित्त विभाग के अफसरों के अनुसार मार्च मेँ सबसे अधिक धनराशि खर्च करने वाले विभागों में कृषि विभाग की करीब तीन दर्जन योजनाओं में वित्तीय वर्ष के अन्तिम दिन तक 92.61 फीसदी राशि खर्च गई. इसी तरह वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत पर्यटन विभाग ने 96 फीसदी और संस्कृति विभाग ने 93 फीसदी बजट मार्च में खपा दिया.
क्यों नहीं खर्च की जा सकी धनराशि
बजट की धनराशि को विभिन्न सरकारी विभाग समय से क्यों नहीं खर्च कर सके. इस सवाल का जवाब सूबे के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना से नहीं दिया, लेकिन राज्य के तमाम वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि बजट को खर्च न कर पाने की मुख्य वजह समय पर योजना ना बनाया जाना है. इसके लिए विभिन्न विभागों के मंत्री और आला अफसरों की सुस्ती ही जिम्मेदार है.
अगर इन लोगों से समय से योजना तैयार कर उसकी आदिटिंग करते तो बजट की धनराशि को सरेंडर ना करना पड़ता है. बीते दस वर्षों से इस तरह ही लापरवाही को रही है, इस कारण से ही वर्ष 2025-26 के बजट के 2.85 लाख करोड़ रुपए खर्च नहीं किए जा सके.
अब वर्ष 2026-27 के बजट की 9.12 लाख करोड़ रुपए की धनराशि का अधिकांश हिस्सा खर्च किया जा सके, इसके लिए अभी से योजना बनाकर कार्य किया जाएगा और बजट के प्रबंधन पर मंत्री तथा अधिकारी ज़ोर दें. अन्यथा जो इस साल हुआ है वह आगे भी होगा. राज्य के वित्त सचिव रह चुके एसएमए रिजवी का यह कहना है.