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एक लाख 72 हजार करोड़ का ऋण सरकार ने आखिर किसके लिए माफ कराया और वे कौन लोग थे

By शीलेष शर्मा | Updated: October 11, 2019 23:00 IST

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वििट कर मोदी सरकार पर हमला बोला कि अर्थव्यवस्था सख्ता हाल है फिर भी भारतीय स्टेट बैंक द्वारा 76 हजार करोड़ रुपया का लोन माफ किया गया

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ठळक मुद्देगिरती अर्थव्यवस्था और बैंकों की खस्ता हालात को देखते हुए राजनीतिक दल अब सरकार से सवाल कर रहे है 2018-19 में 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपया बैंकों ने किसके कहने पर और किसके लिए बट्टे खाते में डाला

 गिरती अर्थव्यवस्था और बैंकों की खस्ता हालात को देखते हुए राजनीतिक दल अब सरकार से सवाल कर रहे है कि 2018-19 में 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपया बैंकों ने किसके कहने पर और किसके लिए बट्टे खाते में डाला.

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वििट कर मोदी सरकार पर हमला बोला कि अर्थव्यवस्था सख्ता हाल है फिर भी भारतीय स्टेट बैंक द्वारा 76 हजार करोड़ रुपया का लोन माफ किया गया, मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार यह लोन आखिर किसके लिए माफ करवा रही है.

प्रियंका ने किसानों की हालात पर चिंता जताई और कहा कि किसानों को जेल में डाला जा रहा है लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा है, पंजाब-महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक के खातेधारक अपने ही पैसों के लिए चीख रहे है और मोदी सरकार 76 हजार करोड़ रुपये के लोन माफ कर रही है. कौन ले गया यह पैसा?

गौरतलब है कि हाल ही में एसबीआई ने 76 हजार करोड़ के लोन को ‘राइटआॅफ’ किया है जो 220 लोगों द्वारा लिया गया और उसे चुकाया नही गया, प्रत्येक के ऊपर सौ करोड़ से अधिक का लोन है.सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार लोन लेने वालों के ऊपर 500 करोड़ यह इससे अधिक का ऋण था जिसे बैंक ने दो श्रेणियों में बांट कर माफ कर दिया.कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव बल्लभ ने भी आज इसी मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि मोदी सरकार कुछ चुनींदा लोगों के हितों के लिए लोन माफी करा रही है. उन्होंने मांग की कि सरकार उन ऋण लेने वालों के नाम सार्वजनिक करें जिनके लोग माफ किये गये है.

आंकड़े पेश करते हुए गौरव ने कहा  कि 2013 में जो एनपीए 34409 करोड़ था वह 2018-19 में 1 लाख 72 हजार करोड़ कैसे पहुंचा, बैंकों ने उसकी वसूली के लिए क्या किया और किसके कहने पर इस ऋण को ‘राइटआॅफ’ कर दिया गया. अपने खाते से इस राशि को हटाकर आखिर अब क्यों बैंकें इसकी वसूली के लिए कोशिश नहीं कर रही है. 

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