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चीनी निर्यात पिछले साल के रिकॉर्ड 71 लाख टन से घटकर 50-60 लाख टन रह सकता है: उद्योग

By भाषा | Updated: October 5, 2021 20:02 IST

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नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर भारत का चीनी निर्यात सितंबर में समाप्त होने वाले चालू विपणन वर्ष में घटकर 50-60 लाख टन तक रहने का अनुमान है। एक उद्योग निकाय के अनुसार, वर्ष 2020-21 में निर्यात रिकॉर्ड 71 लाख टन का रहा था।

उद्योग निकाय इस्मा द्वारा आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए, इंडियन शुगर एक्ज़िम कॉरपोरेशन (आईएसईसी) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अधीर झा ने कहा कि वर्ष 2021-22 विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) में भारत के द्वारा 50-60 लाख टन चीनी का निर्यात किये जाने की संभावना है।

गिरावट के कारण के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि भारत को चालू सत्र में 70 लाख टन निर्यात करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि देश एथनॉल के लिए अधिशेष गन्ना शीरे का उपयोग कर रहा है।

झा ने यह भी कहा कि थाइलैंड से अधिक निर्यात किये जाने की उम्मीद के कारण भारत का निर्यात कम रहेगा।

उन्होंने कहा, "हमें 2021-22 में 71 लाख टन निर्यात करने की आवश्यकता नहीं है। हमारा अधिशेष प्रबंधन योग्य है।"

झा ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच उच्च परिवहन लागत के कारण मौजूदा सत्र में भारत को बेहतर निर्यात मूल्य की आवश्यकता होगी।

आईएसईसी के प्रबंध निदेशक और सीईओ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें एक साल पहले की तुलना में बेहतर हैं और आयातकों की ओर से मांग के शुरुआती संकेत हैं।

उन्होंने कहा, "चीनी मिलें आपूर्ति को जल्दी अनुबंधित करने को तैयार हैं।"

आईएसईसी का गठन वर्ष 1969 में चीनी उद्योग के दो शीर्ष निकायों - नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) और भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) द्वारा चीनी और उसके उप-उत्पादों के निर्यात के लिए किया गया था।

बेहतर मांग और सरकार से वित्तीय सहायता मिलने के कारण पिछले महीने समाप्त हुए विपणन वर्ष 2020-21 में भारत का चीनी निर्यात 20 प्रतिशत बढ़कर 71 लाख टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

विपणन वर्ष 2019-20 में चीनी का निर्यात 59 लाख टन का हुआ था।

इस्मा के अनुसार, विपणन वर्ष 2021-22 में चीनी उत्पादन 3.1 करोड़ टन होने का अनुमान है।

चीनी की कुल उपलब्धता 3.95 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 85 लाख टन चीनी का प्रारंभिक स्टॉक भी शामिल है।

घरेलू खपत 2.65 करोड़ टन होना अनुमानित है जबकि निर्यात 60 लाख टन होने का अनुमान है। इस विपणन वर्ष के अंत में समापन स्टॉक 70 लाख टन का होगा।

पेट्रोल के साथ एथनॉल मिश्रण के बारे में इस्मा ने कहा कि पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को 3.25 अरब लीटर की आपूर्ति के साथ नवंबर में समाप्त होने वाले एथनॉल विपणन वर्ष 2020-21 में इसका पेट्रोल में मिश्रण का स्तर 8.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

आगे 2021-22 के एथनॉल विपणन वर्ष में पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को 4.25 अरब लीटर की आपूर्ति के साथ सम्मिश्रण स्तर 10 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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