लाइव न्यूज़ :

स्विगी में 45 करोड़ डालर निवेश करने के लिये बातचीत कर रहा साफ्टबैंक

By भाषा | Updated: April 16, 2021 20:16 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल मोबाइल ऐप के माध्यम से भोजन-पैकेट आर्डर बुक करने वाली कंपनी स्विगी जापनी कंपनी साफ्टबैंक से 45 करोड़ डालर (3,348 करोड़ रुपये) की पूंजी के लिये बातचीत कर रही है। बातीची काफी आगे बढ़ चुकी है।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्र ने बताया कि इस बातचीत में बेंगलूरू स्थित कंपनी स्वीगी का मूल्यांकन पांच अरब डालर तक पहुंच सकता है।

कंपनी ने इससे पहले फाल्कन एज कैपिटल, अमान्सा कैपिटल, थिंक इनवेस्टमेंट्स, कारमिगनेक औरगोल्डमैन साक से 80 करोड़ डालर (करीब 5,862 करोड़ रुपये) के निवेश हासिल करने की घोषणा की थी।

कंपनी के सह- संस्थापक और सीईओ श्रीहर्षा मजेटी द्वारा अप्रैल शुरु में कर्मचारियों को भेजे गये एक ई- मेल इस संभावित सौदे के बारे में जानकारी दी गई।

कंपनी में यह प्रस्तावित निवेश ऐसे समय आ रहा है जब उसकी प्रतिद्धंदी कंपनी जोमेटो इस साल प्रारम्भिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की योजना बना रही है।

इस संबंध में स्विगी के प्रवक्ता को भेजे गये ई- मेल का कोई जवाब नहीं मिला।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

ज़रा हटकेVIDEO: पूजा करने गया था श्रद्धालु, मंदिर में ही हो गई पिटाई – CCTV फुटेज वायरल

क्रिकेटKKR का खाता खुला, PBKS टॉप पर, मैच रद्द होने से बदला पूरा समीकरण

क्रिकेटKKR vs PBKS: ईडन गार्डन्स में आउटफील्ड गीली होने के कारण मैच रद्द, दोनों टीमों को एक-एक अंक मिला

ज़रा हटकेVIDEO: हाईवे पर खतरनाक टावर गिरा, मौके पर प्रशासन मौजूद

भारतWest Bengal: विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटाए गए

कारोबार अधिक खबरें

कारोबाररुपये की तेज छलांग! 2013 के बाद सबसे बड़ा उछाल

कारोबारGold Rate Today: 6 अप्रैल 2026 को सोना हुआ सस्ता, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹ 1,51,765 प्रति 10 ग्राम

कारोबारपश्चिम एशिया युद्ध के बीच जमकर गाड़ी खरीद कर लोग?, 2025-26 में 13.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 2,96,71,064?, जानिए दोपहिया वाहनों की संख्या

कारोबारलेह हवाई अड्डाः उड़ान की संख्या 8 से बढ़कर 18 किया?, रिकार्ड संख्या में पर्यटकों के आने के इंतजार में लद्दाख

कारोबारपल-पल बदलते रंग?, मौसम की मार और किसान परेशान?, आखिर क्या करें?