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खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी से बढ़कर सात महीने के उच्च स्तर 6.01 फीसदी पर पहुंची

By भाषा | Updated: February 14, 2022 22:05 IST

ईंधन एवं प्रकाश, कपड़ा और जूता-चप्पल (फुटवियर) तथा परिवहन एवं संचार क्षेत्रों समेत अन्य खंडों में महंगाई दर सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़ी।

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ठळक मुद्देदिसंबर 2021 की मुद्रास्फीति के आंकड़े को 5.59 फीसदी से बदलकर 5.66 फीसदी कर दिया गया हैजनवरी 2021 में यह 4.06 फीसदी थी, वहीं जून में यह 6.26 फीसदी के उच्च स्तर पर रही थीमांस और मछली श्रेणी में मुद्रास्फीति बढ़कर 5.47 प्रतिशत रही जो पिछले महीने 4.58 प्रतिशत थी

दिल्ली: सब्जी, मांस, मछली जैसे खाद्य वस्तुएं महंगी होने से जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर सात महीने के उच्च स्तर 6.01 प्रतिशत पर पहुंच गयी। खुदरा महंगाई दर का यह स्तर रिजर्व बैंक के संतोषजनक दायरे से थोड़ा ऊपर है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़े के अनुसार तेल और वसा खंड में खुदरा मुद्रास्फीति 18.7 प्रतिशत रही।

ईंधन एवं प्रकाश, कपड़ा और जूता-चप्पल (फुटवियर) तथा परिवहन एवं संचार क्षेत्रों समेत अन्य खंडों में महंगाई दर सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़ी। इस बीच, दिसंबर 2021 की मुद्रास्फीति के आंकड़े को 5.59 प्रतिशत से संशोधित कर 5.66 प्रतिशत कर दिया गया है। जनवरी 2021 में यह 4.06 प्रतिशत थी। इससे पहले, जून 2021 में मुद्रास्फीति 6.26 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रही थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार को जारी मुद्रास्फीति आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर जनवरी 2022 में 5.43 प्रतिशत रही जो इससे पिछले महीने 4.05 प्रतिशत थी। अनाज और उसके उत्पादों की महंगाई दर बढ़कर जनवरी में 3.39 प्रतिशत रही जो दिसंबर 2021 में 2.62 प्रतिशत थी।

आंकड़ों के अनुसार मांस और मछली श्रेणी में मुद्रास्फीति बढ़कर 5.47 प्रतिशत रही जो पिछले महीने 4.58 प्रतिशत थी। सब्जियों के मामले में महंगाई दर बढ़कर 5.19 प्रतिशत हो गयी जबकि दिसंबर में इसमें 2.99 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। हालांकि तेल एवं वसा खंड में महंगाई दर नरम होकर 18.70 प्रतिशत रही। ईंधन अैर प्रकाश खंड में मुद्रास्फीति कम होकर 9.32 प्रतिशत रही जो दिसंबर में 10.95 प्रतिशत थी।

रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति पर विचार करते समय मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पर गौर करता है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ खुदरा महंगाई दर चार प्रतिशत पर बनाये रखने की जिम्मेदारी दी हुई है।

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