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रिजर्व बैंक की सिफारिशों से डिजिटल ऋण क्षेत्र की वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा : विशेषज्ञ

By भाषा | Updated: November 21, 2021 15:26 IST

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मुंबई, 21 नवंबर डिजिटल ऋण (ऑनलाइन मंचों और मोबाइल ऐप सहित) पर भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यसमूह की सिफारिशों से इस क्षेत्र की क्रमिक वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा। उद्योग विशेषज्ञों ने यह राय जताई है।

रिजर्व बैंक के बनाए गए कार्यसमूह ने अपनी एक व्यापक रिपोर्ट में कई सिफारिशें की हैं। इसमें गैरकानूनी डिजिटल ऋण गतिविधियों पर अंकुश के लिए एक अलग कानून, डिजिटल ऋण देने वाले ऐप का नोडल एजेंसी से सत्यापन और एक स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) की स्थापना का सुझाव शामिल है।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा है कि यह प्रस्ताव काफी हद तक रचनात्मक और अपेक्षा के अनुरूप है। उसके बयान में कहा गया है कि नियमनों की शुरुआत डिजी-ऋण की वृद्धि दर को कम कर सकती है। चीन और भारत (पी2पी) जैसे देशों में छोटे से समय में इसमें काफी तेज वृद्धि देखी गई है।

इस नोट में कहा गया है कि इन नियमों से हालांकि दीर्घावधि में सुचारू तरीक से वृद्धि देखने को मिलेगी।

एंड्रोमेडा और अपनापैसा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वी स्वामीनाथन ने कहा कि डिजिटल ऋण के विस्तार की गति को देखते हुए उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण अब अधिकारियों के साथ उद्योग के खिलाड़ियों के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण हो गया है।

उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के कार्यसमूह ने गैरकानूनी डिजिटल ऋण गतिविधियों को रोकने के लिए अलग कानून और डिजिटल ऋण देने वाले पारिस्थितिकी तंत्र में प्रतिभागियों के लिए स्व नियामक संगठन का जो सुझाव दिया है, वह पूरी तरह से उचित प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उपभोक्ताओं का डिजिटल ऋण देने वाली कंपनियों पर भरोसा कायम रहे। कार्यसमूह ने इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।’’

इन सिफारिशों का स्वागत करते हुए फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (फेस) ने कहा कि उद्योग की संरचना और फिनटेक सदस्यों और ग्राहकों के लिए नियम निर्धारित करने के लिए एसआरओ समय की मांग है।

फेस ने बयान में कहा, ‘‘हम डिजिटल ऋण देने वाले मंचों के लिए नैतिक व्यवहार और आचार-संहिता के उच्च मानकों को लाने के लिए रिजर्व बैंक के कदम का स्वागत करते हैं।’’

इंडिया लेंड्स के संस्थापक और सीईओ और डिजिटल लेंडिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (डीएलएआई) के संस्थापक सदस्य गौरव चोपड़ा का मानना ​​है कि ऐप पर उपयोगकर्ता द्वारा की गई प्रत्येक कार्रवाई के लिए ‘ऑडिटेबल लॉग’ जैसी सिफारिशें भारत के डिजिटल ऋण उद्योग के लिए पासा पलटने वाली साबित होगी।

रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए साइंजी के सह-संस्थापक और सीईओ अंकित राता ने कहा कि यदि सिफारिशें स्वीकार हो जाती हैं, तो ये न केवल उपभोक्ताओं के संरक्षण में मददगार होंगी, बल्कि धोखाधड़ी वाले लेनदेन पर अंकुश लगाते हुए डेटा गोपनीयता के उल्लंघन को भी रोकेंगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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