संसद ने जन विश्वास विधेयक 2026 पारित, 717 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया, जुर्माने की राशि 1 करोड़ रुपये?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 3, 2026 05:31 IST2026-04-02T20:11:36+5:302026-04-03T05:31:02+5:30

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत किया था।

Parliament passes Jan Vishwas Bill 2026, decriminalising 717 offences, fines up to Rs 1 crore | संसद ने जन विश्वास विधेयक 2026 पारित, 717 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया, जुर्माने की राशि 1 करोड़ रुपये?

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Highlights23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन।सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना।जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए 67 प्रावधानों में संशोधन।

नई दिल्लीः संसद ने गुरुवार को जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। यह एक व्यापक विधेयक है, जिसका उद्देश्य छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और विभिन्न क्षेत्रों में अनुपालन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करके व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाना है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा बहस का जवाब देने के बाद राज्यसभा ने ध्वनि मत से विधेयक को मंजूरी दे दी। लोकसभा ने इसे एक दिन पहले बुधवार को पारित किया था। मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित परिवर्तनों से अनुपालन का बोझ कम होगा। जुर्माने की राशि 1 करोड़ रुपये है।

विधेयक में निम्नलिखित:

23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन

व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया

जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए 67 प्रावधानों में संशोधन।

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत किया था। यह विधेयक व्यापार करने में सुगमता और जीवन यापन में सुगमता को बढ़ावा देने के साथ-साथ विश्वास और आनुपातिक विनियमन पर आधारित शासन ढांचे को आगे बढ़ाने के सरकार के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

इस विधेयक का उद्देश्य 1000 से अधिक अपराधों को सुव्यवस्थित करना, अप्रचलित और अनावश्यक प्रावधानों को हटाना और इस प्रकार समग्र नियामक वातावरण में सुधार करना है। विधेयक में मामूली, तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूकों के लिए आपराधिक दंडों की जगह नागरिक और प्रशासनिक प्रवर्तन तंत्रों की ओर बदलाव का प्रावधान है।

प्रमुख उपायों में शामिल हैं :

▪︎ कारावास प्रावधानों को आर्थिक दंड या चेतावनी से प्रतिस्थापित करना

▪︎ क्रमबद्ध प्रवर्तन तंत्र, जिसमें पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी भी शामिल है

▪︎ अपराध की प्रकृति के अनुपात में जुर्माने और दंडों का युक्तिकरण

कुशल और समयबद्ध प्रवर्तन सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में निम्नलिखित प्रावधान हैं:

• न्यायनिर्णय अधिकारियों की नियुक्ति

• अपीलीय प्राधिकरणों की स्थापना

विधेयक में निम्नलिखित अधिनियमों के अंतर्गत 67 संशोधन भी प्रस्तावित हैं:

• नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994

• मोटर वाहन अधिनियम, 1988

इन उपायों का उद्देश्य मामलों का शीघ्र निपटान करना और न्यायालयों पर मुकदमेबाजी का बोझ कम करना है, साथ ही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करना है। इन संशोधनों का उद्देश्य नगरपालिका कराधान और वाहन संबंधी अनुपालन जैसे क्षेत्रों में प्रक्रियाओं को सरल बनाना और नागरिकों की सुविधा बढ़ाना है।

27 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक में 80 केंद्रीय अधिनियमों में संशोधन का प्रस्ताव है। यह अगस्त 2025 में पेश किए गए पूर्ववर्ती विधेयक का स्थान लेता है, जिसमें 17 अधिनियम शामिल थे और जिसे बाद में तेजस्वी सूर्या की अध्यक्षता वाली एक चयन समिति को भेजा गया था।

समिति ने 13 मार्च, 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें न केवल उन 17 कानूनों में संशोधन की सिफारिश की गई, बल्कि 65 अतिरिक्त अधिनियमों में भी संशोधन का सुझाव दिया गया। पूर्ववर्ती विधेयक को बाद में 17 मार्च, 2026 को वापस ले लिया गया था।

जन विश्वास विधेयक के पारित होने से जीवन यापन में सुगमता को बड़ा बढ़ावा मिलेगा: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को संसद में जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने को देश में जीवन यापन और व्यापार करने में सुगमता के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसद द्वारा विधेयक पारित किए जाने से उन्हें ‘‘अत्यंत प्रसन्नता’’ हुई है। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘यह विधेयक विश्वास पर आधारित ढांचे को मजबूत करता है और हमारे नागरिकों को सशक्त बनाता है। इसमें अप्रचलित नियमों और विनियमों को खत्म किया गया है।’’

Web Title: Parliament passes Jan Vishwas Bill 2026, decriminalising 717 offences, fines up to Rs 1 crore

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