लाइव न्यूज़ :

उलट शुल्क ढांचे को ठीक करने के फैसले से चमड़ा उद्योग से कर का बोझ घटेगा : सीएलई

By भाषा | Updated: September 19, 2021 16:26 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 19 सितंबर चमड़ा निर्यात परिषद (सीएलई) ने कहा है कि जीएसटी परिषद द्वारा एक जनवरी, 2022 से चमड़े के जूते-चप्पलों (फुटवियर) पर उलट शुल्क ढांचे को ठीक करने के फैसले से क्षेत्र से कर का बोझ घटेगा और कृत्रिम रेशे (एमएमएफ) के कपड़े तथा परिधानों के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।

सीएलई के चेयरमैन संजय लीखा ने कहा कि 1,000 रुपये से कम मूल्य के चमड़ा फुटवियर पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर पांच प्रतिशत है। इससे अधिक मूल्य पर यह 18 प्रतिशत है। वहीं इन फुटवियर के निर्माण में काम आने वाले सामान (इनपुट) पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने फुटवियर पर जीएसटी की दर को सुसंगत करने का सुझाव दिया था।’’

जीएसटी परिषद की 17 सितंबर को हुई बैठक में एक जनवरी, 2022 से फुटवियर तथा कपड़े पर उलट शुल्क ढांचे को ठीक करने पर सहमति बनी।

उन्होंने कहा कि उलट शुल्क ढांचा उद्योग के लिए एक मुद्दा था और परिषद ने सरकार से इस विसंगति को समाप्त करने की मांग की थी। इसके तहत इनपुट कर क्रेडिट के संग्रहण से कंपनियों की महत्वपूर्ण कार्यशील पूंजी ब्लॉक हो रही थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टकोई इतना अमानवीय और क्रूर कैसे हो सकता है?

विश्व‘एलिमेंट्‌स’ को बचानेवाले फारसी विद्वान और यूक्लिड से प्रेरित शरलॉक 

पूजा पाठPanchang 07 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 07 April 2026: आज नौकरी में तरक्की, धन-संपत्ति में बढ़ोतरी के शुभ योग

स्वास्थ्यविश्व स्वास्थ्य दिवसः वैज्ञानिक सोच से बदलेगी सेहत की तस्वीर

कारोबार अधिक खबरें

कारोबाररुपये की तेज छलांग! 2013 के बाद सबसे बड़ा उछाल

कारोबारGold Rate Today: 6 अप्रैल 2026 को सोना हुआ सस्ता, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹ 1,51,765 प्रति 10 ग्राम

कारोबारपश्चिम एशिया युद्ध के बीच जमकर गाड़ी खरीद कर लोग?, 2025-26 में 13.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 2,96,71,064?, जानिए दोपहिया वाहनों की संख्या

कारोबारलेह हवाई अड्डाः उड़ान की संख्या 8 से बढ़कर 18 किया?, रिकार्ड संख्या में पर्यटकों के आने के इंतजार में लद्दाख

कारोबारपल-पल बदलते रंग?, मौसम की मार और किसान परेशान?, आखिर क्या करें?