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विदेशी बाजारों में तेजी से बीते सप्ताह तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

By भाषा | Updated: July 4, 2021 16:17 IST

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नयी दिल्ली, चार जुलाई विदेशों में तेजी के रुख का स्थानीय असर होने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सोयाबीन, मूंगफली, सरसों तेल-तिलहन, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार रहा।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने आयात शुल्क में कमी की और पामोलीन के आयात पर प्रतिबंध को हटा दिया है। सरकार ने सोयाबीन डीगम पर 450 रुपये आयात शुल्क मूल्य घटाया है। जबकि सीपीओ पर आयात शुल्क में 450 रुपये और आयात शुल्क मूल्य में 225 रुपये की कमी की है और इस प्रकार सीपीओ पर शुल्क में लगभग 675 रुपये प्रति क्विन्टल की कमी की गई है।

उन्होंने कहा कि इस कमी के बाद विदेशों में इन तेलों के भाव तेज हो गये। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह सोयाबीन डीगम का भाव 1,185 डॉलर प्रति टन था जो अब बढ़कर 1,278 डॉलर प्रति टन हो गया। आयात शुल्क में कमी किये जाने के बाद शुक्रवार को सोयाबीन डीगम का भाव में महज एक दिन में 10 प्रतिशत की तेजी आई जो दशकों के बाद आई इतनी बड़ी तेजी है। इस तेजी को देखते हुए सोयाबीन तेल-तिलहन के अलावा बाकी तेलों के भाव भी मजबूत हो गये।

उन्होंने कहा कि सोयाबीन के तेल रहित खल (डीओसी) की भारी स्थानीय मांग के कारण सोयाबीन दाना और लूज के भाव भी पर्याप्त सुधार के साथ बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि देश में पामोलीन के आयात पर लगी रोक को हटाये जाने से स्थानीय तेल रिफाइनिंग कंपनियों, किसानों और उपभोक्ताओं को भारी नुकसान है। पहले सरकार सीपीओ का आयात कर उसकी रिफाइनिंग करती थी और ‘मेक इन इंडिया’ किया जाता था लेकिन अब पामोलीन का ही आयात शुरू होने से स्थानीय रिफाइनिंग कंपनियों, देशी तिलहन उत्पादक किसानों और उपभोक्ताओं को नुकसान होगा।

उन्होंने कहा कि एक तरह से कहा जाये कि जिस मात्रा में आयात शुल्क को घटाया गया, विदेशों में उन तेलों के दाम उससे कहीं ज्यादा ही बढ़ा दिये गये। इस प्रकार तेल की आवक बढ़ाने, और भाव टूटने की जो अपेक्षा की जा रही थी, वह कोशिश नाकाम होती दिख रही है। मलेशिया में पामोलीन के दाम भी बढ़ गये।

मार्च, अप्रैल और मई के दौरान आयातित तेलों के मुकाबले सस्ता होने की वजह से सरसों की खपत बढ़ी है। सरसों तेल से रिफाइंड बनाये जाने के कारण भी सरसों की कमी हुई। खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा आठ जून से सरसों में किसी अन्य तेल के सम्मिश्रण पर रोक लगाये जाने से भी उपभोक्ताओं में शुद्ध सरसों तेल के लिए मांग बढ़ी है। सरसों की मांग के मुकाबले बाजार में आवक कम है और किसान रोक-रोक कर माल ला रहे हैं। सरसों तेल का अधिकतम फुटकर भाव 150-160 रुपये लीटर चल रहा है। इसी तरह सोयाबीन रिफाइंड फुटकर में 145-155 रुपये लीटर के बीच है। इन परिस्थितियों में बीते सप्ताहांत के मुकाबले समीक्षाधीन सप्ताहांत में सरसों तेल-तिलहन कीमतों में सुधार देखा गया।

बाजार सूत्रों के अनुसार मीडिया के कुछ हलकों में तेल के खुदरा भावों को वास्तविक स्तर से ज्यादा ऊंचा बताने से उपभोक्तओं को नुकसान होता है।

सूत्रों ने कहा कि मौजूदा सत्र में सरसों किसानों को जो दाम मिले हैं उससे सरसों की आगामी फसल जोरदार होने की उम्मीद की जा रही है और विशेषज्ञों का मानना है कि किसान गेहूं की जगह सरसों की अधिक बुवाई कर सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार को अभी से ही सरसों के बीज का इंतजाम कर लेना चाहिये क्योंकि अभी बाजार में फसल उपलब्ध है और कहीं ऐसा न हो कि ऐन बिजाई के मौके पर सरसों की संभावित बम्पर पैदावार की राह में बीज की कमी कोई रोड़ा बने।

सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन के बीज की कमी के कारण सोयाबीन खेती का रकबा और उत्पादन कमजोर रहने की संभावना है। कहीं ऐसी हालत सरसों के साथ न हो जिसकी बिजाई अक्टूबर-नवंबर में की जायेगी। सहकारी संस्था हाफेड को बाजार भाव से सरसों के दो ढाई लाख टन का स्टॉक खरीद लेना चाहिये था। इससे बीज का भी इंतजाम रहता और हाफेड की पेराई मिलें सुचारू रूप से चल रही होतीं।

सूत्रों ने कहा कि अभी जो स्थिति बनती दिख रही है उससे सरसों की मांग और बढ़ेगी क्योंकि उपभोक्ताओं को शुद्ध सरसों तेल उपलब्ध हो रहा है।

सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन की तेजी की वजह से बाकी तेल-तिलहनों के भाव भी मजबूत हो गये। स्थानीय मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहनों के भाव में सुधार आया जबकि मांग बढ़ने से बिनौला तेल भी समीक्षाधीन सप्ताहांत में लाभ के साथ बंद हुए। पिछले सप्ताह सोयाबीन लातूर कीर्ति (प्लांट डिलिवरी) 7,650 रुपये से बढ़कर 8,000 रुपये क्विंटल हो गया।

विदेशों में भाव बढ़ने से सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतें भी पर्याप्त लाभ के साथ बंद हुईं।

बीते सप्ताह, सरसों दाना का भाव 100 रुपये का लाभ दर्शाता 7,275-7,325 रुपये प्रति क्विन्टल हो गया जो पिछले सप्ताहांत 7,125-7,175 रुपये प्रति क्विंटल था। सरसों दादरी तेल का भाव भी 250 रुपये बढ़कर 14,500 रुपये प्रति क्विन्टल हो गया। सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी टिनों के भाव भी समीक्षाधीन सप्ताहांत में क्रमश: 45 रुपये और 55 रुपये का लाभ दर्शाते क्रमश: 2,345-2,395 रुपये और 2,445-2,555 रुपये प्रति टिन पर बंद हुए।

सोयाबीन के तेल रहित खल (डीओसी) की भारी स्थानीय और निर्यात मांग के कारण सोयाबीन दाना और लूज के भाव क्रमश: 195 रुपये और 245 रुपये का लाभ दर्शाते क्रमश: 7,645-7,695 रुपये और 7,545-7,645 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए। मांग बढ़ने से समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन दिल्ली (रिफाइंड), सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम के भाव क्रमश: 100 रुपये, 400 रुपये और 600 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 14,100 रुपये, 13,700 रुपये और 12,800 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए।

गुजरात में मूंगफली की गर्मी की फसल मंडियों में आने से समीक्षाधीन सप्ताहांत में मूंगफली दाना 25 रुपये के सुधार के साथ 5,520-5,665 रुपये, मूंगफली गुजरात 100 रुपये सुधरकर 13,600 रुपये क्विन्टल तथा मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव 25 रुपये के सुधार के साथ 2,100-2,230 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताहांत में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 110 रुपये के सुधार के साथ 10,460 रुपये, पामोलीन दिल्ली का भाव 300 रुपये सुधरकर 12,400 रुपये और पामोलीन कांडला तेल का भाव 300 रुपये सुधार के साथ समीक्षाधीन सप्ताहांत में 11,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

तेजी के आम रुख के अनुरूप स्थानीय मांग के कारण बिनौला तेल का भाव भी 300 रुपये सुधरकर समीक्षाधीन सप्ताहांत में 13,200 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ।

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