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नीति आयोग का निपटान किए जाने वाले कचरे की मात्रा के अनुपात में शुल्क का प्रस्ताव

By भाषा | Updated: November 30, 2021 16:29 IST

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नयी दिल्ली, 30 नवंबर नीति आयोग ने कचरा पैदा करने वालों से संग्रह शुल्क लेने का सुझाव दिया है। यह शुल्क कचरे के निपटान की कुल मात्रा के अनुपात में लगाने का सुझाव दिया गया है।

आयोग ने यह भी कहा कि गीले कचरे का निपटान कंपोस्टिंग के जरिये जबकि सूखे कचरे को स्थानीय रद्दी सामान लेने वाले को बिक्री के माध्यम से निपटाया जा सकता है।

उसने कहा, ‘‘कचरा पैदा करने वालों से कचरे के निपटान की कुल मात्रा के अनुपात में संग्रह शुल्क लिया जा सकता है। साथ ही कचरे को अलग-अलग करने, उसका स्रोत स्तर पर ही निपटान करने के लिए कचरा पैदा करने वाले को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे छोटी राशि ही निगम प्रणाली को देने की जरूरत होगी।’’

ये सुझाव कचरा पैदा होने वाले स्थान पर ही उसे अलग करने तथा निपटान को लेकर वित्तीय प्रोत्साहन देने और इसके उलट हतोत्साहित करने के नीति आयोग के प्रस्ताव का हिस्सा हैं। वास्तव में भारत अपशिष्ट उत्पादन में वृद्धि से जूझ रहा है जिसके 2050 तक तीन गुना बढ़ने की आशंका है।

देश में सालाना 4.98 करोड़ टन ठोस अपशिष्ट पैदा होता है। वहीं दुनिया में यह करीब दो अरब टन है। इसके 2050 तक 70 प्रतिशत बढ़कर 3.4 अरब टन सालाना हो जाने का अनुमान है।

आयोग ने सुझाव दिया कि नवीन अपशिष्ट-आधारित प्रौद्योगिकियों और उत्पादों को विकसित करके तथा अपशिष्ट उपयोग को वित्तीय या अन्य लाभों से जोड़कर कचरे के विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

नीति आयोग के अनुसार, ‘‘यह लाभ मकान कर, जल कर या संपत्ति पंजीकरण कर अथवा अनिवार्य मंजूरी में तेजी आदि के जरिये दिया जा सकता है।’’

आयोग का कहना है कि एक हरित सार्वजनिक खरीद नीति पुनर्चक्रण के प्रचार-प्रसार के लिए प्रमुख उत्प्रेरक का काम कर सकती है क्योंकि सरकार उत्पादों की सबसे बड़ी खरीदारों में से एक है।

नीति आयोग ने कहा, ‘‘उन उत्पादों की अनिवार्य या तरजीही आधार पर खरीद, जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक अपशिष्ट सामग्री का पुन:चक्रण किया गया है, को अपनाने के लिए विचार किया जा सकता है।’’

उसने यह भी सुझाव दिया कि निजी परिचालकों को कूड़ा डालने वाली जगहों पर ‘डंपिंग’ कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आयोग के अनुसार, दक्षिण-एशिया और उप-सहारा अफ्रीका के दुनिया के सबसे तेजी से वृद्धि वाले क्षेत्रों में आने वाले भारत जैसे देशों में 2050 तक अपशिष्ट उत्पादन में तीन गुना वृद्धि की आशंका है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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