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‘नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य पाने को क्रियान्वयन एजेंससियों पर नजर रखने, मदद करने की जरूरत’

By भाषा | Updated: March 8, 2021 21:27 IST

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नयी दिल्ली, आठ मार्च संसद की एक समिति ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) से 2022 तक 1,75,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिये क्रियान्वयन एजेंसियों के कामकाज पर निरंतर नजर रखने और जरूरी मदद के लिए तत्पर रहने को कहा है।

भारत ने 2022 तक 1,75,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। उस लिहाज से समिति की टिप्पणी महत्वपूर्ण है।

संसद में सोमवार को पेश ऊर्जा पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘मंत्रालय (एमएनआरई) को क्रियान्वयन एजेंसियों के कामकाज पर वास्तविक समय के आधार पर नजर रखने के साथ किसी प्रकार की समस्या होने पर उसका तुरंत समाधान सुनिश्चित करना चाहिए ताकि वित्त वर्ष 2021-22 के लिये अनुदान के विभिन्न मदों के तहत जो लक्ष्य रखे गये हैं, उसे सफलतापूर्वक हासिल किया जा सके।’’

रिपोर्ट के अनुसार एमएनआरई अपने सालाना लक्ष्य को हासिल करने में लगातार विफल रहा है।

समिति ने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिये ग्रिड से जुड़े नवीकरणीय ऊर्जा के लिये क्रमश: 15,355 मेगावाट और 11,852 मेगावाट का लक्ष्य रखा गया था जबकि वास्तविक प्राप्ति केवल 8,519.52 मेगावाट और 8,761.26 मेगावाट रही।’’

समिति के अनुसार यानी लक्ष्य के मुकाबले प्राप्ति में 2018-19 और 2019-20 में करीब 45 प्रतिशत और 26 प्रतिशत की कमी रही।

इसी प्रकार, 2020-21 के दौरान (जनवरी 2021 तक) 12,380 मेगावाट लक्ष्य के मुकाबले 5,473.08 मेगावाट क्षमता स्थापित की जा सकी है।

समिति का मानना है कि सालाना लक्ष्य हासिल नहीं होने से मंत्रालय के लिये 2022 तक 1,75,000 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ साल में लक्ष्य और प्राप्ति में अंतर को देखते हुए समिति उम्मीद करती है कि मंत्रालय 2021-22 में लक्ष्य को हासिल करने के मामले में उल्लेखनीय सुधार लाएगा।

इसमें कहा गया है कि 31 जनवरी, 2021 तक 92,540 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है जो लक्ष्य का 50 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। इसका मतलब है कि कोष के बेहतर उपयोग के साथ 82,460 मेगावाट डेढ़ साल में ही पूरा करना है।

हालांकि पिछले कुछ साल की प्रवृत्ति को देखा जाए तो मंत्रालय अपने बजटीय आबंटन का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं कर सका है।

समिति के अनुसार अगर मंत्रालय की तरफ से निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने को लेकर अगर कोई ढिलाई होती है, तो प्रतिबद्धता पूरा करना मुश्किल होगा।

एक अलग रिपोर्ट में समिति ने स्मार्ट ग्रिड और समार्ट मीटर धीरे-धीरे अपनाये जाने के साथ बिजली मंत्रालय से साइबर सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने को कहा है।

समिति ने कहा कि बिजली प्रणाली की साइबर सुरक्षा महत्वपूर्ण है। समिति यह सिफारिश करती है कि मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से ले और इस संदर्भ में प्रभावी और पर्याप्त सुरक्षात्मक कदम उठाये।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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