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NDDB ने झारखंड के डेरी सहकारिता उत्पादों की पहुंच बाजार तक बनाई

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 1, 2019 13:04 IST

डेरी बोर्ड के प्रयासों से झारखण्ड के ग्रामीण दूध उत्पादकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है। नई दूध संकलन प्रक्रियाओं को अपनाने से अब उत्पादक अधिक आमदनी कर रहे हैं। वर्तमान में 100 फीसदी दूध उत्पादकों को भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में मिलता है।

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राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने पांच सालों में झारखंड के दूध उत्पादकों को एक पारदर्शी तथा गुणवत्ता पर आघारित दूध संकलन प्रणाली उपलब्ध कराई है। देश में डेरी विकास के लिए पेशेवर तरीके से संस्थाओं को वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग दे रही एनडीडीबी से झारखंड सरकार ने नवगठित झारखण्ड दूध महासंघ के प्रबंधन का अनुरोध किया था। एनडीडीबी के साथ हुए करार से झारखण्ड के दूध उत्पादकों को एक पारदर्शी तथा गुणवत्ता पर आधारित दूध संकलन प्रणाली उपलब्ध हुई। 

हाल ही में झारखण्ड दूध महासंघ ने ‘मेधा गर्भवती तथा मातृत्व पोषण योजना’ को आरंभ किया है जिसमें दूध उत्पादक सदस्यों के परिवार की गर्भवती महिला को गर्भावस्था के पहले तथा गर्भावस्था के बाद 6 किलोग्राम घी नि:शुल्क दिया जाता है। इससे नवजात शिशु को मां से उचित पोषण मिलता है।

एनडीडीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एनडीडीबी फाउंडेशन फॉर न्यूट्रिशन (एनएफएन) सुरक्षित दूध तथा दूध उत्पाद उपलब्ध करवाकर स्कूली बच्चों में कुपोषण की समस्या का उन्मूलन करने में योगदान दे रहा है। झारखण्ड सरकार की कान्हा योजना के अंतर्गत जेएमएफ को गिफ़्टमिल्क पहल की ज़िम्मेदारी दी गई है तथा लातेहार, रांची, गुमला, हजारीबाग,सिमडेगा, खूंटी,लोहारडागा तथा रामगढ़ में 1 लाख बच्चों को शामिल करने का उत्तरदायित्व दिया गया है। 

डेरी बोर्ड के प्रयासों से झारखण्ड के ग्रामीण दूध उत्पादकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है। नई दूध संकलन प्रक्रियाओं को अपनाने से अब उत्पादक अधिक आमदनी कर रहे हैं। वर्तमान में 100 फीसदी दूध उत्पादकों को भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में मिलता है।

एनडीडीबी की सक्रिय भूमिका से डेरी उद्घोग को मजबूती मिली है। झारखण्ड के दूध उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिलना सुनिश्चित हुआ है। एनडीडीबी द्वारा अपनाए गए नए उपायों से शहरी क्षेत्रों की मांग पूरी हुई है और ग्रामीण् क्षेत्र के लोगों को आय के अच्छे साधन उपलब्ध हो रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। 

एनडीडीबी के नेतृत्व में वर्ष 2018-19 में (झारखंड मिल्क फेडरेशन) जेएमएफ ने 2000 से अधिक गांवों के 562 दूध संकलन स्थलों से 20,500 दूध उत्पादकों से करीब 1.25 लाख किलोग्राम दूध प्रतिदिन एकत्रित किया है। जुलाई 2019 के महीने में दूध विपणन 1.13 लाख लीटर के चिन्ह को पार कर गया है। वार्षिक बिक्री वर्ष 2014-15 (जेएमएफ का पहला वर्ष) में लगभग 21 करोड़रूपये थी जो वर्ष 2018-19 के दौरान बढ़कर लगभग 173 करोड़रूपये हो गई।

एनडीडीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्तमान में जेएमएफ के पास 300 से अधिक डाटाप्रोसेसर पर आधारित दूध संकलन इकाइयों (डीपीएमसीयू) तथा लगभग 80 स्वचालित दूध संकलन इकाइयों(एएमसीयू) का नेटवर्क है। इसने रांची,लातेहार,देवघर तथा कोडरमा के आसपास के चार डेरी संयंत्रों में 80 बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए हैं। तीन और डेरी संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं जो साहेबगंज,सारथ तथा पलामू में होंगे। 

प्रत्येक संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन 50,000 लीटर होगी जिसका विस्तार 1 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। रांची में एक आधुनिक पशु आहार संयंत्र स्थापित किया गया है जो प्रतिदिन 50 मीट्रिक टन मिश्रित पशु आहार का उत्पादन कर सकता है। इसमें चीलेटेड खनिज मिश्रण होते हैं जिसमें अधिक जैविक, वृहत तथा सूक्ष्म, तत्व उपलब्ध होते हैं। इस पशु आहार से पशुओं में पोषक तत्वों की कमी से निपटा जाएगा तथा दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।

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