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सावधानीपूर्वक निवेश से ठोस संपत्ति की ओर: निश्चित आय वालों का भूखंड की ओर बढ़ता रुझान

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 9, 2026 18:22 IST

फटाखों की आतिशबाजी जैसी शोर मचाते हुए नहीं आतीं कह साधे, लगातार और कई बार हेसाजी लगते वाले निर्णयों से धीरे धीरे बनती है

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ठळक मुद्देअगर डेवलपर भाग गया हो? अगर इलाके का विकास ही नहीं हुआ तो?दो घटनाएं घटी और उनका दृष्टिकोण बदलने लगा.तैयार हो रही सुविधाए है, जिन्हें लोग देख सकते हैं और अनुभव कर सकते है.

नीरज शाह, मुख्य विपणन अधिकारी, लोक इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड

मुंबईः जोखिम टालने के चक्कर में कई रुपने अझै रह जाते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो बहुत ज्यादा सावधानी बरतते बातते कई बार इंसान अपने ही सपनों की राह से भटक जाता है. मद्वारा के सेवानिवृत्त प्राचार्य पांगुल की कहानी उसी का उदाहरण है. उन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत से बचत की, एफड़ी, पीपीएफ और निश्चित आज देने वाली योजनाओं में पैसा लगाया दोस्तों ने कई बार काटने की सलाह दी लेकिन वे नम्रतापूर्वक मना कर देते थे उन्हें इस सिम लगता था वे वे सवाल पूछते थे, अगर डेवलपर भाग गया हो? अगर इलाके का विकास ही नहीं हुआ तो?

ऐसे सवाल सिर्फ नहीं ये, देशभर में कई जिम्मेदार कमाने वाले लोगनती कीमतें देखते रहे, लेकिन खुद निकले से डरते रहे. ऐसा नहीं था कि वे खरीद नहीं सकते थे, बल्कि उन्हें डर था कि एक गलत फैसला उनकी कई सालों की मेहनत से की गई बचत को खतरे में डाल सकता है, क्योंकि अधूरे प्रोजेक्ट और धोखाधड़ी की कहानिया उन्होंने सुनी थीं, और वे पूरी तरह गलत भी नहीं थीं. श्री पांगुल उसो छाया में बड़े थे, लेकिन इसके बाद दो घटनाएं घटी और उनका दृष्टिकोण बदलने लगा.

असल बात : बेसा-पिपला-खरसोली में बन रहा नया भरोसा

नागपुर में, खासकर बेला-पिपला खरसोली इलाके में बदलाव दिखने लगा है. यहां धीरे धीरे स्कूल, सड़ी और बाजार जैसी सुविधाएं ठिकलित हो सही है. माठकठगीय परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल नहीं बल्कि भरोसा होता है. क्या ट्रेवलपर भरोसेमंद है? क्या यह अगर अतिषय में अथारिटर्न देगी? क्या काम समय पर पूरा हो पाएगा? दक्षिण नागपुर के इस तेजी से फैलते इलाके में आ बाते हो नहीं, बल्कि जमीन पर काल दिख रहा है. केवल आस्वासन हो नहीं बल्कि यहां प्रत्यक्ष रूप से तैयार हो रही सुविधाए है, जिन्हें लोग देख सकते हैं और अनुभव कर सकते है.

आज लामपुर में खासकर बेसा पिपला खरसोली कॉरिट्रोर में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है. संपति फटाखों की आतिशबाजी जैसी शोर मचाते हुए नहीं आतीं कह साधे, लगातार और कई बार हेसाजी लगते वाले निर्णयों से धीरे धीरे बनती है

लोक 8 ब्रुकसाइड साइट देखने पर आई फैसले की घड़ी

विदेश के एक अभ्यास दौरे के दौरान पांगुल ने योजनाबद्ध कॉलोनियां देखों. मजबूत बुनियादी सुविधाएं, सुव्यवस्थित विकास और दीर्घकालीन मूल्य निर्माण, उन्हें यह अच्छी तरह समझ में आया कि सही योजना कैसी होती है. इसके बाद समाचार पत्र में प्रकाशित विज्ञापन के कारण दक्षिण नागपुर के खरसोली में लोकमत समूह के लोकठ बुकसाइड लाइफस्टाइल प्लॉटिंग प्रोजेक्ट को भेंट देने का उन्हें मौका मिला.

समाचार पत्र में विज्ञापन पढ़कर उन्होंने दक्षिण नागपुर के बरसोली में लोकठ ब्रुकसाइड लाइफस्टाइल मूस्पेंड की की साइट को भेंट दी. पहले देखे गए अनेक प्रोजेक्ट्स की तरह उन्हें उम्मीद थी कि यहां सिर्फ साली अमीन और एक टुकड़ा दिखाया आएगा. उन्हें उम्मीद थी कि पहले की तरह बड़े-बड़े वादे मिलेंगे, लेकिन प्रत्यक्ष में लोक 8 ब्रुकसाइड की साइट देखकर वे आश्चर्यचकित हो गए,

बेहतरीन पक्की सड़कें, स्ट्रीट लाइट और व्यवस्थित प्लॉटिंग देखकर वे दंग रह गए. युकसाइट देखकर उन्हें विदेश के प्रोजेक्ट याद आ गए. उनकी पत्नी ने भी कहा कि यह मौका छोड़ना नहीं चाहिए. पहले देखे गए कई प्रोजेक्ट्स और बुक्साइड साइट में जमीन-आसमान का फर्क था.

इस साइट विजिट के बाद उनकी दुविधा खत्म हो गई आज वे बड़ी खुशी के साथ कहते हैं, "हमने लोक 8 बुकसाइड में निवेश का फैसला किया. इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़े लोकमठ के नाम से हमे भरोसा मिला हमें इस प्रोजेक्ट में निवेश से बड़ा आधार मिला है."

संयमित बचतकर्ताओं के लिए भूखंड क्यों साबित हो रहा है उपयुक्त ?

इसमें शेयर बाजार की तरह रोज उतार-चढ़ाव देखने की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह गणित शांत लेकिन प्रभावी है. अगर आपके पास 10-15 लाख की बचत है, तो आप 50-60 लाख कीमत वाले भूखंड में निवेश कर सकते हैं. शुरुआत में कुछ रकम देनी होती है और बाकी किश्तों में चुकाई जा सकती है. लेकिन कीमत बढ़ने का फायदा पूरे भूखंड की वैल्यू पर मिलता है. रोज रेट देखने की जरुरत नहीं. हड़बड़ी में बेचने का सवाल ही नहीं, धीरे-धीरे और स्थिर तरीके से संपत्ति बढ़‌ती रहती है.

लेकिन अनुशासित परिवारों के लिए यही सुरक्षित लगता है. क्योंकि आसानी से पैसे नहीं निकाले जा सकते, इसलिए बचत टिकी रहती है. हर महीने दी जाने चाली किश्त एक तरह की नियमित बचत बन जाती है. यह बहुत ज्यादा रोमांचक नहीं लगेगा, लेकिन असली संपत्ति इसी तरह बनती है. स्वामोशी से और निरंतरता से.

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