किसानों को 10,500 करोड़ की सौगात?, कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णय, उड़द फसल पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान

By मुकेश मिश्रा | Updated: February 24, 2026 16:50 IST2026-02-24T16:46:11+5:302026-02-24T16:50:53+5:30

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना (2008.683 करोड़), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-पर ड्रॉप मोर क्रॉप (2393.97 करोड़), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (3285.49 करोड़), नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (1011.59 करोड़) और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल सीड योजना (1793.87 करोड़) शामिल हैं।

mp cm mohan yadav kisan gift Rs 10500 crore farmers Important decisions Cabinet announcement giving Rs 600 per quintal bonus on urad crop | किसानों को 10,500 करोड़ की सौगात?, कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णय, उड़द फसल पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान

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Highlights पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर चलाने का फैसला हुआ।मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, "हम जो कहते हैं, करके दिखाते हैं।" ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन होगा।

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को घोषणा की कि किसान कल्याण वर्ष को मजबूत बनाने के लिए मंत्रि-परिषद् ने आज महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि पूरी कैबिनेट बैठक किसानों को समर्पित रही। देश में पहली बार उड़द फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान किया गया है। सरसों उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़कर इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन होने की संभावना है, जिसे भावांतर योजना में शामिल किया जा रहा है। डॉ. यादव ने सदन में सिलसिलेवार जानकारी दी कि 24 जनवरी को घोषित वक्तव्य के अनुरूप कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। कुल 10,500 करोड़ रुपये की पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर चलाने का फैसला हुआ।

इनमें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना (2008.683 करोड़), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-पर ड्रॉप मोर क्रॉप (2393.97 करोड़), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (3285.49 करोड़), नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (1011.59 करोड़) और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल सीड योजना (1793.87 करोड़) शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, "हम जो कहते हैं, करके दिखाते हैं।" इन योजनाओं से ड्रिप-स्प्रिंकलर इरीगेशन, प्राकृतिक खेती, दलहन-तिलहन उत्पादन, मिट्टी उर्वरता और रसायन-मुक्त खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। किसानों को क्षेत्र विस्तार, सिंचाई अनुदान और उत्पादन बढ़ाने में निरंतर सहायता मिलेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन होगा।

डॉ. यादव ने किसानों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि ये कदम समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश के लक्ष्य को साकार करेंगे। सरसों-उड़द जैसे नवाचार से प्रदेश अग्रणी बनेगा। विपक्ष के सवालों के बीच सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।

भगौरिया लोकोत्सव अब राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनेगा

मध्यप्रदेश विधानसभा के सत्र में मंगलवार को एक ऐतिहासिक घोषणा ने सदन की वातावरण को उत्साह से भर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मालवांचल के जनजातीय हृदय स्थल में फाग पर्व के रूप में प्रसिद्ध भगौरिया लोकोत्सव को राष्ट्रीय पर्व का दर्जा देने की घोषणा की। यह निर्णय न केवल मध्यप्रदेश की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर उजागर करेगा,

बल्कि सामाजिक उत्सवों के माध्यम से विकास की नई दिशा भी प्रदान करेगा। डॉ. यादव ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भगौरिया, जो होली से सात दिन पहले शुरू होकर होलिका दहन तक चलने वाला सात दिवसीय आनंदोत्सव है, अब झाबुआ, बड़वानी, धार, आलीराजपुर और खरगोन के भील, भिलाला एवं बारेला जनजातियों की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पूरे देश में गूंजेगा।

उन्होंने बताया कि सरकार इन जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कृषि कैबिनेट की बैठक आयोजित करने की तैयारी कर रही है, जिसमें वे स्वयं भगौरिया पर्व में भाग लेंगे। यह कदम सामाजिक उत्साह को विकास से जोड़ते हुए प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की ओर से सभी जनजातीय बंधुओं को हार्दिक बधाई दी।

भगौरिया की सांस्कृतिक छटा 

भगौरिया प्राचीन काल से चला आ रहा आनंद का प्रतीक है। ढोल-मांदल की थाप पर युवा सज-धजकर नाचते-गाते हैं, जबकि मेले झूले, चकरी, खाद्यान्न दुकानों और गुलाल होली से सजे बाजारों का रूप ले लेते हैं। झाबुआ जिले में ही 24 फरवरी से सात दिनों तक 35 भगौरिया मेले लगेंगे, जहां दूर-दराज से लौटे प्रवासी आदिवासी अपनी जड़ों से जुड़ेंगे।

इसका इतिहास गुललिया हाट से जुड़ा है, जो फसल कटाई के बाद खुशियों का बाजार था। कुछ इसे भगू राजा या भगोर से संबद्ध मानते हैं। यह उत्सव बसंत का स्वागत करता है, जहां प्रेम प्रस्ताव और सामूहिक उल्लास प्रकृति के रंगों में डूब जाता है।

विकास और संस्कृति का संगम

मुख्यमंत्री ने जनजातीय नायक टंट्या मामा के सम्मान में चल रहे कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि भगौरिया अब विकास का मंच बनेगा। बड़वानी-धार-झाबुआ सेक्टर में कृषि कैबिनेट से किसानों को लाभान्वित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

पहले राज्य स्तर पर राजकीय पर्व बना यह लोकोत्सव अब राष्ट्रीय पहचान पाएगा, जो पर्यटकों को आकर्षित करेगी।  यह घोषणा मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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