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मोदी सरकार के इस प्रयास से लोन वसूली का आंकड़ा 80 हजार करोड़ के पार पहुंचा, 2019 में और बढ़ेगा आंकड़ा

By भाषा | Updated: December 25, 2018 17:00 IST

कॉर्पोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने पीटीआई को बताया कि 2018 में आईबीसी के तहत एनसीएलटी और एनसीएलएटी (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण) के माध्यम से विभिन्न कॉर्पोरेट कर्जदारों से 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गयी है।

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कर्ज वसूलने का जिम्मा संभाल रहे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता प्रक्रिया से 2018 में 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली करने में मदद की। अगले साल इसके बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये से ऊपर जाने की उम्मीद है क्योंकि कुछ बड़े ऋण चूक के मामले अभी लंबित हैं। 

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, न्यायाधीशों और पीठों की संख्या में वृद्धि और प्रक्रिया में तेजी के लिये पर्याप्त बुनियादी ढांचे के माध्यम से एनसीएलटी को और मजबूत करने की योजना बनायी जा रही है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि नया साल न केवल दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की काबिलियत को परखेगा बल्कि एनसीएलटी और उसके अपीलीय निकाय एनसीएलएटी की भी कड़ी परीक्षा लेगा। 2019 में कई बड़े मामलों का समाधान करने की जरुरत है। इसमें एस्सार स्टील (80,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज) और भूषण स्टील एंड पावर (45,000 करोड़ रुपये) प्रमुख हैं। 

कॉर्पोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने पीटीआई-भाषा को बताया कि 2018 में आईबीसी के तहत एनसीएलटी और एनसीएलएटी (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण) के माध्यम से विभिन्न कॉर्पोरेट कर्जदारों से 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गयी है। 

अनुमान के मुताबिक, आईबीसी ने दिसंबर 2016 में प्रभावी होने के बाद से करीब 3 लाख करोड़ रुपये की फंसी संपत्तियों का समाधान करने में मदद की है।

उन्होंने कहा, "इस अनुमान में समाधान योजना के तहत वसूली और एनसीएलटी के समक्ष पेश होने से पहले निपटाये गये मामले शामिल हैं।" 

उम्मीद है कि 2019 में एनसीएलटी अपने 11 पीठों के माध्यम से कई संकटग्रस्त परिसंपत्तियों की दिवाला समाधान प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी। इन मामलों में एस्सार स्टील, भूषण पावर एंड स्टील, वीडियोकॉन समूह, मोनेट इस्पात, एमटेक आटो, रुचि सोया, लैंको इंफ्राटेक, जेपी इंफ्राटेक समेत अन्य हैं।

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