वैष्णो देवी रोपवे के खिलाफ एक और बंद कामयाब रहा, आखिर क्यों हो रहा प्रदर्शन?

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 18, 2026 18:46 IST2026-02-18T18:46:06+5:302026-02-18T18:46:54+5:30

कटड़ा में माता वैष्णो देवी मंदिर भवन मार्ग पर प्रस्तावित रोपवे परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है।

mata Vaishno Devi ropeway Another successful shutdown against why is the protest happening? | वैष्णो देवी रोपवे के खिलाफ एक और बंद कामयाब रहा, आखिर क्यों हो रहा प्रदर्शन?

file photo

Highlightsएक दिन के सांकेतिक बंद का ऐलान किया गया था। करीब 4,000 घोड़े वाले, 12,000 पिट्ठू और पालकी सेवा से जुड़े लोग काम करते हैं।दुकान पर औसतन 5 से 7 लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है।

जम्मूः कटड़ा में माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बन रहे रोपवे के खिलाफ संघर्ष समिति ने बुधवार को कटड़ा बंद करने का आह्वान किया था जो कामयाब रहा। समिति ने व्यापारियों, घोड़ा चालकों, पिट्ठू और पालकी संचालकों से बंद को सफल बनाने की अपील की थी। हालांकि, होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं को इससे बाहर रखा गया था। बोर्ड के दावानुसार, दिव्यांगों, बुजुर्गों व बच्चों की सुविधा के लिए माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड यात्रा मार्ग पर ताराकोट से लेकर सांझी छत तक रोपवे बना रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि रोपवे के बनने से यात्रा मार्ग पर सेवाएं दे रहे घोड़ा चालक, पिट्ठू, पालकी संचालक और छोटे व्यापारी प्रभावित होंगे। कटड़ा में माता वैष्णो देवी मंदिर भवन मार्ग पर प्रस्तावित रोपवे परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है।

बुधवार को इसके खिलाफ एक दिन के सांकेतिक बंद का ऐलान किया गया था। इसके चलते बाजार बंद रहे। होटलों के बाहर नो रोपवे के पोस्टर लगाए गए थे। यात्रा से जुड़े लोगों का कहना है कि रोपवे शुरू होने से करीब 4.5 लाख लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। उनका तर्क है कि इस मार्ग पर करीब 4,000 घोड़े वाले, 12,000 पिट्ठू और पालकी सेवा से जुड़े लोग काम करते हैं।

इसके अलावा दर्शनी ड्योढ़ी से भवन की ओर करीब 3.5 किलोमीटर के दायरे में लगभग 7,500 दुकानें हैं, जिनमें हर दुकान पर औसतन 5 से 7 लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। कटड़ा में 750 से अधिक होटल और 150 से ज्यादा धर्मशालाएं भी इस यात्रा पर निर्भर हैं। विरोध कर रहे लोगों का यह भी कहना है कि रोपवे लगने से पारंपरिक धार्मिक यात्रा क्रम प्रभावित होगा।

श्रद्धालु आमतौर पर दर्शनी ड्योढ़ी, चरण पादुका जैसे पड़ावों से होते हुए भवन और फिर भैरव मंदिर के दर्शन कर यात्रा पूर्ण करते हैं। उनका मानना है कि रोपवे से यह क्रम बाईपास हो जाएगा और यात्रा की पारंपरिक भावना कमजोर पड़ेगी। हालांकि श्राइन बोर्ड का पक्ष है कि हर साल भवन पहुंचने वाले करीब 80 से 90 लाख श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने के लिए यह परियोजना जरूरी है,

ताकि श्रद्धालु कम समय में दर्शन कर सकें और बुजुर्गों व दिव्यांग यात्रियों को विशेष सहूलियत मिल सके। फिलहाल पूरा विवाद श्राइन बोर्ड और यात्रा से जुड़े स्थानीय हितधारकों के बीच खिंचता नजर आ रहा है।
दरअसल, इस परियोजना को वर्ष 2024 में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से शुरू किया जाना था। उस समय कटड़ा के लोगों ने करीब 18 दिनों तक लंबा विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की थी,

जिसके बाद बोर्ड को फिलहाल परियोजना टालनी पड़ी थी और एक कमेटी का गठन किया गया था। वार्षिक बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि भवन मार्ग पर काम करने वाले घोड़े, पिट्ठू और पालकी सेवा से जुड़े लोगों का चरणबद्ध तरीके से पुनर्वास कराया जाएगा और उसके बाद ही रोपवे परियोजना आगे बढ़ाई जाएगी।

Web Title: mata Vaishno Devi ropeway Another successful shutdown against why is the protest happening?

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