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पल-पल बदलते रंग?, मौसम की मार और किसान परेशान?, आखिर क्या करें?

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: April 6, 2026 08:51 IST

साल फूलों की बहार बहुत शानदार थी लगभग सभी फल-बेल्ट में फूल एक समान और बड़े पैमाने पर खिले थे। लेकिन इस चरण में लगातार बारिश होने से परागण और फल बनने की प्रक्रिया में रुकावट आती है।

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ठळक मुद्देअच्छी पैदावार वाले मौसम की उम्मीदें बढ़ गई थीं। बारिश का यह सिलसिला अब चिंता का सबब बन गया है।अब तक हुई सारी प्रगति पर पानी फिर सकता है।

जम्‍मूः लंबे सूखे के बाद अब कश्मीर भर में लगातार हो रही बारिश ने घाटी में वसंत के फलों के मौसम की अच्छी शुरुआत की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। स्ट्रॉबेरी और चेरी उगाने वाले किसानों को फसल के विकास के इस अहम चरण में संभावित नुकसान का डर सता रहा है। अभी कुछ ही दिन पहले, उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के कई हिस्सों में बागों और खेतों में फूलों की बहार आई हुई थी, जिससे अच्छी पैदावार वाले मौसम की उम्मीदें बढ़ गई थीं। लेकिन, बारिश का यह सिलसिला अब चिंता का सबब बन गया है।

विशेषज्ञ और किसान, दोनों ही चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले दिन फसल के लिए निर्णायक साबित होंगे। कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स एसोसिएशन के चेयरमैन, बशीर अहमद बशीर कहते थे कि शुरुआती संकेत तो बहुत उत्साहजनक थे, लेकिन अगर मौजूदा मौसम ऐसा ही बना रहा, तो अब तक हुई सारी प्रगति पर पानी फिर सकता है।

उनका कहना था कि इस साल फूलों की बहार बहुत शानदार थी लगभग सभी फल-बेल्ट में फूल एक समान और बड़े पैमाने पर खिले थे। लेकिन इस चरण में लगातार बारिश होने से परागण और फल बनने की प्रक्रिया में रुकावट आती है। फसल के लिए अगले 10 दिन बेहद अहम हैं। स्ट्रॉबेरी, जो बाजार में सबसे पहले पहुंचने वाले फलों में से एक है, फूलों के खिलने के चरण में सबसे ज्‍यादा संवेदनशील होती है।

शोपियां में, किसान अब्दुल राशिद मीर बताते थे कि इस फसल से किसानों को बहुत ज्‍यादा उम्मीदें थीं। उन्होंने बताया कि हमें लग रहा था कि यह मौसम बहुत अच्छा रहेगा। पौधे मजबूत हैं और उन पर खूब फूल भी आए थे। लेकिन अब अगर बहुत अधिक बारिश होती है, तो फूलों को नुकसान पहुंच सकता है और फल बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।

पड़ोसी जिले पुलवामा में, गुलाम नबी भट ने जमीन में नमी की अधिकता से पैदा हो रही समस्याओं की ओर इशारा किया। जबकि कुलगाम के एक अन्य किसान, मोहम्मद यूसुफ डार कहते थे कि इस अनिश्चितता का सबसे ज्‍यादा असर उन किसानों पर पड़ रहा है, जिन्होंने इस मौसम में पहले ही भारी-भरकम निवेश कर रखा है। 

हालांकि शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने भी बागवानों को लगातार नमी वाले मौसम से जुड़े खतरों के बारे में आगाह किया है। बागवानी के एक वैज्ञानिक ने बताया कि कीट-पतंगों की गतिविधि कम होने और हवा में नमी बढ़ने से कई तरह की चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं।

उन्होंने सलाह दी कि लगातार बारिश होने से परागण करने वाले कीटों की आवाजाही रुक जाती है, जिसका सीधा असर फलों के बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है। इसके साथ ही, हवा में नमी का स्तर ज़्यादा होने से फफूंदी से होने वाली बीमारियों के पनपने के लिए आदर्श हालात बन जाते हैं। किसानों को सतर्क रहना चाहिए और सुरक्षा के लिए सुझाए गए उपायों का पालन करना चाहिए।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरFarmers
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