दर्द कोई समझे, रील्स से बर्बादी तक?, कैसे पर्यटक और कंटेंट क्रिएटर्स पंपोर सरसों खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान?

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: April 3, 2026 15:08 IST2026-04-03T15:07:14+5:302026-04-03T15:08:28+5:30

किसान तनवीर हुसैन डार कहते थे कि यह जमीन पंपोर के मशहूर केसर के खेतों की है। हम यहां खाद डालने आए थे, लेकिन मौजूदा हालात देखकर हम परेशान हैं।

jk news Can anyone understand the pain, from reels to destruction? How are tourists and content creators damaging Pampore mustard fields? | दर्द कोई समझे, रील्स से बर्बादी तक?, कैसे पर्यटक और कंटेंट क्रिएटर्स पंपोर सरसों खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान?

photo-lokmat

Highlightsस्थानीय किसानों के लिए आजीविका का एक जरूरी जरिया भी हैं।खेतों में घुसने का बढ़ता चलन फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है, मिट्टी को सख्त बना रहा है।सरसों और केसर, दोनों की खेती के लिए जरूरी हालात को बिगाड़ रहा है।

जम्मूः पंपोर के सरसों के खेत हर वसंत में पीले रंग के समुद्र की तरह फैल जाते हैं, और अपनी शांत सुंदरता और खिली हुई बहार के कारण सबका ध्यान खींचते हैं। कई लोगों के लिए, ये खेत एक सुकून भरा नजारा पेश करते हैं; खुले आसमान के नीचे सुनहरे फूलों की कतारें लहराती हैं, जो तस्वीरों और सोशल मीडिया रील्स के लिए एक लोकप्रिय बैकग्राउंड बन जाती हैं। लेकिन इस आकर्षण के पीछे महीनों की मेहनत और निर्भरता छिपी है, क्योंकि ये खेत सिर्फ सुंदर नजारे ही नहीं हैं, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए आजीविका का एक जरूरी जरिया भी हैं।

हालांकि, हाल के सालों में, इस मौसमी आकर्षण ने बहुत ज्यादा संख्या में टूरिस्टों को अपनी ओर खींचा है। जिस चीज की कभी दूर से तारीफ की जाती थी, अब उस पर लोग चलते हैं और उसे एक पब्लिक जगह की तरह इस्तेमाल करते हैं। पर किसानों का कहना है कि फोटो और वीडियो बनाने के लिए खेतों में घुसने का बढ़ता चलन फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है, मिट्टी को सख्त बना रहा है।

सरसों और केसर, दोनों की खेती के लिए जरूरी हालात को बिगाड़ रहा है। एक किसान तनवीर हुसैन डार कहते थे कि यह जमीन पंपोर के मशहूर केसर के खेतों की है। हम यहां खाद डालने आए थे, लेकिन मौजूदा हालात देखकर हम परेशान हैं। वे बताते थे कि टूरिस्ट अक्सर बिना इजाजत के अंदर आ जाते हैं, खेतों में घूमते हैं और फूलों के बीच बैठ जाते हैं, जिससे मिट्टी दब जाती है।

फसल की बढ़वार पर असर पड़ता है। लोग फूलों के साथ फोटो खिंचवाते हैं। फूल टूट जाते हैं, और फसल ठीक से नहीं उग पाती। वे कहते थे कि हर टूटा हुआ फूल सीधे तौर पर उनकी कमाई पर असर डालता है। वह प्राइवेसी को लेकर भी चिंता जताते हैं, और कहते हैं कि लगातार दखलंदाजी ने उनके माहौल और रोजमर्रा की जिंदगी, दोनों को बिगाड़ दिया है।

किसान बताते थे कि कैसे सरसों के खेतों को अब ज्यादातर फोटो खिंचवाने की जगहों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। लोग फोटो खिंचवाने के लिए सरसों के खेतों में घुस जाते हैं। उनका कहना था कि पूरी फसल कुचलकर बर्बाद हो जाती है। यह हमारी पूरे साल की मेहनत है,। हालांकि वे टूरिज्म के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे सीमाओं की जरूरत पर जोर देते हैं।

उनका कहना था कि हम टूरिस्टों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह कोई पार्क नहीं है, यह किसी की आजीविका है। लोगों को सड़क के किनारे से ही फोटो खींचनी चाहिए, खेतों के अंदर नहीं जाना चाहिए। जबकि मोहम्मद अकबर के लिए, यह मामला और भी ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला मोड़ ले चुका है।

वे बताते थे कि पर्यटक अपनी गाड़ियां खेतों के अंदर ले गए थे, जिससे उनकी जमीन और फसलों को नुकसान पहुँचा है। वह आगे बताते हैं कि कई लोग सिर्फ सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाने आते हैं, पेड़ों पर चढ़ जाते हैं और फलों के बागों को परेशान करते हैं, जिसका असर फलों के उत्पादन पर पड़ रहा है। कुछ मामलों में, उनका आरोप है कि इन निजी जगहों के अंदर कुछ गलत गतिविधियां भी हो रही हैं।

दरअसल जैसे-जैसे सरसों के खेत लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं, किसान सम्मान, जिम्मेदारी और सुरक्षा के लिए एक सीधी-सादी अपील कर रहे हैं। जो चीज आने वाले लोगों को शायद सुंदरता का एक छोटा सा पल लगे, वही किसानों के लिए पूरे साल की गुजर-बसर का सवाल है।

Web Title: jk news Can anyone understand the pain, from reels to destruction? How are tourists and content creators damaging Pampore mustard fields?

कारोबार से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे