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जीएसटी विभाग ने कर लाभ की धांधली के मामलों में 4 को किया गिरफ्तार

By भाषा | Updated: February 15, 2021 21:58 IST

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नयी दिल्ली, 15 फरवरी माल एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग के अधिकारियों ने साधन—सामग्री पर चुकता कर की वापसी का लाभ :आईटीसी: हासिल करने में धोखाधड़ी के तीन मामलों में चार व्य​क्तियों को गिरफ्तार किया है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि इन मामलों में फर्जी बिलों के आधार पर 178 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गयी ।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उत्तरी दिल्ली के जीएसटी आयुक्त—कार्यालय के अधिकारियों ने फर्जी बिलों के माध्यम से विभिन्न इकाइयों को आईटीसी का लाभ दिलाने में लगी फर्मों के एक जाल का भांडाफोड़ किया है।

मंत्रालय के अनुसार तीन मामलों में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 178 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का अनुमान है।

इनमें से एक माले में घपलेबाजी करने वाले मुख्यलोगों ने कागज पर खड़ी चार फर्मों ने के जरिए 14 फर्मों को 54 करोड़ रुपये के आईटीसी का लाभ दिलवाया। इन चारो फर्मों ने न केवल कमीशन लेकर फर्जी बीजक जारी किए बल्कि इसी तरह के बील—पर्ची पर निर्यात के सामानों पर जीएसटी रिफंड भी ​हासिल किए।

बयान के मुताकि इस धोखाधड़ी में सबसे बड़ी भूमिका विकास गोयल और गोपाल अग्रवाल की थी। देनों ने कागजी फर्मों का तंत्र संचालित करने की बात स्वीकार कर ली है।

अधिकारियों ने उन्हें 12 फरवरी को गिरफ्तार किया

एक अन्य मामले में मोहन कुमार नाम के एक व्यक्ति ने जीएसटी—आईसीटी का कुल 111 करोड़ रुपये का लाभ अपनी दो फर्मों के नाम प्राप्त ​किया। इन फर्मों का नाम वीएमडब्ल्यू एंटरप्राइजेज और श्रीबहादुर स्टील कंपनी बताया गया है। इन दो फर्मों ने आईटीसी लाभ को कई अन्य फर्मों को बढ़ा दिया जबकि उन फर्मों को वास्तव में कोई माल बेचा ही नहीं गया था।

कुमार को 13 फरवरी को गिरफ्तार किया गया।

इसी तरह के तीसरे मामले में अधिकारियों ने 13 फरवरी को ही सुरेंद्र कुमार जैन को गिरफतार किया। वह वीडीआर कलर्स एंड केमिकल्स प्रा.लि. और एवी मेटल्स मार्केंटिंग प्रा.लि. का निदेशक बताया गया है। आरोप है कि उसने 13 करोड़ रुपये के आईटीसी लाभ का घपला किया है।

मंत्रालय के अनुसार जीएसटी शुरू होने के बाद जीएसटी :केंद्रीय कर: दिल्ली जोन में मूल्य—वर्धन श्रृंखला में बिलों के जरिए साधन—सामग्री पर चुकाए गए जीएसटी का लाभ हथियाने के मामलों में अब तक 25 गिरफ्तारियां की जा चुकी है। इन मामलों में 3,969.65 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े सामने आए हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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