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सरकार ने विशिष्ट इस्पात उत्पादों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी

By भाषा | Updated: July 22, 2021 22:31 IST

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नयी दिल्ली, 22 जुलाई सरकार ने बृहस्पतिवार को देश में विशेष प्रकार के इस्पात के उत्पादन को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नये अवसर सृजित करने के लिये 6,322 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी।

सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय का निर्णय किया गया।

उन्होंने कहा कि पीएलआई योजना के तहत 6,322 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पांच साल की अवधि के दौरान दिया जाएगा और इससे 5.25 लाख रोजगार सृजित होंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा तथा आयात में कमी आएगी।’’

ठाकुर ने इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि जहां तक प्रोत्साहन का सवाल है, यह 200 करोड़ रुपये तक सीमित होगा। यानी किसी एक कंपनी या एक समूह को साल में 200 करोड़ रुपये से अधिक का प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएलआई योजना के निर्णय के बारे में ट्विटर पर लिखा, ‘‘मंत्रिमंडल के इस महत्वपूण फैसले से इस्पात क्षेत्र को गति मिलेगी।’’

इस्पात मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस योजना से करीब 40,000 करोड़ रुपये का निवेश होने और विशेष इस्पात के लिए 2.5 करोड़ टन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

योजना की अवधि पांच साल के लिये 2023-24 से 2027-28 होगी।

मंत्रालय के अनुसार यह उम्मीद है कि 2026-27 तक विशेष स्टील का उत्पादन 4.2 करोड़ टन होगा। इससे देश में 2.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के विशेषीकृत इस्पात का उत्पादन और खपत सुनिश्चित होगा। ऐसा नहीं होने पर इसका आयात किया जाता।

इसी प्रकार, विशेष स्टील का निर्यात करीब 55 लाख टन होगा जो फिलहाल 17 लाख टन है।

पीएलआई योजना के तहत कोटेड/प्लेटेड इस्पात उत्पाद, उच्च क्षमता वाले स्टील, विशेष प्रकार के रेल, अलॉय स्टील उत्पाद और स्टील वॉयर और इलेक्ट्रिकल स्टील आएंगे।

इन इस्पात उत्पादों को उपयोग रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रिक उत्पादों, वाहनों और उसके कल-पुर्जों, तेल एवं गैस परिवहन के लिये पाइप, बॉयलर, रक्षा क्षेत्र में काम आने वाले बैलिस्टिक और आर्मर शीट, हाई-स्पीड रेलवे लाइन, टरबाइन उपकरणों, बिजली ट्रांसफार्मर और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये इलेक्ट्रिकल स्टील में किया जाता है।

मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में मूल्य वर्धित स्टील उत्पाद भारत में बड़े पैमाने पर आयात किए जाते हैं।

इससे स्टील उद्योग को उच्च लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचा लागत, उच्च बिजली और पूंजी लागत तथा कर एवं शुल्कों की वजह से 80 से 100 डॉलर प्रति टन का खामियाजा उठाना पड़ता है।

पीएलआई योजना का मकसद देश में विशिष्ट इस्पात के उत्पादन को बढ़ावा देकर इन चुनौतियों का समाधान करना है।

योजना के तहत पात्र विनिर्माताओं को बढ़े हुए उत्पादन पर 4 से 12 प्रतिशत के बीच प्रोत्साहन दिया जाएगा।

बयान के अनुसार भारत में चिन्हित विशेष इस्पात ग्रेड के निर्माण में लगी पंजीकृत कोई भी कंपनी योजना में भाग लेने के लिए पात्र होगी।

मंत्रालय ने कहा कि विशेष इस्पात के लिए पीएलआई योजना के तहत कंपनियों को यह सुनिश्चित करना है कि विशेष स्टील बनाने में प्रयुक्त इस्पात को देश के भीतर ‘पिघलाया और ढाला’ जाए। इसका मतलब है कि विशेष इस्पात का विनिर्माण करने के लिए प्रयुक्त कच्चा माल भारत में ही बनाया जाएगा। यानी पूर्ण रूप से उत्पाद का विनिर्माण देश में सुनिश्चित हो सकेगा।

सरकार के इस निर्णय पर इंडियन स्टील एसोसिएशन (आईएसए) ने कहा कि उद्योग मंत्रिमंडल के विशेष स्टील के लिये पीएलआई योजना को मंजूरी देने के निर्णय की सराहना करता है। इस चुनौतीपूर्ण समय में इस्पात उद्योग ने मजबूती दिखायी है। यह निर्णय न केवल इस्पात क्षेत्र के लिए, बल्कि समग्र बुनियादी ढांचे के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।’’

आईएसए के अध्यक्ष और सीईओ दिलीप ओमेन ने कहा, ‘‘यह घरेलू उद्योग को वैश्विक स्तर पर अन्य कंपनियों के समरूप बनाएगा...हमें विश्वास है कि यह कदम वास्तव में भारत के सामाजिक आर्थिक विकास को और गति प्रदान करेगा।

उद्योग मंडल सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘‘विशिष्ट इस्पात के लिये पीएलआई योजना की घोषण आत्मानिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है। यह एक ऐसे क्षेत्र के लिए एक और दूरदर्शी पहल है जहां भारत के पास वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त है। इससे इस्पात क्षेत्र में पूरी मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।’’

फिक्की के अध्यक्ष उदय शंकर ने कहा, ‘‘फिक्की विशेष इस्पात क्षेत्र के लिये पीएलआई योजना का स्वागत करता है। यह कदम देश में विशेष इस्पात के विकास का समर्थन देगा, मूल्य श्रृंखला और व्यापार प्रवाह को मजबूत करेगा और तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करेगा...।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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