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खुशखबरीः विमान ईंधन और नेचुरल गैस हो सकती है GST में शामिल, हवाई किराए में आएगी भारी गिरावट

By भारती द्विवेदी | Updated: August 22, 2018 13:49 IST

साल 2017 में जब जीएसटी को लागू किया गया था, तब पांच उत्पाद- कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल, विमान ईंधन और प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया था। जेट एयरवेज की वित्तीय हालत खराब होने के बाद एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग उठी है।

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नई दिल्ली, 22 अगस्त: इस बार होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक आपके लिए खुशखबरी लेकर आ सकता है। 30 सितंबर को गोवा में जीएसटी काउंसिल की बैठक होनी है। खबरों के अनुसार, इस बैठक में कई मुद्दों पर बात होनी है लेकिन एटीएफ (विमान ईधन) और नैचुरल गैस मुख्य मुद्दा हो सकता है। जीएसटी काउंसिल की बैठक में एयरलाइंस पर बढ़ते आर्थिक नुकसान के कारण एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा जाएगा।दरअसल, एविशन मंत्रालय ने बढ़ती इनपुट कॉस्ट का हवाला देते हुए वित्त मंत्रालय से एटीएफ को GST में जल्द लाने की गुजारिश की है। अगर एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो हवाई किराया सस्ता हो जाएगा। बता दें कि साल 2017 में जब जीएसटी को लागू किया गया था, तब पांच उत्पाद- कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल, विमान ईंधन और प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया था। जेट एयरवेज की वित्तीय हालत खराब होने के बाद एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग उठी है।

लेकिन अब एयरलाइंस पर बढ़ते दबाव को देखते हुए वित्त मंत्रालय एटीएफ को भी जीएसटी के दायरे में लाने के पक्ष में है। ऐसा माना जा रहा है कि इस मुद्दे केंद्र को पर राज्यों को मनाना आसान होगा क्योंकि ज्यादा एयरपोर्ट वाले राज्यों की संख्या कम है। असम, ओडिशा जैसे राज्य पहले ही विमान ईधन को जीसएटी के पक्ष में लाने पर अपना समर्थन दे चुके हैं। फिलहाल केंद्र सरकार एटीएफ को जीएसटी में शमिल करने के बाद राजस्व में आने वाले असर की समीक्षा कर रही है। बता दें कि एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट का 40 फीसदी हिस्सा एटीएफ में चला जाता है। अभी एटीएफ पर करीब 40 फीसदी टैक्स लगता है। अगर इसे जीएसटी दायरे में लाया जाता है तो इस पर टैक्स कम होगा और एयरलाइंस की वित्तीय हालत में सुधार होने की संभावना है। हालांकि एटीएफ को जीएसटी में शामिल करने की सबसे बड़ी दिक्कत उसके टैक्स स्लैब की वजह से होगी। वर्तमान में केंद्र एटीएफ पर 14 प्रतिशत का उत्पाद शुल्क लगाती है। इसके अलावा राज्यों को 30 प्रतिशत तक बिक्री कर या वैट देना होता है। 

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