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आर्थिक अपराध शाखा ने एनएसईएल मामले में प्रमुख जिंस ब्रोकरेज कंपनियों के निदेशकों को समन भेजा

By भाषा | Updated: June 18, 2021 20:30 IST

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नयी दिल्ली, 18 जून मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एनएसईएल मामले में अपनी जांच आगे बढ़ाते हुए करीब 100 जिंस ब्रोकरेज कंपनियों के निदेशकों को समन भेजा है। इसमें कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं। इन पर आरोप है कि ये अपने कारोबारी ग्राहकों के साथ बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और संदिग्ध धोखाधड़ी में शामिल थे।

अधिकारियों ने कहा कि ब्रोकरेज कंपनियों निदेशकों को नोटिस साल की शुरूआत से दिये जा रहे हैं और यह प्रक्रिया इस महीने तक जारी रहेगी। इन कंपनियों पर इस मामले में 4,200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया अनुमानित है।

नोटिस में उनसे व्यक्तिगत रूप से आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के समक्ष उपस्थित होकर अपने सभी ग्राहकों के व्यापार में संशोधन से जुड़े विवरण, ब्रोकर और ग्राहकों के लेजर खातों, ग्राहक निपटान खातों के विवरण, बैंक ब्योरा, ब्रोकरेज से अर्जित कमाई, ग्राहकों के पैन तथा केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) एवं अन्य संबंधित जानकारी के साथ अपना बयान देने को कहा गया है।

हालांकि, ब्रोकरों ने अपनी तरफ से कोई भी गलत कार्य करने से इनकार किया है और गड़बड़ी के लिये एक्सचेंज में एनएसईएल (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज लि.) भुगतान संकट और उसके पूर्व प्रवर्तकों को जिम्मेदार ठहराया है।

लंबे समय से चल रही ईओडब्ल्यू की जांच के घेरे में एनएसईएल, उसके निदेशक एफटीआईएल (अब 63 मून्स टेक्नोलॉजीज), उसके निदेशक, कर्ज लेने वाले, ब्रोकर और अन्य शामिल हैं। इन पर रची गयी आपराधिक साजिश को अंजाम देने के लिये जालसाजी और आपराधिक विश्वास हनन का आरोप है।

जिन लोगों को समन भेजे गये हैं, उनमें मोतीलाल ओसवाल कमोडिटीज ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड, आनंद राठी कमोडिटीज, सिस्टेमैटिक्स कमोडिटीज, वे2वेल्थ कमोडिटीज, इंडिया इंफोलाइन कमोडिटीज और प्रोग्रेसिव कॉमट्रेड के निदेशक शामिल हैं।

ईओडब्ल्यू के पास उपलब्ध विवरण के अनुसार जिन ब्रोकरेज कंपनियों से अधिकतम राशि ली जानी हैं, उनमें आनंद राठी कमोडिटीज, इंडिया इंफोलाइन कमोडिटीज, जियोजित कॉमट्रेड, सिस्टेमैटिक्स कमोडिटीज और मोतीलाल ओसवाल कमोडिटीज ब्रोकर्स शामिल हैं।

इसके अलावा फिलिप कमोडिटीज इंडिया, एमके कॉमट्रेड, जेएम फाइनेंशियल कॉमट्रेड, वेंचुरा कमोडिटीज, अरिहंत फ्यूचर्स एंड कमोडिटीज, एसपीएफएल कमोडिटीज, आरआर कमोडिटी ब्रोकर्स, निर्मल बैंक कमोडिटीज, इंडिया निवेश कमोडिटीज और सुरेश राठी कमोडिटीज शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार कुल 100 ब्रोकरेज कंपनियों से 4,205 करोड़ रुपये वसूले जाने हैं।

बाजार नियामक सेबी ने 2019 में एनएसईएल मामले में इनमें से कुछ ब्रोकरों के खिलाफ आदेश पारित करते हुए उन्हें कमोडिटी ब्रोकर के रूप में अनुपयुक्त करार दिया। ईओडब्ल्यू की एक रिपोर्ट और ब्रोकरों के खिलाफ एनएसईएल की शिकायतों के बाद यह आदेश आया था।

हालांकि, बाद में उन ब्रोकरों ने कहा कि आदेश का उनके कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वे अपनी मूल फर्मों द्वारा प्राप्त ट्रेडिंग लाइसेंस के तहत काम करना जारी रख सकते हैं।

ब्रोकरों ने सेबी के आदेश को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) में चुनौती दी। एनएसईएल ने भी मामले में स्वयं को प्रभावित पक्ष बताते हुए सैट में अर्जी लगायी। उसने यह भी आरोप लगाया कि नियामक ने ब्रोकरों के खिलाफ उसके सभी आरोपों पर गौर नहीं किया।

हालांकि न्यायाधिकरण ने एनएसईएल की याचिका खारिज कर दी। उसके बाद शेयर बाजार उच्चतम न्यायालय में चला गया। न्यायालय ने सैट से एनएसईएल को मामले में अपना पक्ष रखने की अनुमति देने को कहा।

एनएसईएल संकट 2013 में सामने आया। पर ब्रोकर किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से तब तक बचते रहे जब तक कि 2015 में ईओडब्ल्यू की फोरेंसिक रिपोर्ट में ग्राहकों के साथ विभिन्न अनियमितताओं और संदिग्ध जालसाजी में उनके शामिल होने की बात सामने नहीं आयी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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