कांग्रेस ने मंडी शुल्क बढ़ाने के हरियाणा सरकार के कदम को 'किसान विरोधी' बताया

By भाषा | Updated: June 25, 2021 22:42 IST2021-06-25T22:42:52+5:302021-06-25T22:42:52+5:30

Congress termed Haryana government's move to increase mandi fee as 'anti-farmer' | कांग्रेस ने मंडी शुल्क बढ़ाने के हरियाणा सरकार के कदम को 'किसान विरोधी' बताया

कांग्रेस ने मंडी शुल्क बढ़ाने के हरियाणा सरकार के कदम को 'किसान विरोधी' बताया

चंडीगढ़, 25 जून कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को धान की सभी किस्मों पर लगाए जाने वाले मंडी शुल्क को बढ़ाने के हरियाणा सरकार के कदम की आलोचना की।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मांग की कि मंडी शुल्क बढ़ाने के फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।

हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने 22 जून को कृषि उत्पादों - पीआर किस्म सहित धान की सभी किस्मों - बासमती 1509 (धान की किस्म), डीबी और सरबती ​​धान, पर मंडी शुल्क की वसूली की मात्रा को मूल्यानुसार 0.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया था।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘मंडी शुल्क बढ़ाने का सरकार का फैसला और धान पर एचआरडीएफ (ग्रामीण विकास कोष उपकर) बढ़ाने का उसका प्रस्ताव किसान विरोधी है।’’

उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद हरियाणा के किसान या तो पड़ोसी राज्यों की कृषि मंडियों में अपनी फसल बेचने को मजबूर होंगे या फिर उन्हें व्यापारियों को कम से कम 100-150 रुपये प्रति क्विंटल सस्ते दामों पर धान बेचना होगा।

कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने आगे कहा कि पिछले साल हरियाणा में 42.5 लाख टन बासमती एवं 1509 धान तथा 56 लाख टन परमल चावल की खरीद की गई थी।

उन्होंने कहा कि शुल्क बढ़ाने के फैसले से न केवल किसानों पर, बल्कि आढ़तियों (कमीशन एजेंटों), अनाज मंडियों में काम करने वाले मजदूरों और चावल मिल मालिकों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

सुरजेवाला ने कहा कि अगर हरियाणा के किसान अपनी फसल बेचने के लिए दूसरे राज्यों की मंडियों में जाते हैं, तो उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि राज्य सरकार को भी कर जमा नहीं होने की वजह से कम राजस्व प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि यमुनानगर, कैथल, अंबाला, जींद, सिरसा, फतेहाबाद, पानीपत, करनाल, सोनीपत जिलों सहित राज्य के बड़े हिस्सों में धान की फसल बहुतायत में उगाई जाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ, सरकार का कहना है कि अनाज मंडियों को खत्म नहीं किया जा रहा है, लेकिन हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) के घाटे को कम करने के नाम पर राज्य सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णय स्पष्ट रूप से मंडियों को खत्म करने तथा कृषि व्यवसाय को बड़े निजी कंपनियों के हवाले करने के सरकार के गलत मंशा का संकेत देते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मंडी शुल्क बढ़ने के कारण हरियाणा का धान हरियाणा की मंडियों के बाहर बेचा जाएगा, जिसका सीधा प्रभाव राज्य की मंडियों पर पड़ेगा और वे बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे। सरकार के निर्णय से यह भी स्पष्ट हो गया है कि उसका इरादा है व्यापारियों और किसानों दोनों को खत्म करो।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Web Title: Congress termed Haryana government's move to increase mandi fee as 'anti-farmer'

कारोबार से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे