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ग्रेटर नोएडा में ‘मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक’, परिवहन का बड़ा केंद्र बनाने को मंजूरी,

By भाषा | Updated: December 30, 2020 20:32 IST

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नयी दिल्ली, 30 दिसंबर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 3,883.80 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ‘मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक’ और परिवहन केंद्र (एमएमटीएच) बनाने को मंजूरी दे दी। इससे क्षेत्र में विकास तेज होगा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने इसके साथ ही आंध्र प्रदेश में कृष्णापत्तनम औद्योगिक क्षेत्र और कर्नाटक के तुमकुर में क्रमश: 2,139.44 करोड़ रुपये और 1,701.81 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रस्तावों को स्वीकृति दी।

आधिकारिक बयान के अनुसार ‘मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक’ केंद्र परियोजना को एक विश्व स्तरीय सुविधा के रूप में विकसित किया जाएगा। जहां पर्याप्त भंडारण तथा अलग से बने मालगाड़ियों के गलियारों (डीएफसी) के जरिये सामान की ढुलाई की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही माल ढुलाई कंपनियों और ग्राहकों को एक ही जगह सभी सुविधाओं की पेशकश की जाएगी।

इस केन्द्र पर न सिर्फ मानक कंटेनर रखरखाव सुविधाएं उपलब्ध होंगी, बल्कि परिचालन की बेहतर दक्षता के साथ ‘लॉजिस्टिक’ लागत में कमी लाने के लिए विभिन्न मूल्य वर्धित सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट केंद्र परियोजना पहले से ही भारतीय रेल के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित है। यह परियोजना निर्बाध रूप से यात्रियों की रेल, सड़क मार्ग के जरिये सुगम पहुंच के साथ एक परिवहन केंद्र के रूप में काम करेगी।

इसमें अंतर राज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी), स्थानीय बस टर्मिनल (एलबीटी), मेट्रो, वाणिज्यिक, खुदरा और होटल तथा खुले हरियाली युक्त स्थलों के लिए स्थान उपलब्ध होगा।

बयान के अनुसार यह परियोजना उत्तर प्रदेश में भविष्य में होने वाले विकास, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के उप क्षेत्रों में बढ़ती आबादी की जरूरतों के लिये वैश्विक स्तर की परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। इससे दिल्ली में भीड़भाड़ कम होगी।

इन दोनों परियोजनाओं से 2040 तक 1,00,000 लोगों के लिए रोजगार पैदा होने का अनुमान है और आसपास के इलाकों में विकास के अवसरों पर इसका सकारात्मक असर होगा।

बयान में कहा गया है कि बंदरगाहों, हवाईअड्डों आदि से सटे मालगाड़ियों के लिये अलग से पूर्वी और पश्चिमी गलियारा, एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों जैसे बड़े परिवहन गलियारों के आधार के रूप में परिकल्पित औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योगों को गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय, टिकाऊ और उत्कृष्ट अवसंरचना उपलब्ध कराकर देश में विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना और आधुनिक सुविधाओं से युक्त नये औद्योगिक शहरों का निर्माण करना है।

विनिर्माण में निवेश को आकर्षित करने और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एक मजबूत इकाई के रूप में स्थापित करने के लिए इन शहरों में विकसित भूखंड तत्काल आवंटन के लिए उपलब्ध हेंगे।

मल्टी मॉडल संपर्क ढांचागत सुविधाओं के आधार के रूप में इन परियोजनाओं की कल्पना की गई है।

बयान में कहा गया है कि चेन्नई बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा (सीबीआईसी) के अंतर्गत आंध्र प्रदेश में कृष्णापत्तनम औद्योगिक क्षेत्र और कर्नाटक में तुमकुर औद्योगिक क्षेत्र को स्वीकृति दे दी गई है। इसका मकसद चेन्नई बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा परियोजना में विकास को आगे बढ़ाना है।

ये नये औद्योगिक शहर विश्वसनीय बिजली और गुणवत्तापूर्ण युक्त सामाजिक बुनियादी ढांचे के साथ बंदरगाहों और लॉजिस्टिक केंद्र से और वहां तक माल ढुलाई के लिए विश्व स्तरीय अवसंरचना, सड़क और रेल संपर्क के साथ पूरी तरह आत्मनिर्भर होंगे।

इन परियोजनाओं से औद्योगीकरण के माध्यम से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कृष्णापत्तनम औद्योगिक क्षेत्र में परियोजनाओं के पहले चरण का विकास पूरा होने पर 98,000 लोगों के लिए रोजगार पैदा होने का अनुमान है जिसमें से 58,000 को स्थल पर ही रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं तुमकुर औद्योगिक क्षेत्र में विकास कार्यों से लगभग 88,500 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। इसमें से 17,700 लोग खुदरा, कार्यालय और अन्य वाणिज्यिक अवसरों जैसे सेवा क्षेत्र के उद्योगों से होंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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