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मांग टूटने से बीते सप्ताह लगभग सभी तेल-तिलहनों में गिरावट

By भाषा | Updated: June 20, 2021 11:49 IST

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नयी दिल्ली, 20 जून सरसों में किसी अन्य खाद्य तेल की मिलावट करने पर लगी रोक के बाद मांग टूटने से विदेशों में सोयाबीन डीगम, चावल भूसी तेल, सीपीओ जैसे तेलों की मांग प्रभावित हुई और दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सीपीओ तेल और सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतें हानि के साथ बंद हुईं। वहीं मिलावट से मुक्त होने की वजह से मांग बढ़ने के बीच सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन तथा बिनौला तेल लाभ दर्शाते बंद हुए।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि देश के खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने आठ जून से सरसों में मिलावट पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही देश में विभिन्न स्थानों पर मिलावट की जांच करने के लिए एफएसएसएआई तेलों के नमूने भी एकत्र कर रहा है। इस रोक के बाद मिलावट के लिए विदेशों से भारी मात्रा में आयात होने वाले सोयाबीन डीगम के साथ-साथ सीपीओ की मांग प्रभावित हुई। आयात शुल्क मूल्य में कमी किये जाने से भी सीपीओ के भाव टूट गये। सोयाबीन डीगम के मामले में 100 रुपये क्विन्टल की और सीपीओ के मामले में 220 रुपये क्विन्टल की आयात शुल्क मूल्य में कमी की गई थी।

सूत्रों ने कहा कि सरसों में मिलावट पर रोक के बाद उपभोक्ताओं के बीच सरसों की मांग है। इसके अलावा देशभर की मंडियों में सरसों की जो दैनिक आवक लगभग छह लाख बोरी की थी, वह घटकर एक लाख 70 हजार बोरी रह गई। किसानों को सस्ते दाम पर अपनी फसल बेचने से कतराते देखा गया। मांग बढ़ने के बीच आवक कम होने से बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहनों के भाव लाभ दर्शाते बंद हुए।

आगरा, सलोनी और कोटा मंडी में सरसों के भाव पिछले सप्ताह 7,250 रुपये से बढ़कर 7,400 रुपये प्रति क्विन्टल पर पहुंच गए।

यही हाल मूंगफली का भी था जिसकी घरेलू के साथ-साथ निर्यात मांग होने से मूंगफली तेल-तिलहन के भाव भी समीक्षाधीन सप्ताह में लाभ दर्शाते बंद हुए।

उन्होंने कहा कि सरसों, मूंगफली और तिल तेल का कोई विकल्प नहीं है। सरसों में मिलावट पर रोक के बाद उपभोक्ताओं को शुद्ध सरसों तेल खाने को मिल रहा है। पहले आमतौर पर 15 प्रतिशत सरसों तेल में 85 प्रतिशत के लगभग सोयाबीन डीगम या चावल भूसी तेल जैसे अपेक्षाकृत सस्ते तेलों की मिलावट होती थी लेकिन मिलावट पर रोक होने से सरसों किसानों का उत्साह बढ़ा है जिन्हें पिछले दिनों अपनी उपज के लिए अच्छे दाम मिले हैं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि आगे सरसों के उत्पादन में भारी वृद्धि हो सकती है।

सूत्रों ने कहा कि मौजूदा पहल से देश तिलहन उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने की ओर बढ़ेगा और इससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं की मनमानी रुकेगी और देश के विदेशी मुद्रा खर्च में भारी कमी आयेगी और बंद पड़ी मिलों के चल निकलने से बड़ी संख्या में रोजगार बढ़ेंगे।

बीते सप्ताह, सरसों दाना का भाव 25 रुपये का सुधार दर्शाता 7,125-7,175 रुपये प्रति क्विन्टल हो गया जो पिछले सप्ताहांत 7,100-7,150 रुपये प्रति क्विंटल था। सरसों दादरी तेल का भाव भी 100 रुपये सुधरकर 14,100 रुपये प्रति क्विन्टल हो गया। सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी टिनों के भाव भी समीक्षाधीन सप्ताहांत में 20-20 रुपये का सुधार दर्शाते क्रमश: 2,275-2,325 रुपये और 2,375-2,475 रुपये प्रति टिन पर बंद हुए।

सोयाबीन डीगम की मांग में भारी गिरावट आने के बीच अन्य सोयाबीन तेल-तिलहनों के भाव भी दबाव में आ गये जिससे उनमें गिरावट देखने को मिली। सोयाबीन दाना और लूज के भाव क्रमश: 50-50 रुपये की हानि दर्शाते क्रमश: 7,150-7,200 रुपये और 7,100-7,150 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए। समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम के भाव भी क्रमश: 350 रुपये, 200 रुपये और 350 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 13,650 रुपये, 13,550 रुपये और 11,150 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुए।

घरेलू और निर्यात मांग के बीच समीक्षाधीन सप्ताहांत में मूंगफली दाना 75 रुपये के सुधार के साथ 5,745-5,890 रुपये, मूंगफली गुजरात 200 रुपये सुधरकर 14,200 रुपये क्विन्टल तथा मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव 35 रुपये के लाभ के साथ 2,180-2,310 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

मांग कमजोर रहने के बाद समीक्षाधीन सप्ताहांत में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 450 रुपये घटकर 10,350 रुपये प्रति क्विन्टल रह गया। पामोलीन दिल्ली का भाव भी समीक्षाधीन सप्ताहांत में 200 रुपये की हानि दर्शाता 12,100 रुपये प्रति क्विन्टल पर बंद हुआ। पामोलीन कांडला तेल का भाव भी 150 रुपये के नुकसान के साथ समीक्षाधीन सप्ताहांत में 11,150 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

मांग होने के बीच समीक्षाधीन सप्ताहांत में बिनौला मिल डिलिवरी हरियाणा तेल का भाव 300 रुपये के लाभ के साथ 13,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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