Asha Bhosle Died: अलविदा 'आशा' जी, 92 वर्ष की आयु में आशा भोसले का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर
By अंजली चौहान | Updated: April 12, 2026 13:36 IST2026-04-12T13:20:52+5:302026-04-12T13:36:33+5:30
Asha Bhosle Died: दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में हृदयाघात और फेफड़ों की समस्याओं के कारण निधन हो गया।

Asha Bhosle Died: अलविदा 'आशा' जी, 92 वर्ष की आयु में आशा भोसले का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर
Asha Bhosle Died: संगीत जगत की सबसे मशहूर गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। 92 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने इस महान गायिका के निधन की पुष्टि की। डॉ. समदानी ने कहा, "आशा भोसले ने आज ब्रीच कैंडी अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। उनका निधन कई अंगों के काम करना बंद कर देने (मल्टी-ऑर्गन फेलियर) के कारण हुआ।"
Legendary singer Asha Bhosle passes away
— ANI Digital (@ani_digital) April 12, 2026
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उन्हें शनिवार शाम को बहुत ज्यादा थकान और सीने में संक्रमण के चलते ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दिग्गज गायिका की पोती, जनाई भोसले ने इससे पहले सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर उनके अस्पताल में भर्ती होने की पुष्टि की थी और परिवार के लिए प्राइवेसी बनाए रखने का अनुरोध किया था।
उन्होंने कहा था, "मेरी दादी, आशा भोसले को बहुत ज़्यादा थकान और सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है... उनका इलाज चल रहा है और उम्मीद है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा।"
आशा भोसले के बारे में
1933 में जन्मी आशा भोसले ने बहुत कम उम्र में ही अपने संगीत के सफर की शुरुआत कर दी थी। 1950 के दशक में उन्हें खूब शोहरत मिली और आखिरकार वह दुनिया की सबसे मशहूर पार्श्व गायिकाओं में से एक बन गईं। उनकी आवाज—जो चंचल, भावुक और हर तरह के अंदाज में ढल जाने वाली थी—ने पूरे भारत और उससे बाहर भी संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया।
अपने असाधारण करियर के दौरान, भोसले ने कई भारतीय भाषाओं में हज़ारों गाने रिकॉर्ड किए। उन्होंने शास्त्रीय संगीत और गजलों से लेकर कैबरे, पॉप और लोक संगीत तक, संगीत की कई अलग-अलग शैलियों में अपनी आवाज दी। जाने-माने संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं के साथ उनके सहयोग से हिंदी सिनेमा के कुछ सबसे यादगार गाने बने, जिससे वह एक सदाबहार सांस्कृतिक हस्ती बन गईं।
उनकी उपलब्धियों को कई सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण—भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान—शामिल हैं। 2011 में, उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा संगीत के इतिहास में सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी गई। अपने जीवन के आखिरी सालों में भी, भोसले संगीत से जुड़ी रहीं; वह कभी-कभी मंच पर प्रस्तुति देती थीं और कलाकारों की नई पीढ़ियों को प्रेरित करती थीं। उनका प्रभाव सिर्फ़ पार्श्व गायन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारतीय संगीत में नए चलन स्थापित किए और महिला गायिकाओं की भूमिका को एक नई पहचान दी।
आशा भोसले की बहुमुखी प्रतिभा की मिसालें दी जाती हैं—उन्होंने 'दिल चीज क्या है' जैसी रूहानी ग़ज़लों से लेकर 'पिया तू अब तो आजा' जैसे जोशीले गानों तक, हर तरह के गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी महारत 'मेरा कुछ सामान' की दिल को छू लेने वाली धुन और 'चुरा लिया है तुमने' की चंचल धुन में साफ झलकती है। लोक-संगीत से प्रेरित धुनों से लेकर पॉप तक, उनकी आवाज़ भारत के संगीत की एक बेमिसाल रंगीन दुनिया बनी हुई है। उनके निधन की ख़बर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है; प्रशंसक, कलाकार और जानी-मानी हस्तियाँ अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कर रहे हैं और भारतीय संगीत में उनके बेजोड़ योगदान को याद कर रहे हैं।