भारत में आज भी शिक्षा के मामले में लड़कियां लड़कों से पिछड़ी हुई हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत का उद्देश्य समाज में बेटी को बेटे के बराबर महत्व देने के लिए किया गया था। लेकिन समाज की सोच में बदलाव आने में अभी और समय लग सकता है। गांव कस्बो में आज भी लड़कियों को पढ़ाना व्यर्थ समझा जाता है। हालांकि, कुछ माता-पिता ऐसे भी हैं जो बेटा-बेटी का भेदभाव किए बिना दोनों को बराबरी से शिक्षा का अवसर प्रदान करते हैं।
हाल ही में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के प्राथमिक शिक्षक रणजीत सिंह डिसले को ग्लोबल टीचर अवॉर्ड 2020 मिला है। इस अवॉर्ड के तहत उन्हें 10 लाख अमेरीकी डालर प्रदान किया गया है। ग्लोबल टीचर अवॉर्ड के आफिशियल ट्विटर हैंडल ने इस खबर की घोषणा दो दिन पहले ही की थी। इस घोषणा के साथ उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया था। जब रणजीत को पता चला कि उन्होंने इस अवॉर्ड को जीत लिया है, तो उनकी आंखों से आंसू नहीं थम पाए।
रणजीत को यह पुरस्कार लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और क्यूआर कोड के माध्यम से पाठ्यपुस्तक को ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स तक पहुंचाने के उनके प्रयास के लिए दिया गया है। रणजीत के इस काम को देख बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर भी उनके मुरीद हो गए। अनुपम खेर ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा- “यह अभूतपूर्व है। सोलापुर के रणजीत सिंह डिसले को ग्लोबल टीचर प्राइज 2020 मिला है। ब्रावो। बधाई और जय हो।