दुनिया एक बड़े बदलाव से गुजर रही?, वैश्विक संगठनों की अनदेखी करते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 31, 2026 05:54 IST2026-01-31T05:54:20+5:302026-01-31T05:54:20+5:30
गाजा के नवनिर्माण के लिए अमेरिकी नेतृत्व में एक शांति बोर्ड के गठन का प्रस्ताव इसी का सबूत है. इसे एक व्यावहारिक मानवीय कोशिश के तौर पर पेश किया गया है.

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प्रभु चावला
दुनिया एक बड़े बदलाव से गुजर रही है. वैश्विक चुनौतियों के लिए सामूहिक समाधान के विचार को आपस में टकराते राष्ट्रीय हितों, संस्थानों की थकान और इस सोच से कमजोर किया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं असल दुनिया के नतीजों से कटी हुई हैं. जिस वैश्वीकरण को कभी दुनिया की व्यवस्था का स्वाभाविक विकास माना जाता था, उसे अब लाभ के बजाय रुकावट माना जा रहा है. बदलाव के इस दौर में डोनाल्ड ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल न सिर्फ इस बदलाव के साथ चला है, बल्कि यह इसका प्रतिनिधित्व करता है और इसे तेज भी करता है.
ट्रम्प बहुपक्षवाद पर हो रहे हमले पर सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं दे रहे, वह इस पर हमला कर रहे हैं. उनके विचार में, बहुपक्षीय संस्थाएं युद्धों को रोकने, असमानता कम करने, सीमाओं की रक्षा करने, स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और मानवाधिकारों की रक्षा करने में विफल रही हैं. ट्रम्प का दावा है कि ये संस्थाएं इसलिए नहीं टिकी हैं, क्योंकि ये ठोस परिणाम देती हैं, ये इसलिए टिकी हैं,
क्योंकि ये सेवानिवृत्त राजनेताओं, पेशेवर राजनयिकों और नौकरशाहों को सहारा देती हैं, जो एक संगठन से दूसरे संगठन में लगातार स्थानांतरित होते रहते हैं, ऊंचा वेतन पाते हैं, कर मुक्त आय का आनंद लेते हैं और सम्मेलनों व परामर्शों के लिए दुनियाभर में यात्रा करते हैं. इस व्यवस्था की आलोचना से ट्रम्प की राजनीति को बल मिलता है,
और उनके दूसरे कार्यकाल में यह आलोचना कभी-कभार की टिप्पणियों के बजाय व्यवस्थित रणनीति बन चुकी है. गाजा के नवनिर्माण के लिए अमेरिकी नेतृत्व में एक शांति बोर्ड के गठन का प्रस्ताव इसी का सबूत है. इसे एक व्यावहारिक मानवीय कोशिश के तौर पर पेश किया गया है,
पर असल में यह संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और दशकों से इस क्षेत्र को संभालने वाले सभी मौजूदा संघर्ष समाधान फ्रेमवर्क को जानबूझकर नजरअंदाज करना है. यह संकेत देता है कि वाशिंगटन अब बहुपक्षीय मध्यस्थता को महत्व नहीं देता और अपने सीधे नियंत्रण में अस्थायी इंतजाम पसंद करता है. यह रवैया उन यूएन एजेंसियों की वैधता को भी चुनौती देता है,
जिन्होंने संघर्ष वाले क्षेत्रों में काम किया है. ट्रम्प के इस नजरिये को दूसरे क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन से ट्रम्प का अलग होना इसका उदाहरण है. विश्व स्वास्थ्य संगठन में 8000 से ज्यादा लोग काम करते हैं और यह दो वर्ष के चक्र में लगभग छह-सात अरब डॉलर के बजट पर काम करता है. इस फंडिंग का बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक रूप से अमेरिका से आता रहा है.
ट्रम्प ने इसी निर्भरता का लाभ उठाया और प्रश्न किया कि अमेरिकी करदाताओं को एक ऐसी संस्था को फंड क्यों देना चाहिए, जो अमेरिकी मतदाताओं के प्रति जवाबदेह हुए बिना अमेरिकी नीति पर असर डालने वाले दिशानिर्देश, आलोचना और सलाह जारी करती है. यह संयुक्त राष्ट्र की पूरी प्रणाली के लिए एक चेतावनी है कि आर्थिक निर्भरता राजनीतिक कमजोरी पैदा करती है.