इस युद्धविराम के आखिर मायने क्या हैं...?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 9, 2026 07:36 IST2026-04-09T07:36:19+5:302026-04-09T07:36:23+5:30

एक बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि इस युद्धविराम को लेकर दुनिया में पूरा विश्वास नहीं है.

What is the meaning of this ceasefire | इस युद्धविराम के आखिर मायने क्या हैं...?

इस युद्धविराम के आखिर मायने क्या हैं...?

खबर सुकून की है लेकिन ध्यान रखिए कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग खत्म नहीं हुई है, केवल एक विराम आया है. घोषित तौर पर विराम इसलिए कि दोनों पक्षों में बातचीत हो सके. दोनों किसी समझौते पर पहुंच सकें. मगर दोनों पक्षों में अविश्वास इस कदर भरा हुआ है कि किसी सर्वसम्मत समझौते पर पहुंचना बहुत मुश्किल काम है. दोनों तरफ से मांगें ऐसी रखी गई हैं कि कुछ तो मानी जा सकती हैं लेकिन ईरान की सारी मांगें यदि अमेरिका मान ले तो फिर इतने बड़े झंझट का मतलब ही क्या था? यदि अमेरिका की सारी बातें ईरान मान ले तो फिर इतना संघर्ष करने की जरूरत ही क्या थी?

यानी दोनों तरफ के प्रस्ताव में भारी पेंच है. इसलिए पूरी तरह सुकून से बैठने को लेकर किसी को भरोसा नहीं है. जब युद्धविराम को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुनिया को जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि लेबनान पर जो हमले इजराइल कर रहा है, वह भी बंद हो जाएगा. कुछ घंटों तक तो इजराइल ने चुप्पी साधे रखी लेकिन जल्दी ही स्पष्ट कर दिया कि वह लेबनान पर हमला बंद नहीं करेगा. अब सवाल है कि क्या इजराइल को अमेरिका मनाएगा कि वह हमला न करे या फिर यह पेंच भी अमेरिका का ही है?

कहना मुश्किल है क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प क्या सोचते हैं और क्या करते हैं, यह किसी को पता नहीं होता. वे हर हाल में अपना पलड़ा भारी रखना चाहेंगे. युद्धविराम को उन्होंने अपनी जीत की तरह पेश किया है तो दूसरी ओर ईरान ने भी इस विराम को अपनी जीत के रूप में दर्शाया है. जब जंग स्थायी रूप से रोकने के लिए बातचीत होगी तो दोनों पक्ष अपनी कॉलर ऊंची रखने की हर संभव कोशिश करेंगे. मगर सच्चाई यह भी है कि दोनों को ही ये जंग भारी पड़ रही है. अमेरिका ने सोचा नहीं था कि उसके हमले का इस कदर जवाब मिलेगा.

ट्रम्प भले ही ईरानी सेना की कमर तोड़ने की बात कर रहे हों लेकिन सच्चाई यह है कि जिस तरह से ईरान ने अमेरिकी विमान मार गिराए, उसने यह साबित कर दिया है कि ईरान को जीत पाना अमेरिका के बूते में नहीं है. और यह भी सच है कि ईरान की सत्ता को बदल देने का जो ख्वाब अमेरिका ने देखा था, वह पूरा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है. अमेरिकी हमले ने ईरानियों को एकजुट कर दिया है. इन सारी परिस्थितियों के बीच अब दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि दोनों पक्ष कितना पीछे हटते हैं? निश्चित रूप से ट्रम्प चाहे जो भी कहें लेकिन हकीकत यह है कि ईरान के साथ जंग के लिए उन्हें घरेलू स्तर पर उतना समर्थन नहीं मिल रहा है, जितने समर्थन की उन्होंने उम्मीद की थी.

खासकर ईरान के लिए अपशब्दों का उपयोग करने के बाद तो ट्रम्प के खिलाफ भीषण माहौल बन गया है. ट्रम्प के लिए भी यह आवश्यक हो गया है कि वे इस जंग को किसी तरह समाप्त करें. निश्चित रूप से उन्होंने ही पाकिस्तान को इस मामले में आगे किया होगा ताकि बातचीत का रास्ता अपनाया जा सके. पाकिस्तान उनके हाथों की कठपुतली है और ईरान के साथ अमेरिकी हितों की बातचीत वही कर सकता था.

इसलिए जो लोग यह सोच रहे हैं कि पाकिस्तान को बहुत बड़ा माइलेज मिल गया है, वे एकतरफा नजरिये से विश्लेषण कर रहे हैं. पाकिस्तान ने कोई तीर नहीं मार लिया है. एक बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि इस युद्धविराम को लेकर दुनिया में पूरा विश्वास नहीं है. भारत ने युद्धविराम की घोषणा के तत्काल बाद ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है कि जितनी जल्दी हो सके, वे ईरान छोड़ दें.

यदि विश्वास होता तो क्या ऐसी एडवाइजरी जारी होती? दरअसल एक सोच यह भी है कि यदि ईरान ने अमेरिका की पूरी बात नहीं मानी तो क्या ट्रम्प फिर हमलावर हो सकते हैं? दरअसल यही चिंता दुनिया को परेशान कर रही है. मगर उम्मीद करें कि सब शुभ होगा.

Web Title: What is the meaning of this ceasefire

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