मौजूदा दौर में जो शब्द बार-बार हमारे कानों में पड़ रहे हैं या फिर जिन्हें हम बार-बार पढ़ रहे हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण शब्द है ड्रोन. ये बहुत कुछ कर सकता है. किसी की जान बचा भी सकता है और किसी की जान ले भी सकता है. कहीं निगरानी कर सकता है तो कहीं विध्वंस मचा सकता है. रूस और यूक्रेन के बीच की जंग हो या फिर अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग हो, तबाही मचाने में ड्रोन सबसे आगे है. ये ड्रोन कितनी जानें ले चुका है, इसका ठीक-ठीक आंकड़ा बताना बड़ा मुश्किल है लेकिन भारत के कोयंबटूर के अभयारण्य में हाथियों को बचाने में ड्रोन ने जो भूमिका अदा की है, वह बेमिसाल है.
इस इलाके में पिछले पंद्रह साल में 180 से ज्यादा हाथी ट्रेन से कटकर मर गए. ट्रेनों की रफ्तार कम की गई. वाच टावर लगाए गए लेकिन बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. तब यह सोचा गया कि क्यों न आर्टिफिशियल तकनीक की सहायता ली जाए! इसके लिए खास तरह के ड्रोन तैयार किए गए जिन पर कैमरे और सेंसर लगे हुए हैं.
ये ड्रोन चौबीसों घंटे रेल पटरियों के आसपास के इलाकों की निगरानी करते हैं. जैसे ही यह पता चलता है कि कोई हाथी या हाथियों का झुंड रेल पटरी की ओर आ रहा है तो ड्रोन से तेज सायरन की आवाज आने लगती है और हाथी डर कर वहां से भाग जाता है. इसके अलावा रेल पटरियों के पास थर्मल इमेजिंग कैमरे भी लगाए गए हैं ताकि हाथियों के शरीर की गर्मी से उन्हें रात में भी पहचाना जा सके. इन कैमरों को एक नियंत्रण कक्ष से जोड़ा गया है. पिछले दो वर्षों से हाथियों को बचाने की और भी कई योजनाएं चल रही हैं.
सरकार का आकलन हैै कि जंगली हाथियों की मौत की साढ़े आठ हजार से ज्यादा संभावित दुर्घटनाओं को रोका गया है. मगर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका ड्रोन ने निभाई है. काश! पूरी दुनिया ड्रोन का ऐसा ही इस्तेमाल कर पाती! ड्रोन जान लेने का नहीं बल्कि जान बचाने का माध्यम बनता. मगर क्या करें, जिसकी जैसी सोच होगी वो वैसा ही करेगा. हमारा पड़ोसी पाकिस्तान ड्रोन के माध्यम से हमारे यहां ड्रग्स भेज रहा है. हम उसके ड्रोन मार भी रहे हैं लेकिन वह बाज नहीं आ रहा है. काश! उसे भी समझ में आ जाए कि ड्रोन का कैसा इस्तेमाल करना चाहिए.