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विजय दर्डा का ब्लॉगः शेख हसीना ने तो वाकई कमाल कर दिया है

By विजय दर्डा | Updated: January 7, 2019 19:16 IST

अभी तक सैकड़ों आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है और सैकड़ों जेल में बंद हैं. यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि शेख हसीना की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही नतीजा है कि बांग्लादेश में आतंकवाद पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका है.

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ठळक मुद्देमैं इंटरनेशनल फोरम पर बांग्लादेश के कई संपादकों से चर्चा करता रहा हूं. उनका कहना है कि खालिदा जिया समेत कई प्रधानमंत्रियों पर भ्रष्टाचार चस्पा रहा है.वे सब सारा पैसा बाहर ले जा रहे थे. विकास के नाम पर कुछ नहीं हो रहा था. शेख हसीना से सारे देश को उम्मीद है. मैंने यह सवाल भी पूछा था कि बांग्लादेश एक मुस्लिम राष्ट्र है फिर भी महिलाएं राज करती हैं, इसका कारण क्या है?

पिछले साल संयुक्त राष्ट्र ने जब बांग्लादेश को 2024 में अविकसित देश की श्रेणी से निकाल कर विकासशील देशों की श्रेणी में लाने की बात कही तो पूरी दुनिया में शेख हसीना की चर्चा होने लगी. इसी बीच वहां चुनाव हुए और शेख हसीना की पार्टी भारी बहुमत से चुनाव जीत गई. सत्ता शेख हसीना के पास ही रही. जनवरी 2019 में वे चौथी बार प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं. वे 2009 से लगातार सत्ता में हैं.

उन पर चुनावों में धांधली को लेकर कई आरोप भी लगे हैं. मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने ताजा चुनावों को स्वीकार नहीं किया है लेकिन हकीकत यही है कि शेख हसीना बांग्लादेश की लोकप्रिय नेता हैं. दरअसल उनके पिता शेख मुजीबुर्रहमान की बदौलत ही बांग्लादेश का जन्म हुआ था. पहले वह पाकिस्तान का हिस्सा था. बाद में शेख मुजीबुर्रहमान, उनकी पत्नी और तीन बेटों की सैन्य तख्तापलट के दौरान हत्या कर दी गई थी. शेख हसीना बच गई थीं. शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और ताकतवर नेता के रूप में उभरीं. 1981 से शेख हसीना सत्ताधारी अवामी लीग का नेतृत्व कर रही हैं.

उनकी कोई कितनी भी आलोचना करे, सच्चई यह है कि उन्होंने अपने देश को विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर किया है. जब से वे सत्ता में आई हैं, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था औसतन 6 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रही है. उनके शासनकाल में प्रति व्यक्ति आय में तीन गुना इजाफा हुआ है. फिलहाल यह राशि करीब 1 लाख 21 हजार रुपए है. खाद्य उत्पादन के मामले में करीब-करीब आत्मनिर्भरता आ चुकी है. गरीबी तेजी से कम हो रही है. कपड़ा उद्योग का तेजी से विकास हो रहा है.

कपड़ा बाजार करीब 15 फीसदी की दर से तेजी से आगे बढ़ रहा है. रेडीमेड कपड़ों के बाजार में बांग्लादेश पूरी दुनिया में दूसरे क्रम पर है. चीन पहले स्थान पर बना हुआ है. डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी बांग्लादेश ने लंबी छलांग लगाई है. एक जानकारी के अनुसार दक्षिण एशिया में जिन लोगों के पास बैंक खाते हैं, उनमें से लगभग 28 प्रतिशत लोग डिजिटल लेनदेन करते हैं जबकि बांग्लादेश में यह आंकड़ा 34 फीसदी को पार कर चुका है.

शेख हसीना ने न केवल तरक्की पसंद नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है बल्कि धर्मनिरपेक्षता के क्षेत्र में भी उनकी अलग पहचान है. एक समय था जब बांग्लादेश में कट्टरपंथ तेजी से पैर पसार रहा था. इस्लामिक स्टेट ने पैठ बनाना शुरू कर दिया था. आजाद खयाल लेखकों, कवियों और राजनेताओं की हत्या की जाने लगी थी. 2016 में होली आर्टिजन बेकरी में हमला हुआ था. इसके बाद शेख हसीना ने तय किया कि वे कट्टरपंथियों को सबक सिखाएंगी.

अभी तक सैकड़ों आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है और सैकड़ों जेल में बंद हैं. यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि शेख हसीना की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही नतीजा है कि बांग्लादेश में आतंकवाद पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका है. वहां सभी धर्मों के लोग स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. इसके लिए पूरी दुनिया में उनकी तारीफ हो रही है. आतंकवाद से लड़ने में शेख हसीना ने पूरी दुनिया के साथ हाथ मिलाने का संकल्प दिखाया है.

मैं इंटरनेशनल फोरम पर बांग्लादेश के कई संपादकों से चर्चा करता रहा हूं. उनका कहना है कि खालिदा जिया समेत कई प्रधानमंत्रियों पर भ्रष्टाचार चस्पा रहा है. वे सब सारा पैसा बाहर ले जा रहे थे. विकास के नाम पर कुछ नहीं हो रहा था. शेख हसीना से सारे देश को उम्मीद है. मैंने यह सवाल भी पूछा था कि बांग्लादेश एक मुस्लिम राष्ट्र है फिर भी महिलाएं राज करती हैं, इसका कारण क्या है? संपादकों का  कहना था कि सवाल आदमी और औरत का नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि क्षमता किसमें है? शेख हसीना में ये क्षमता है.

भारत के साथ शेख हसीना का भावनात्मक रिश्ता रहा है. वे भारत समर्थक मानी जाती हैं क्योंकि उनके पिता का भारत ने बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में खुलकर साथ दिया था. वे उस कर्ज को भूली नहीं हैं लेकिन हाल के वर्षो में जिस तरह चीन के कदम तेजी से बांग्लादेश में बढ़े हैं, वह भारत के लिए चिंता का विषय होना ही चाहिए.

पिछले साल जब ढाका स्टॉक एक्सचेंज का 25 फीसदी हिस्सा बिकने के लिए बाजार में उपलब्ध हुआ तो भारत ने कोशिश जरूर की लेकिन सफलता चीन के हाथ लग गई. चीन ने ज्यादा बोली लगाई और 25 फीसदी हिस्सा उसे मिल गया. मेरा मानना है कि भारत को थोड़ी अधिक कीमत देकर भी यह सौदा करना चाहिए था क्योंकि बांग्लादेश हमारा निकट पड़ोसी है और हमारी मौजूदगी हर रूप में वहां होनी चाहिए.

चीन जानबूझकर बांग्लादेश में अपनी पैठ बना रहा है. उसे पता है कि बांग्लादेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं और भारत की भूमिका को वहां से समाप्त कर दिया जाए तो फायदे में चीन ही रहेगा. चीन वहां चार अरब डॉलर का एक पुल बना रहा है और भारी कर्ज देने को भी तैयार है. इसका नतीजा है कि बांग्लादेश धीरे-धीरे ही सही लेकिन चीन की गोद में जरूर जा रहा है.

शेख हसीना को अपने देश के विकास के लिए पैसा चाहिए, यदि भारत नहीं देगा तो चीन दे देगा. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति केवल भावनाओं पर नहीं चलती. हम सिर्फ यह मानकर नहीं चल सकते कि बांग्लादेश को हमने आजाद कराया इसलिए वह हमसे चिपका रहेगा. आज जरूरत इस बात की है कि हम बांग्लादेश की जरूरतों पर ध्यान दें और एक पड़ोसी को अपने से दूर न जाने दें. हम थोड़ी सी कोशिश करें तो सफलता संभव है.

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