आखिर इस तरह का फर्जीवाड़ा लोग करते क्यों हैं?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: March 17, 2026 07:27 IST2026-03-17T07:27:21+5:302026-03-17T07:27:24+5:30

यानी वीडियो बनाने वालों ने जानबूझ कर ऐसा किया और शेयर करने वालों ने यह सुनिश्चित करने की कोई कोशिश नहीं की कि वीडियो असली है या इसे फर्जी तौर पर बनाया गया है

UAE has taken step that will curb fake reels | आखिर इस तरह का फर्जीवाड़ा लोग करते क्यों हैं?

आखिर इस तरह का फर्जीवाड़ा लोग करते क्यों हैं?

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसे फर्जी रील्स बनाने वालों के लिए एक बड़ा सबक कहा जा सकता है. चूंकि वहां का कानून सख्त है इसलिए केवल चेतावनी देकर छोड़ने जैसी स्थिति शायद ही बने. दरअसल हुआ यह है कि कुछ लोगों ने विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो जारी किए या शेयर किए जिनमें सच्चाई नहीं थी. सोशल मीडिया पर इस तरह की चीजें बहुत आम हैं. खासकर भारत में तो फर्जी वीडियोज की भरमार है लेकिन यह मामला संयुक्त अरब अमीरात का है जहां व्यवस्था किसी भी गुनाह को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करती.

हाल के दिनों में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर भी कई ड्रोन बरसाए हैं और ये वीडियो उसी विषय से संबंधित थे. यूएई में रह रहे विभिन्न देशों के 12 नागरिकों ने गिरफ्तार किया है जिन्होंने ऐसे वीडियो शेयर किए जो यूएई के आकाश में ड्रोन हमलों को रोकने के फुटेज थे लेकिन वीडियो बनाने वालों ने उसमें साउंड इफेक्ट डालकर ऐसा नजारा पेश किया जैसे हमला हो रहा हो. यानी वीडियो बनाने वालों ने जानबूझ कर ऐसा किया और शेयर करने वालों ने यह सुनिश्चित करने की कोई कोशिश नहीं की कि वीडियो असली है या इसे फर्जी तौर पर बनाया गया है. ऐसे वीडियो से स्वाभाविक तौर पर इससे अफरा-तफरी फैलनी थी.

इसके अलावा 7 ऐसे लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है जिन्होंने दूसरे देशों की घटनाओं के पुराने फुटेज का इस्तेमाल करके और आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस का उपयोेग करके ऐसे फर्जी वीडियो बनाए जिससे लग रहा था कि यूएई पर भीषण हमले हुए हैं. इन सात लोगों में से भी पांच भारतीय हैं. इसके अलावा पांच ऐसे भारतीयों और एक पाकिस्तानी को भी गिरफ्तार किया गया है जिन्होंने हमलावर देश की तारीफ में पोस्ट किए. इसके अलावा भी कुछ भारतीयों और दूसरे देशों के नागरिकों को सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने के लिए गिरफ्तार किया गया है.

कुल 19 भारतीय अभी तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं. सवाल यह उठता है कि इन लोगों ने ऐसा क्यों किया? यह कहना मुश्किल है कि इस तरह के फर्जी वीडियो तैयार करने या उसे शेयर करने में किसी तरह का षड्यंत्र होगा. ज्यादा आशंका तो इसी बात की है कि सनसनी फैलाकर लाइक्स और व्यूज बटोरने का जो नशा इन दिनों फैला हुआ है, यह उसी का नतीजा है. भारत में हम लगातार इस तरह की वीडियो देखते रहते हैं.

सरकार ने हालांकि अब इस बात का उल्लेख अनिवार्य कर दिया है कि वीडियो यदि एआई से बनाया गया है तो उसका जिक्र वीडियो पर होना चाहिए लेकिन इस प्रावधान का पालन न के बराबर हो रहा है. स्वाभाविक सी बात है कि इस तरह के फर्जी वीडियो अव्यवस्था फैलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

इसलिए यह बहुत जरूरी है कि ऐसे वीडियो के निर्माण, प्रसारण और शेयर करने पर समुचित सजा का प्रावधान होना चाहिए. यूएई के प्रसंग मेंं चूंकि 19 भारतीय नागरिक गिरफ्तार हुए हैं, इसलिए हमारी सहानुभूति उनके साथ हो सकती है लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गुनाह तो गुनाह है. गुनाह करने वालों के साथ कैसे खड़ा हुआ जा सकता है?'

Web Title: UAE has taken step that will curb fake reels

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