प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल की संसद ‘नेसेट’ में अपने ऐतिहासिक संबोधन में बिल्कुल सही कहा है कि ‘इजराइल की तरह भारत भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की एक सुसंगत और अडिग नीति अपनाता है तथा इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं है.’ दरअसल पाकिस्तान सहित कुछ देश अच्छे और बुरे आतंकवाद के नाम पर आतंकवाद के प्रति जिस तरह से दोहरा रवैया अपनाते हैं, परोक्ष रूप से यह उनको करारा जवाब है. हालांकि आतंकवाद को प्रश्रय देने वाले खुद भी उसका शिकार होते हैं और पाकिस्तान इसका ज्वलंत उदाहरण है लेकिन दुर्भाग्य से वे इसे समझ नहीं पाते और आस्तीन में सांप पालना जारी रखते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल की संसद में बोलते हुए कहा कि आतंकवाद का उद्देश्य समाजों को अस्थिर करना, विकास को बाधित करना और विश्वास को कमजोर करना है. आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सतत और समन्वित वैश्विक कार्रवाई आवश्यक है, क्योंकि चाहे आतंकवाद कहीं भी हो, यह शांति के लिए हर जगह खतरा है.
दरअसल आतंकवाद से लड़ने का दिखावा तो कई देश करते हैं लेकिन जहां अपना स्वार्थ सधता हो, उसे अच्छे आतंकवाद का नाम देकर बढ़ावा देते हैं और जहां अपना नुकसान होता हो उसे बुरे आतंकवाद का नाम देते हैं. कुछ देशों के इसी पाखंडपूर्ण रवैये के कारण दुनिया से आतंकवाद खत्म नहीं हो रहा है. चूंकि भारत और इजराइल दोनों ने ही आतंकवाद के जहरीले दंश को झेला है, चाहे वह इजराइल में अक्तूबर अटैक हो या भारत में 26/11 का मुंबई हमला, इसलिए दोनों ही देश एक-दूसरे के दर्द को समझते हैं. इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत और इजराइल मिलकर दुनिया से आतंकवाद को उखाड़ फेंकेंगे.
इसमें कोई शक नहीं कि दुनिया के सारे देश अगर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो जाएं तो आतंकवाद कहीं पनप ही नहीं सकता, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा, इसलिए आतंकवाद के खिलाफ भारत और इजराइल जैसे दो महत्वपूर्ण देशों का सहयोग भी बहुत मायने रखता है. इजराइल के पास आतंकवाद से निपटने और आतंकवादियों की जांच व अभियोजन में अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहायता को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा है और इजराइली सुरक्षा बलों ने संदिग्ध आतंकवादियों व आतंकवादी समूहों के खिलाफ व्यवस्थित कानूनी कार्रवाई की है.
भारत ने भी पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और अब हमारी सेनाएं सीमा पार करके भी आतंकी अड्डों को नेस्तनाबूद करने में हिचकिचाती नहीं हैं. इसलिए निश्चित रूप से दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक-दूसरे के अनुभवों से लाभान्वित होंगे और परस्पर सहयोग से आतंकवाद और आतंकवादियों पर कड़ा प्रहार कर सकेंगे.