पेंगुइन धरती के उन अद्भुत जीवों में शामिल हैं, जो प्रकृति की रचनात्मक बुद्धिमत्ता और संतुलन का जीवंत प्रमाण हैं. पंख होने के बावजूद उड़ नहीं पाने वाला यह पक्षी पानी में जिस फुर्ती, संतुलन और गति से तैरता है, वह उसे पक्षी जगत में विशिष्ट बनाता है. लेकिन आज यही प्यारे और अनोखे पक्षी अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट का सामना कर रहे हैं. जलवायु परिवर्तन ने उनके जीवनचक्र को बुरी तरह प्रभावित किया है. वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण समुद्री बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे पेंगुइन के प्रजनन स्थल अस्थिर हो रहे हैं.
कई प्रजातियां समुद्री बर्फ पर ही अंडे देती हैं और बच्चों का पालन करती हैं. जब बर्फ समय से पहले टूट जाती है या कमजोर हो जाती है तो अंडे और चूजे समुद्र में डूब जाते हैं. हर वर्ष 20 जनवरी को ‘पेंगुइन जागरूकता दिवस’ मनाया जाता है, जो केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है बल्कि यह मानवता को यह याद दिलाने का अवसर है कि पेंगुइन जैसे जीव हमारे ग्रह के स्वास्थ्य के संकेतक हैं.
यदि पेंगुइन संकट में हैं तो यह इस बात का संकेत है कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी असंतुलन की ओर बढ़ रहा है. हाल के वर्षों में अंटार्कटिका के वेडेल सागर क्षेत्र में स्थित हैली बे कॉलोनी में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां लगातार खराब बर्फीली परिस्थितियों के कारण पेंगुइन के पूरे के पूरे प्रजनन सत्र विफल हो गए. समुद्री तापमान बढ़ने से पेंगुइन के भोजन स्रोत भी प्रभावित हो रहे हैं.
क्रिल और छोटी मछलियां, जिन पर पेंगुइन निर्भर रहते हैं, ठंडे पानी में पनपती हैं. जब समुद्र गर्म होता है तो ये जीव अन्य क्षेत्रों की ओर पलायन कर जाते हैं, जिससे पेंगुइन को भोजन की कमी का सामना करना पड़ता है. प्रदूषण पेंगुइनों के लिए एक और गंभीर खतरा बन चुका है. समुद्र में फैलता प्लास्टिक, तेल रिसाव और रासायनिक कचरा उनके जीवन को लगातार जोखिम में डाल रहा है.
पेंगुइन अक्सर प्लास्टिक के टुकड़ों को भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनके पाचन तंत्र में गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं और कई बार उनकी मृत्यु भी हो जाती है. तेल रिसाव की घटनाएं पेंगुइन के पंखों को चिपचिपा बना देती हैं, जिससे उनकी जलरोधी क्षमता समाप्त हो जाती है और वे ठंड से मर सकते हैं.
पर्यटन और मानव हस्तक्षेप ने भी कई पेंगुइन आवासों को असुरक्षित बना दिया है. अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों और नवीनतम वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार पेंगुइन की 18 प्रजातियों में से 11 प्रजातियां आज संकटग्रस्त या विलुप्तप्राय श्रेणी में आ चुकी हैं.