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माइकल हार्ट का प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग और साहित्य का लोकतंत्र

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: February 10, 2026 07:53 IST

लिखे जाने के अगले ही साल 1780 में जब रॉबर्ट केर ने पाठ्यपुस्तक का अनुवाद अंग्रेजी में किया, तो वह सारी दुनिया के रसायनशास्त्रियों के काम को अगले पायदान में ले जाने का कारण बन गई.

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सुनील सोनी

फ्रांसीसी क्रांति के बाद जब रसायनशास्त्री एंतोनियो लैवोसियर का सिर 1794 में गिलोटिन से काटा गया, तो उन पर तंबाकू में पानी मिलाकर बेचने का आरोप था. उससे 15 साल पहले ही वे 1779 में ‘त्रेते एलेमेंतरे डि शेमी’ लिख चुके थे, जिसे आधुनिक रसायनशास्त्र की पहली पाठ्यपुस्तक माना जाता है. फ्रांसीसी कुलीनों का यह वंशज ऑक्सीजन के नामकरण और दहन के सूत्र लिखने के साथ ही पेयजल और हवा को प्रदूषण से बचाने के उपायों पर काम कर रहा था, लेकिन आधुनिक टोल की तरह पेरिस में आनेवालों से कर वसूली ने उन्हें बदनाम कर दिया था.

लूव्र म्यूजियम के नेपोलियन कोर्ट में संस्कृति के नायकों की मूर्तियों के बीच उनकी आकर्षक प्रतिमा ज्यां लियोनार्दो मेलिले की गजब शिल्पकारी की बानगी है. लिखे जाने के अगले ही साल 1780 में जब रॉबर्ट केर ने पाठ्यपुस्तक का अनुवाद अंग्रेजी में किया, तो वह सारी दुनिया के रसायनशास्त्रियों के काम को अगले पायदान में ले जाने का कारण बन गई.

रसायनशास्त्र की यह मूल किताब ‘प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग’ में आसानी से मिल जाएगी, क्योंकि अमेरिकी लेखक-भविष्यवादी माइकल स्टर्न हार्ट ने ज्ञान के भंडार को तब ऑनलाइन पूरी दुनिया के साथ बांटने का बीड़ा उठाया, जब इंटरनेट भी ठीक से मुहैया नहीं था. गणितज्ञ मां और शेक्सपियर विद्वान पिता के पुत्र माइकल को उन दिनों मशहूर हो रही कम्प्यूटरनुमा मशीनों से प्यार हो गया था.

सैन फ्रांसिस्को में अनजाने राहगीरों के सामने सड़क पर संगीत पेश करना भले ही उनका शौक रहा हो, पर इलिनोइस विश्वविद्यालय ने प्रतिभा को तुरंत पहचान लिया और मानव-मशीन इंटरफेस में डिग्री की पढ़ाई के पहले ही साल में कैम्पस के ‘जेरॉक्स सिग्मा वी मेनफ्रेम कम्प्यूटर’ का मुफ्त एकाउंट दे दिया, जो हार्वर्ड, यूएलसीए और पेंटागन समेत 100 प्रभावी संस्थानों व यूजर्स को ‘अरपानेट’ से जोड़ता था.

संभावनाओं के द्वार तब खुले, जब किसी ने उनके थैले में ‘अमेरिकी स्वतंत्रता के घोषणापत्र’ की प्रति डाली और ‘यूरेका मोमेंट’ की तरह उन्होंने उसे टाइप करके डाउनलोड-योग्य दस्तावेज बना दिया. ‘इंटरनेट के पूर्वज’ नेटवर्क पर छह यूजरों ने इसे डाउनलोड किया, जिसने प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग के विचार को जन्म दिया.

20वीं सदी की सबसे चर्चित किताबों को डिजिटल रूप में जनता को मुफ्त में उपलब्ध करने का यह काम इलिनोइस विश्वविद्यालय के बेनेडिक्टन कॉलेज से दो दशक तक चलता रहा, जिसमें हजारों स्वयंसेवक टाइप करके दस्तावेज अपलोड करते थे, क्योंकि इमेज स्कैनिंग और ओसीआर उपकरणों में बहुत बाद में सुधार आया.

कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय ने पैसे लगाए, तो इतालवी स्वयंसेवी पियत्रो डि मिसेली ने प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग की पहली वेबसाइट बना दी. 1994 से 2004 तक चले प्रोजेक्ट ऑनलाइन कैटलॉग के बाद पूरा जिम्मा नाॅर्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय ने आईबिलियो मेजबान बनकर उठा लिया, जिससे बेहतर ऑनलाइन कैटलॉग ने सामग्री को टटोलना, देखना और डाउनलोड करना आसान बना दिया.

फिलहाल प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग के संग्रह में 60 भाषाओं में 76000 से अधिक ई-किताबें हैं, जो उपन्यास, कविता, लघुकथाएं, नाटक, संदर्भ ग्रंथ, पत्रिकाएं, ऑडियो, फिल्म स्क्रिप्ट, संगीत-नोटेशन या पाककला पर किताब तक, कुछ भी हो सकता है. कुछ बच्चों की दिलचस्पी के कारण लुइस कैरोल की ‘एलिस एडवेंचर्स इन वंडरलैंड’ की ई-बुक ने 55 साल पहले की गई इस कल्पना को खाका दिया था कि भविष्य में साहित्य स्क्रीन पर पढ़ा जाएगा और दुनिया का सारा बेहतरीन साहित्य सभी भाषाओं में सभी को मुफ्त उपलब्ध हो, जो बिना किसी विशेष उपकरण के पढ़ा जा सके.

लोकतंत्र के सफर में नया आयाम रचनेवाले माइकल हार्ट 2011 में 64 की उम्र में गुजरे, तो उनके नाम में ई-बुक के आविष्कारक होने के अलावा तमगा यह भी है कि हजारों स्वयंसेवी अविरत इस सपने को बढ़ाने में लगे हैं.खास बात यह थी कि माइकल ने प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग का नाम आधुनिक प्रिंटिंग के जनक योहांस गुटेनबर्ग के सम्मान में रखा, क्योंकि 15वीं सदी में मुद्रण के आविष्कार ने दुनिया को बदल दिया था. मार्क ट्वेन गलत नहीं कहते कि आज दुनिया जैसी भी है, अच्छी हो या बुरी, वह सब गुटेनबर्ग की देन है. हर चीज की जड़ इसी में है.

स्टीवन स्पीलबर्ग ने अमेरिकी बच्चों के लिए 1995 में ‘पिंकी एंड द ब्रेन’ एनिमेशन बनाया, तो उसमें कुछ एपिसोड उन हस्तियों को समर्पित थे जिन्होंने कला, साहित्य और विज्ञान में आमूल परिवर्तन ला दिया. राजा आर्थर की कथा का जादूगर मर्लिन, विज्ञानगल्प लेखक एच.जी. वेल्स, वैज्ञानिक-डॉक्टर इवान पावलोव के साथ आधुनिक प्रिटिंग के जनक योहान गुटेनबर्ग उसमें देखे जा सकते हैं

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