दीर्घकालिक असर डालते हैं युद्धों से होने वाले परोक्ष नुकसान

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: March 28, 2026 07:36 IST2026-03-28T07:35:32+5:302026-03-28T07:36:17+5:30

मैरीटाइम इंटेलिजेंस कंपनियों और ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के अनुसार दुनिया में आयात और निर्यात किए जाने वाले प्रमुख फटिलाइर्स जैसे अमोनिया, फॉस्फेट और सल्फर का 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले खाड़ी देशों से आता है.

Indirect losses from wars have long-term effects | दीर्घकालिक असर डालते हैं युद्धों से होने वाले परोक्ष नुकसान

दीर्घकालिक असर डालते हैं युद्धों से होने वाले परोक्ष नुकसान

डॉ. रहीस सिंह

आज की दुनिया को देखकर न जाने क्यों यह लगने लगता है कि एक दुनिया मर रही है और जो कुछ भी नया जन्म ले रहा है, वह दुनिया के लिए अपेक्षित तो नहीं है. मैं बात उन युद्धों की कर रहा हूं जो दुनिया को धीरे-धीरे करके मार रहे हैं और किसलिए? सिर्फ अपनी महत्वाकांक्षाओं और अहमन्यताओं के लिए? ये युद्ध भले ही रूस-यूक्रेन या फिर ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच दिख रहे हों लेकिन इनसे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है. दुनिया इसे भले ही मॉस्को, कीव, तेहरान, तेल अवीव और वाशिंगटन के सहारे देख रही हो लेकिन सच यह है कि पूरी दुनिया इनमें सिमटी और लिपटी हुई है. अगर ये युद्ध न रुके तो परिणाम बेहद गंभीर और मानवता के लिए अत्यंत हानिकारक होंगे, इतने कि जितना अनुमान भी न किया जा सके.

कोई भी युद्ध अब युद्ध के मैदान में नहीं लड़ा जाता, बल्कि वह शहरों से कस्बों और कस्बों से जिंदगियों के बीच भी लड़ा जाता है. उसमें क्षति केवल संसाधनों की नहीं होती बल्कि जिंदगियों की भी होती है, हां अंतर इतना है कि संसाधनों में हुई क्षति कैलकुलेटिव होती है लेकिन जिंदगियों की क्षति? युद्ध और युद्धोत्तर काल में लाखों-लाख लोग इसके प्रभाव का सामना करते हैं फिर वे विस्थापन का शिकार होकर करें अथवा भूख का.

रूस और यूक्रेन युद्ध से प्रभावित दुनिया अब ईरान केंद्रित अमेरिका और इजराइल युद्ध का सामना कर रही है जिसे लेकर अर्थव्यवस्था और लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंताएं हर तरफ दिखने लगी हैं. ऊपरी तौर पर तो इस प्रभाव को तेल और गैस संकट तक सीमित कर देखा जा रहा है लेकिन युद्ध का प्रभाव कभी रेखीय (लीनियर) नहीं होता, बल्कि घातीय (एक्सपोनेंशियल) होता है.

गौर से देखें तो मध्य-पूर्व के संघर्ष ने एशियाई व घरेलू शेयर बाजारों में निराशा का भाव पैदा कर दिया है. इसकी एक वजह तो होर्मुज जलडमरूमध्य में भारी गतिरोध है जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा संकट बढ़ा है और फारस की खाड़ी क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन टूटने की ओर बढ़ती दिख रही है.

वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंच चुकी हैं और ऐसी शंका जताई जा रही है कि यदि युद्ध तत्काल नहीं रुका तो ये कीमतें 150 डॉलर तक पहुंच सकती हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 में क्रूड ऑयल की कीमत आखिरी बार तीन अंकों में पहुंची थी.

ऊपरी तौर पर तो इस प्रभाव को तेल और गैस संकट तक सीमित कर देखा जा रहा है लेकिन यह खाद (फर्टिलाइजर) और खाद्यान्न तक जाएगा जिससे न केवल उत्पादन की लागतें बढ़ेंगी बल्कि जिंदगियों को जीने का खर्च भी बढ़ जाएगा. ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से गायब होते तेल और एलएनजी टैंकरों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.

कारण यह कि ईरान और ओमान के बीच मौजूद इस संकरे समुद्री मार्ग से होकर दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और एलएनजी गुजरती है. अब इस ऊर्जा संकट के साथ-साथ युद्ध के आईने से उन जहाजों पर नजर भी गड़ाइए जिनमें खेती के लिए खाद और लोगों के लिए भोजन लदा हुआ होता है. यदि यह रास्ता बंद कर दिया जाए तो? जैसा कि अभी है. तो उन देशों की तो पहले रफ्तार रुकेगी जो इन देशों पर तेल और गैस के लिए निर्भर हैं लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसे खाड़ी देशों की सांसें भी रुकने लगेंगी क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य होकर गुजरने वाला समुद्री रास्ता इन देशों के लिए जीवन रेखा है. मैरीटाइम इंटेलिजेंस कंपनियों और ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के अनुसार दुनिया में आयात और निर्यात किए जाने वाले प्रमुख फटिलाइर्स जैसे अमोनिया, फॉस्फेट और सल्फर का 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले खाड़ी देशों से आता है.

यही नहीं यूरिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नाइट्रोजन का लगभग आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है जिसमें कतर सबसे आगे है. पिछले दिनों ईरान ने दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी और फर्टिलाइजर हब ‘रास लफ्फान’ (कतर) पर हमला किया था जिसके कारण कतर एनर्जी को अपना उत्पादन रोकना पड़ा. इसका असर यह हुआ कि लाखों टन जरूरी फर्टिलाइजर न्यूट्रिएंट्स और उन्हें बनाने वाला कच्चा माल जहां का तहां ही रुक गया.

Web Title: Indirect losses from wars have long-term effects

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