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डॉन क्विक्जोट की बहुत याद आ रही है!

By विकास मिश्रा | Updated: March 10, 2026 05:25 IST

पाठ का मुख्य किरदार डॉन क्विक्जोट जैसे जिंदा होकर सामने आ गया है. बल्कि कई बार ऐसा लगता है कि हरकतों के हिसाब से तो यह शख्स डॉन क्विक्जोट का डैड है!

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ठळक मुद्देमुझे स्कूली दिनों में पढ़े गए एक पाठ की इन दिनों बहुत याद आ रही है.अजीबोगरीब मुख्य किरदार का नाम भी वही था- डॉन क्विक्जोट!मिगुएल डी सर्वेंटेस ने रचा था और उसे एक क्लासिक स्पेनिश उपन्यास माना जाता है.

यूं तो स्कूली दिनों की स्मृतियां जेहन के किसी कोने में हमेशा ही महफूज रहती हैं लेकिन ऐसा कम ही होता है जब उन दिनों की कोई बात बार-बार याद आने लगे! अमूमन स्मृतियों में किसी सहपाठी के साथ यारी-दोस्ती से लेकर, नटखट हरकतें या फिर मास्टर साहब की छड़ी और हथेलियों पर उभरे निशान बसे रहते हैं लेकिन मुझे स्कूली दिनों में पढ़े गए एक पाठ की इन दिनों बहुत याद आ रही है.

ऐसा लगता है कि उस पाठ का मुख्य किरदार डॉन क्विक्जोट जैसे जिंदा होकर सामने आ गया है. बल्कि कई बार ऐसा लगता है कि हरकतों के हिसाब से तो यह शख्स डॉन क्विक्जोट का डैड है! हो सकता है आपको याद न हो कि ये डॉन क्विक्जोट है कौन या था कौन? तो चलिए, याद दिलाता हूं आपको स्पेनिश उपन्यास डॉन क्विक्जोट की जिसके अजीबोगरीब मुख्य किरदार का नाम भी वही था- डॉन क्विक्जोट!

उस उपन्यास का एक अंश हमारी स्कूली किताब का हिस्सा क्यों था? इसका जवाब मेरे पास नहीं है लेकिन अच्छा ही हुआ कि उससे परिचित हो गए तो नए दौर के शख्स को पहचानना आसान हो गया कि ये डॉन क्विक्जोट के किरदार का नया अवतार है! बस जानकारी के लिए बता दें कि वो उपन्यास स्पेनिश उपन्यासकार मिगुएल डी सर्वेंटेस ने रचा था और उसे एक क्लासिक स्पेनिश उपन्यास माना जाता है.

कहानी कुछ ऐसी है कि अलोंसो क्विजानो नाम का एक शख्स शूरवीरों की जीवनी पढ़ते-पढ़ते पागल हो जाता है. पागलपन इस सीमा तक पहुंच जाता है कि वह खुद को एक बहुत बहादुर योद्धा समझने लगता है. वह खुद को डॉन क्विक्जोट नाम देता है और एक वफादार साथी सांचो पांजा के साथ बहादुरी दिखाने निकल पड़ता है. उसकी दुनिया काल्पनिक है. मगर सांचो पांजा समझदार है.

डॉन क्विक्जोट को लगता है कि गरीबों की मदद और बुराई का नाश करने के लिए ही उसने अवतार लिया है. वह एक मरियल घोड़े पर सवार होकर निकल पड़ता है. उसका खुद का शरीर भी उतना ही मरियल है जितना कि घोड़ा! रास्ते में वह पवनचक्कियों को देखता है और उसे लगता है कि बड़े-बड़े राक्षस रास्ता रोक कर खड़े हैं. वह तलवार निकाल लेता है.

हमला करता है लेकिन आप समझ सकते हैं कि कोई पवनचक्कियों पर तलवार चलाएगा तो उसका खुद का हश्र क्या होगा? वह घायल हो जाता है लेकिन उसे लगता है कि इन राक्षसों ने जादू कर दिया है. अपनी यात्रा के दौरान वह कई ऐसी हरकतें करता है. और अंत में एक छात्र भेष बदलकर श्वेत चंद्रमा का शूरवीर बन कर आता है और डॉन क्विक्जोट को हरा देता है.

अंत में वह घर लौट आता है और उसे अपनी भूल का एहसास होता है. वह बीमार हो जाता है और फिर उस दुनिया में चला जाता है  जिसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं!यदि मान लीजिए कि हमारे और आपके आसपास आज कोई डॉन क्विक्जोट की तरह हरकत करने लगे तो हम क्या करेंगे? निश्चित रूप से उसे डॉक्टर के पास ले जाएंगे. डॉक्टर क्या कहेंगे?

हो सकता है कि उसे सिजोफ्रेनिया का मरीज करार दें. इस बीमारी के लक्षणों में यह लक्षण भी शामिल है कि मरीज को मतिभ्रम होने लगता है. वह ऐसी चीजें देखने लगता है या सुनने लगता है जो वास्तव में है ही नहीं! उसकी सोच अव्यवस्थित हो जाती है. बातें बेतुकी हो जाती हैं. वह शब्दों का सलाद बनाने लगता है. शरीरिक हरकतें भी अजीब सी होने लगती हैं.

ऐसे मरीजों में डिमेंशिया भी अपना रोल निभा सकता है. मगर जिस किरदार की हरकतों के कारण मुझे डॉन क्विक्जोट की याद आ रही है, वो ऐसा है नहीं कि मैं उसे डॉक्टर के पास ले जा सकूं. वो बहुत दूर है मुझसे. इतनी दूर है कि मैं सपने में भी उसके पास नहीं पहुंच सकता. बड़ी सुरक्षा में रहता है. वैसे  वो जहां रहता है, वहां के कुछ डॉक्टर्स ने पिछले साल शंका व्यक्त की थी कि वह बातें भूलने लगा है.

सीधा चल नहीं पाता है, उसके पांव लहराते हैं. देख कर लगता है कि पांव फेंक कर चल रहा है. मगर वो जिस घर में रहता है, वहां के नौकर-चाकर कह रहे हैं कि साहब बिल्कुल ठीक हैं. जो सोचते हैं, वो सोलह आने सच है. उन पर शंका मत कीजिए! वे कह रहे हैं कि दो दुश्मनों की जंग में 6 तलवारें टूटी थीं तो मान लीजिए कि टूटी ही होंगी.

तीन दिन बाद यदि कहेंगे कि 6 नहीं 11 तलवारें टूटी थीं तो मान लीजिए कि 11 ही टूटी होंगी. यदि वो कह रहे हैं कि शांति के दूत हैं तो फिर मान लीजिए. उन्हें शांति का अवतार समझ कर पूजना शुरू कीजिए! साहब की बात मान लेने को अपना धर्म मान लीजिए! ज्यादा चूं-चपड़ करेंगे तो साहब आपकी खेती खा जाएंगे. साहब को चरने का शौक है.

उनके शौक में खलल मत डालिए! साहब को लगता है कि आपकी संपत्ति दरअसल उनकी संपत्ति है तो स्वीकार कर लीजिए! वे छुट्टा सांड़ हैं. जहां चाहेंगे, वहां चरेंगे! आप होते कौन हो बोलने वाले? बोलोगे तो साहब सींग घुसेड़ देंगे! वैसे अब साहब को लगने लगा है कि छुट्टा सांड़ मानकर लोग उनका कद कम कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि वे जंगल रूपी दुनिया का खूंखार शेर हैं.

और शेर पर कोई कानून लागू होता है क्या? वो जो कहे, वही कानून है! कानून सोच रहा है कि अब क्या करें? साहब पैर लहरा रहे हैं. जमाना जानता है कि लहराते हुए पैर बहुत खतरनाक होते हैं.साहब शेर हैं इसलिए ये भी नहीं कह सकता कि वे सबको एक सिरे से दुलत्ती मार रहे हैं. यदि आत्मा नाम की कोई चीज होती हो तो फिर डॉन क्विक्जोट की आत्मा ये जरूर कह रही होगी कि ये तो मेरा भी बाप निकला!

टॅग्स :अमेरिकाईरान
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