इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से बढ़ती आर्थिक चिंताएं

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: March 2, 2026 06:57 IST2026-03-02T06:57:11+5:302026-03-02T06:57:14+5:30

इसका असर भारत पर भी हो सकता है. इस युद्ध से वैश्विक शेयर बाजार  के साथ-साथ भारत के शेयर बाजार पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका है.

Growing economic concerns due to war between Israel America and Iran | इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से बढ़ती आर्थिक चिंताएं

इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से बढ़ती आर्थिक चिंताएं

जयंतीलाल भंडारी

28 फरवरी को इजराइल-अमेरिका के द्वारा ईरान पर हमले और उसके बाद ईरान के द्वारा इजराइल व अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमलों से  निर्मित युद्ध ने दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं. खास तौर से इस युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरानी सेना द्वारा इजराइल-अमेरिका से इसका पूरा बदला लेने और इजराइल-अमेरिका के द्वारा ईरान को पूरी तरह से कमजोर किए जाने के वक्तव्यों से इस युद्ध के लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है. ऐसे में भारत की भी चिंताएं बढ़ सकती हैं.

ये चिंताएं कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, शेयर बाजार में गिरावट, माल ढुलाई की लागत बढ़ने, खाद्य वस्तुओं की महंगाई, भारत से बासमती चावल, चाय, मशीनरी, इस्पात तथा फुटवियर जैसे क्षेत्रों में निर्यात, निर्यात के लिए बीमा लागत में वृद्धि, पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा की चिंता तथा इजराइल और ईरान के सहित पश्चिम एशिया के अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में कमी की आशंकाओं से संबंधित हैं.
उल्लेखनीय है कि ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध का असर वैश्विक शिपिंग रूट्स पर भी पड़ सकता है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर.

ईरान ने 33 किलोमीटर चौड़ा यह जल मार्ग रोक दिया है. यह वैश्विक यातायात का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण मार्ग है. दुनिया को मिलने वाले करीब एक तिहाई तेल और खाद्य व कृषि उत्पादों का अधिकांश यातायात इसी मार्ग से होता है. ऐसे में इस क्षेत्र में शिपिंग बाधित होने से कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है. साथ ही इससे खाद्य पदार्थों- जैसे कि गेहूं, चीनी और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतें बढ़ने लगेंगी.

चूंकि भौगोलिक रूप से ईरान भारत का पड़ोसी क्षेत्र है और कच्चे तेल के लिहाज से भारत का करीब आधा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर आता है, ऐसे में यह युद्ध भारत के लिए कच्चे तेल संबंधी चिंता निर्मित करते हुए दिखाई दे रहा है.

चूंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के करीब 85 फीसदी तक आयात पर निर्भर है, अतएव कच्चे तेल के दाम में बढ़ोत्तरी भारत के आयात बिल की चिंता बढ़ा सकती है. स्थिति यह है कि युद्ध के तनाव के बीच 28 फरवरी को कच्चे तेल की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल के मूल्य स्तर पर पहुंच गई, जो सात माह का रिकॉर्ड मूल्य स्तर है. युद्ध के लंबा खिंचने पर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. ईरान दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल उत्पादकों में से एक है और यह देश युद्धग्रस्त है. ऐसे में ईरान के तेल बाजार में अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने पर पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होने लगेंगे.

इसका असर भारत पर भी हो सकता है. इस युद्ध से वैश्विक शेयर बाजार  के साथ-साथ भारत के शेयर बाजार पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका है.

हम उम्मीद करें कि सरकार ईरान और इजराइल-अमेरिका के युद्ध के दुर्भाग्यपूर्ण रूप से विस्तारित होने पर युद्ध से निर्मित आर्थिक चुनौतियों की आशंका के मद्देनजर ऐसी बहुआयामी रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी, जिससे देश के आमजन व देश की अर्थव्यवस्था को ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकेगा.

Web Title: Growing economic concerns due to war between Israel America and Iran

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