रोपा पेड़ बबूल का, आम कहां से होए!
By विकास मिश्रा | Updated: February 10, 2026 05:49 IST2026-02-10T05:49:39+5:302026-02-10T05:49:39+5:30
इस्लामिक स्टेट के आतंकी जब वहां से भागे तो ऐसा माना जाता है कि वे दुनिया के कई देशों में चले गए और वक्त का इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें कब माकूल अवसर मिले.

file photo
पाकिस्तान में जब भी कोई आतंकी घटना होती है तो बिना कुछ सोचे-समझे तोहमत भारत पर मढ़ दी जाती है. इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर आतंकवादी हमले के बाद भी यही होना था लेकिन उसके पहले ही खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने हमले की जिम्मेदारी ले ली. इसके बाद अब यह सवाल पूछा जा रहा है कि पाकिस्तान में इस्लामिक स्टेट को कौन ताकत दे रहा है? ये वही आतंकी संगठन है जिसने इराक और सीरिया के बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया था और क्रूर शासन चला रहा था. उसे खत्म करने के लिए अमेरिका और अन्य देशों की सेना को मोर्चा संभालना पड़ा था.
इस्लामिक स्टेट के आतंकी जब वहां से भागे तो ऐसा माना जाता है कि वे दुनिया के कई देशों में चले गए और वक्त का इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें कब माकूल अवसर मिले. एक बड़ा समूह अफगानिस्तान में भी सक्रिय हो गया था लेकिन तालिबान ने लगातार यह कोशिश की कि इस्लामिक स्टेट का सफाया कर दिया जाए. ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान वैसे तो उस दौर में तालिबान की मदद कर रहा था.
लेकिन उसके जेहन में यह बात भी थी कि यदि कभी तालिबान से पटरी नहीं बैठी तो एक ऐसा समूह होना चाहिए जो पाकिस्तान की सुने और उसके अनुरूप काम करे. इसके लिए योजना बनाई गई और पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बड़ी चालाकी से इस्लामिक स्टेट को शक्ति प्रदान करना शुरू किया.
पाकिस्तान का नजरिया केवल इतना ही नहीं था कि इस्लामिक स्टेट का उपयोग जरूरत पड़ने पर तालिबान के खिलाफ किया जाएगा बल्कि यह सोच भी रही है कि इसका उपयोग भारत के खिलाफ भी किया जाए! मगर एक कहावत है कि बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होए? यानी आप कांटेदार बबूल उगाएंगे तो कांटा आपको भी चुभेगा.
कांटे वाले बबूल के पेड़ पर मीठा रसीला आम तो फलेगा नहीं! पाकिस्तान के साथ भी यही हो रहा है. और यह पहला मौका नहीं है जब इस्लामिक स्टेट ने पाकिस्तान के भीतर ही हमला किया है. वह इतना खूंखार संगठन है कि किसी सरकार का मोहताज नहीं बनना चाहेगा. वह तो चाहेगा कि पूरा पाकिस्तान ही उसके कब्जे में आ जाए!
भले ही किसी देश में वह इतना ताकतवर अभी नजर नहीं आ रहा है लेकिन वह वैश्विक आतंकी संगठन है और उसके आतंकवादी दुनिया के कम से कम 22 देशों में सक्रिय हैं. पाकिस्तान में वह पहले भी कई हमले कर चुका है. 2022 में पेशावर में किस्सा ख्वानी बाजार में शिया मस्जिद में आईएस के एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट कर उड़ा लिया था.
पाकिस्तान और इस्लामिक स्टेट के बीच जो खिचड़ी पकती रही है, उसे अफगानिस्तान ने पूरी दुनिया के सामने ला दिया है. तालिबान का कहना है कि पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने इस्लामिक स्टेट से हाथ मिला लिया है ताकि तालिबान के खिलाफ उसका उपयोग किया जा सके.
यह भी कहा जा रहा है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों को मध्य एशियाई देशों से लाया गया और उन्हें कराची के टेरर कैंपों में रखा गया है. इन्हें पाकिस्तानी फौज ट्रेनिंग भी दे रही है. आपको याद होगा कि जब अफगानिस्तान से अमेरिका आनन-फानन में वापस हुआ था और तालिबान ने सत्ता पर कब्जा कर लिया था तब इस्लामिक स्टेट ने काबुल में दो बड़े बम विस्फोट किए थे जिसमें 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. तालिबान का कहना है कि वह विस्फोट तालिबान पर दबाव बनाने की रणनीति थी.
इसीलिए तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ व्यापक पैमाने पर अभियान चलाया और सैकड़ों को मार गिराया. उस वक्त पाकिस्तान ने बहुत से आतंकवादियों को वजीरिस्तान और बलूचिस्तान में पनाह देकर बचाया. पाकिस्तान को यह समझ में आ गया कि अफगानिस्तान के भीतर इस्लामिक स्टेट इतना ताकतवर नहीं है कि अपने पैरों पर खड़ा हो सके तो उसने इस्लामिक स्टेट के छोटे-छोटे बचे हुए समूहों को एकत्रित किया और उन्हें दो हिस्सों में बांट दिया.
कुछ आतंकवादी हाफिज सईद के लश्कर-ए-तैयबा के साथ कर दिए गए और अन्य आतंकवादी मसूद अजहर के जैश-ए-मोहम्मद के साथ हो गए. अब यही आतंकी नए आतंकियों के लिए टेरर कैंप चलाने का काम करते हैं. पाकिस्तान को भरोसा था कि ये आतंकवादी तहरीक-ए-तालिबान को काबू में रखने का काम करेंगे.
लेकिन हकीकत यह है कि तहरीक-ए-तालिबान ज्यादा मजबूत संगठन है और स्वाभाविक रूप से अफगानिस्तान का मूल तालिबान उसके साथ है. यानी पाकिस्तान को पता है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस्लामिक स्टेट अफगानिस्तान में उसके काम नहीं आने वाला है. उन्हें मौत के घाट उतारने के लिए वहां तालिबान पूरी तरह तैयार है.
यदि पाकिस्तान यह चाहे कि इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को भारत में घुसाया जाए तो वह भी संभव नहीं है! कुछ साल पहले इस्लामिक स्टेट के बैनर पोस्टर कश्मीर घाटी में दिखे थे लेकिन भारतीय सेना ने ऐसी नकेल कस रखी है और कश्मीर के युवा अब पाकिस्तान की हरकतों को इतनी अच्छी तरह समझ चुके हैं कि किसी भी आतंकी संगठन का यहां पनप पाना नामुमकिन है. इसके बावजूद पाकिस्तान कोशिश करता रहेगा. मगर ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसकी भी हिम्मत नहीं हो रही होगी. यदि हिम्मत की तो उसे पता है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है!
ऐसी हालत में बेचारे आईएस वाले क्या करें? ...तो पाकिस्तान में ही विस्फोट कर देते हैं! इससे पाक को यह कहने का मौका मिल जाता है कि वह खुद आतंकवाद का शिकार है. आखिर उसे अमेरिका से दाना-पानी भी तो चाहिए!