जय माता की: पहले घर की माता की जय करो
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 23, 2026 05:33 IST2026-03-23T05:33:15+5:302026-03-23T05:33:15+5:30
वैष्णो देवी माता भी तभी खुश होती हैं जब आप अपनी घर की मां को खुश रखो. मैं कुछ महिलाओं और व्यक्तियों को जानती हूं जिनकी जुबान पर जय माता की.

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किरण चोपड़ा
19 मार्च से नवरात्रि शुरू है. मुझसे मंगलवार को एक सम्मानित व्यक्ति मिलने आए जो नवरात्रि में वैष्णो देवी मां के दर्शन के लिए जा रहे थे और उन्होंने मुझे कहा कि अगर उनकी वीआईपी व्यवस्था मैं करवा सकूं तो मेरे आभारी होंगे. सबको मालूम है अश्विनी जी वैष्णो माता के बहुत साल तक ट्रस्टी रहे. उन्हें आडवाणीजी ने बनवाया था. तब वह सबको चाहे वो अमीर, गरीब, छोटा-बड़ा व्यक्ति हो, उन सबको लेटर दे देते थे, दर्शन करवा देते थे. उनका दरवाजा हमेशा माता के भक्तों के लिए खुला रहता था. मैंने उनको समझाया कि अब वैसा नहीं, फिर भी मैं आपको लेटर दे देती हूं और तब मैंने उनकी मां का हाल पूछा तो उन्होंने कहा मां अकेली उदास हो जाती थीं इसलिए उत्तराखंड में बहुत अच्छा सीनियर सिटिजन सेंटर खुला है, जहां मैंने उनको छोड़ा है, वो वहां खुश रहती हैं. मैंने उनसे पूछा वो उदास क्यों रहती थीं.
आपके बच्चे, पत्नी हैं. तब उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी अपने आप में बहुत व्यस्त रहती है. मेरे बच्चे पहले पढ़ाई करते हैं, फिर घर आकर ट्यूशन, फिर उनके खेलकूद का समय हो जाता है, तब उनके पास अपनी दादी के लिए समय नहीं रहता. मैं बड़ी हैरान हुई कि यह क्या है, तो मैंने पूछा माता के दर्शन को कौन-कौन जा रहा है. वे बोले मैं, मेरी पत्नी और बच्चे. हम हर महीने जाते हैं.
मेरी पत्नी, बच्चे माता के भक्त हैं. मेरी पत्नी और बच्चों को चैन नहीं आता जब तक माता के दर्शन न कर लें. मैं बड़ी हैरान थी कि उनके पास सब बातों के लिए समय है और माता के दरबार भी जाना जरूरी है, परंतु अपनी मां और दादी के लिए एक मिनट का समय नहीं. मेरा मानना है जिस घर में मां खुश होती है, वहीं सच्चे अर्थों में देवी माता का वास होता है.
वैष्णो देवी माता भी तभी खुश होती हैं जब आप अपनी घर की मां को खुश रखो. मैं कुछ महिलाओं और व्यक्तियों को जानती हूं जिनकी जुबान पर जय माता की, जय माता की होता है, परंतु उठते-बैठते झूठ बोलना, फरेब करना उनका काम है. ऐसे लोगों की माता अस्थाई तौर पर तो सुनती होगी परंतु सही मायने में साथ नहीं देती होगी या यूं कह लो ऐसी पूजा का क्या फायदा जो हर समय व्यक्ति दूसरों का बुरा करे, झूठ बोले. अगर हम माता रानी की आरती करें लेकिन अपनी मां को अकेला छोड़ दें तो हमारी पूजा अधूरी है.
हमें मंदिर में जाकर देवी को ढूंढ़ने से पहले, अपने घर में अपनी मां के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करनी चाहिए. शनिवार को ईद का पवित्र त्यौहार मनाया गया, जो हमें प्यार, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है. इस नवरात्रि और ईद के उपलक्ष्य में हम सबको संकल्प लेना होगा कि हम सब मिलकर भाईचारे से रहेंगे और घर की मां या बुजुर्गों को सम्मान देंगे, सेवा करेंगे और समय देंगे. उनके साथ समय बिताएंगे, उनका आशीर्वाद लेंगे, तभी हमारा पूजा और त्यौहारों को मनाने का औचित्य होगा.
यही सच्ची पूजा और इबादत होगी. यही हमारी भारतीय संस्कृति की असली पहचान है. आज हम सभी व्यस्त हैं, मोबाइल, काम और दुनिया में, लेकिन हम भूल जाते हैं कि अगर हम अपनी मां का सम्मान न करें, उनके साथ समय न बिताएं तो हमारी पूजा अधूरी है. ईद भी हमें यही सिखाती है कि अपनों को गले लगाना है और दिल से रिश्ता निभाना है.