तेजी से बदलती दुनिया में निजता का गंभीर सवाल...!

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 30, 2026 07:18 IST2026-01-30T07:18:05+5:302026-01-30T07:18:24+5:30

यह स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि कैमरे की नजर ने सुरक्षा के क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों की काफी मदद की है लेकिन यह भी सच है कि घर से बाहर निकलने वाले हर शख्स की निजता कैमरे की जद में है.

Serious question of privacy in a rapidly changing world | तेजी से बदलती दुनिया में निजता का गंभीर सवाल...!

तेजी से बदलती दुनिया में निजता का गंभीर सवाल...!

पहले टेनिस खिलाड़ी कोको गॉफ ने और अब इगा स्वियातेक तथा अमांडा एनिसिमोवा ने निजता का जो गंभीर सवाल उठाया है, निश्चित रूप से वह विचारणीय मुद्दा है. दरअसल हुआ यह था कि ऑस्ट्रेलियन ओपन क्वार्टर फाइनल का मैच हारने के बाद कोको गॉफ ने एकांत स्थान पर जाकर भावनात्मकता को प्रकट किया ताकि उनका मानसिक बोझ कम हो सके. इस दौरान आवेश में उन्होंने अपना रैकेट पटका या यूं कहें कि रैकेट तोड़ दिया. इस दृश्य को कैमरे ने पकड़ लिया और वीडियो वायरल हो गया.

स्वाभाविक सी बात है कि कोको गॉफ को इस वीडियो ने बाद में और तनाव में ही डाला होगा क्योंकि वो जो एकांत में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थीं, उन्हें क्या पता था कि कैमरा वहां भी मौजूद है! इसी बात को लेकर इगा स्वियातेक तथा अमांडा एनिसिमोवा ने भी सवाल उठाए हैं. इगा ने तो यहां तक कह दिया है कि हम खिलाड़ी तो चिड़ियाघर के जानवर की तरह हैं जो हर पल कैमरे की जद में रहते हैं. खिलाड़ियों की इस प्रतिक्रिया को लेकर कुछ लोग यह कह सकते हैं कि खेल सार्वजनिक जीवन का हिस्सा है तो उसका कोई पल निजी कैसे हो सकता है?

यदि खिलाड़ी अपने जश्न को प्रशंसकों के साथ साझा करता है तो फिर पराजय से उपजी भावना को साझा करने में हर्ज क्या है? मगर इसमें हर्ज नजर आता है. खेल का जश्न अलग चीज है और पराजय की भावनात्मकता बिल्कुल अलग चीज है. कहावत भी है कि खुशियां जमाने के साथ बांटो और दर्द को सीने में छिपा लो! इसलिए यहां निजता का सवाल उचित है. कैमरे को लक्ष्मण रेखा नहीं लांघनी चाहिए. लेकिन मौजूदा दौर में तो कैमरा हमारी जिंदगी में इस तरह शामिल हो गया है कि निजता केवल मकान के भीतर ही बची है.

वैसे अब तो लोग घर के भीतर भी कैमरे लगवाने लगे हैं. वैसे घर में कैमरे न भी लगे हों तो आप घर से निकलते ही कैमरे की जद में होते हैं. यह स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि कैमरे की नजर ने सुरक्षा के क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों की काफी मदद की है लेकिन यह भी सच है कि घर से बाहर निकलने वाले हर शख्स की निजता कैमरे की जद में है. यहां तक कि अब तो सार्वजनिक बगीचे में भी निजता के दो पल गुजारना मुश्किल हो गया है.

स्वाभाविक सी बात है कि ऐसी बंधन भरी जिंदगी एक अलग तरह का तनाव देती है. एक समाज के रूप में भी हमें सोचना होगा कि कैमरे की पहुंच कहां तक होनी चाहिए? और खेल संगठनों को तो खास तौर पर विचार करना चाहिए क्योंकि खिलाड़ियों की भावनात्मकता के साथ कोई खिलवाड़ न हो, इस बात का ध्यान रखना उनका दायित्व है.

Web Title: Serious question of privacy in a rapidly changing world

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