गलगोटिया प्रकरण से क्या कोई सीख लेगी सरकार ?
By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: February 20, 2026 07:57 IST2026-02-20T07:54:27+5:302026-02-20T07:57:47+5:30
ये सारे सवाल ऐसे हैं जिन पर सरकार को जांच करानी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

गलगोटिया प्रकरण से क्या कोई सीख लेगी सरकार ?
दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पर गलगोटिया प्रकरण का दाग लगना वाकई शर्मनाक है. भारत के लिए यह आयोजन प्रतिष्ठा का सवाल था और गलगोटिया प्रकरण को छोड़ दें तो बाकी सबकुछ ठीक रहा. दुनियाभर के विषय विशेषज्ञ और कई राष्ट्राध्यक्ष इसमें शामिल हुए. गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर जो रोबोटिक डॉग रखा था, वह चीन का था लेकिन यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व कर रहीं प्रोफेसर नेहा सिंह ने डीडी न्यूज को बताया कि यह रोबोटिक डॉग गलगोटिया यूनिवर्सिटी के लैब में तैयार किया गया है और यूनिवर्सिटी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर 350 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं.
उन्होंने रोबोटिक डॉग का नाम ओरियन बताया था जबकि वह रोबोट चीन का यूनिट्री गो2 था और भारत में 2 से 3 लाख रु. में मिल जाता है. जब लोगों को गोलमाल समझ में आ गया तो मीडिया में तूफान मचा. पहले तो नेहा सिंह ने कहा कि उनकी बात को ठीक से समझा नहीं गया लेकिन उनका तो वीडियो मौजूद है, जिससे इनकार कैसे कर सकती हैं?
हल्ला मचने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी का स्टॉल खाली करा लिया गया और भारत सरकार के एक अधिकारी को बयान भी जारी करना पड़ा. लेकिन इस पूरे प्रकरण में इस बात की कोई चर्चा नहीं है कि इतने बड़े आयोजन में जो स्टॉल आवंटित किए गए, वहां क्या प्रदर्शित किया जाने वाला है, क्या उसके बारे में कोई जांच नहीं की गई? कायदे से जब अनुमति दी गई होगी तो उसमें प्रदर्शित की जाने वाली चीजों का जिक्र जरूर किया गया होगा! यदि नहीं किया गया तो सवाल है कि अनुमति कैसे मिली?
यदि जानकारी दी गई थी तो उसका सत्यापन क्यों नहीं किया गया कि जो दावा किया जा रहा है, वह वास्तव में सही है या नहीं? निश्चित रूप से यह जिम्मेदारी किसी अधिकारी की ही रही होगी लेकिन ‘सब कुछ चलता है’ की तर्ज पर अधिकारी ने क्या ध्यान नहीं दिया? ये सारे सवाल ऐसे हैं जिन पर सरकार को जांच करानी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी में किस स्तर पर यह चूक हुई, उसकी भी जानकारी सामने आनी चाहिए. सवाल यह भी है कि यूनिवर्सिटी की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोई प्रोफेसर क्यों नहीं था? कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की प्रोफेसर को क्यों भेजा गया था?