‘साउथ ब्लॉक’ से ‘सेवा तीर्थ’ की ओर प्रस्थान 

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 16, 2026 05:41 IST2026-02-16T05:41:21+5:302026-02-16T05:41:21+5:30

50 प्रतिशत धन नगर पालिका बांड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) जैसे तरीकों से जुटाना होगा. बाकी 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश या स्थानीय निकाय जुटाएंगे.

What is Seva Teerth Everything You Need Know About New PMO Building PM Modi approves 4 major schemes Women, Agriculture, Accident Care Startups | ‘साउथ ब्लॉक’ से ‘सेवा तीर्थ’ की ओर प्रस्थान 

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Highlights95 साल तक काम करने के बाद भारत सरकार ने खाली कर दिया.शहरों और सभी राज्यों की राजधानियों में समस्याओं का समाधान किया जाएगा.परियोजना की लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देगी.

देश की राजधानी दिल्ली के ‘साउथ ब्लॉक’ में विगत शुक्रवार को मंत्रिमंडल की आखिरी बैठक आयोजित की गई. बैठक में रेलवे, सड़क और शहरी विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. कुल मिलाकर 1,60,504 करोड़ रुपए की योजनाओं पर मुहर लगाई गई. इसके साथ ही वर्षों पुराने बैठक स्थल ‘साउथ ब्लॉक’ को भविष्य में संग्रहालय के रूप में विकसित करने का फैसला लिया गया. यह वही स्थान था, जहां अंग्रेजों की गुलामी के समय से लेकर आजादी के बाद तक अनेक बड़े फैसले लिए गए. देश की सफलता, असफलता, विभाजन की विभीषिका, ‘मिनिमम गवर्नमेंट’ और ‘मैक्सिमम गवर्नेंस’, ‘आर्टिकल 370’, ‘ट्रिपल तलाक’, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक की साक्षी यही इमारत रही, जिसमें 95 साल तक काम करने के बाद भारत सरकार ने खाली कर दिया.

गुलामी काल से विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम के प्रतीक के रूप में ‘साउथ ब्लॉक’ से ‘सेवा तीर्थ’ की ओर प्रस्थान किया गया. मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक में एक लाख करोड़ रुपए के नए ‘अर्बन चैलेंज फंड’ को मंजूरी दी गई. इस पूंजी से 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों और सभी राज्यों की राजधानियों में समस्याओं का समाधान किया जाएगा.

अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्रों में चार लाख करोड़ रुपए के निवेश का रास्ता खुलने के साथ वहां विकास अब सिर्फ सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि बाजार से धन जुटाकर, निजी भागीदारी बढ़ाकर और सुधारों के आधार पर किया जा सकेगा. इसमें परियोजना की लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देगी,

मगर कम से कम 50 प्रतिशत धन नगर पालिका बांड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) जैसे तरीकों से जुटाना होगा. बाकी 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश या स्थानीय निकाय जुटाएंगे. इसमें जो शहर बेहतर और असरदार प्रस्ताव लाएंगे, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी. उनके चयन का आधार आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण स्तर पर बदलाव लाने की संभावना के साथ राजस्व बढ़ाने की क्षमता, निजी निवेश को आकर्षित करने की संभावना, रोजगार सृजन, बेहतर सुरक्षा एवं स्वच्छता आदि प्रमुख होगा.

यही नहीं परियोजनाओं की आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के ‘डिजिटल पोर्टल’ के जरिये निगरानी भी होगी. इसमें शहरों को आर्थिक विकास केंद्र के रूप में विकसित करने, केंद्रीय व्यापारिक जिलों का नवीनीकरण, विरासत स्थलों का संरक्षण, जल आपूर्ति और ‘सीवरेज सिस्टम’ का उन्नयन तथा कचरा प्रबंधन जैसी योजनाओं को बनाया जा सकेगा.

अवश्य ही यह केंद्र सरकार की अभिनव योजना है. इसे ‘स्मार्ट सिटी’ से अलग माना जा सकता है. इसमें कई स्तर पर भागीदारी है, जिससे जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों है. सब जानते हैं कि स्थानीय निकायों के समक्ष विकास की जिम्मेदारी तो है, लेकिन उनके समक्ष धन और दिशा दोनों का अभाव रहता है. वे परिस्थिति और आवश्यकता अनुसार काम करते रहते हैं.

किंतु जब विकसित भारत की बात होती है तो उनमें अनेक कमियां नजर आती हैं. इस दिशा में केंद्र ने अपने अधीन विकास कार्यों को दिशा देने का जिम्मा उठाया है, जिससे कस्बों और शहरों में नई संकल्पना को शक्ल प्रदान करने में सहायता मिलेगी. धन अभाव और मंजूरी के चक्कर पर कहीं निगाह बनी रहेगी. शहरों के कायापलट के साथ स्थानीय निकायों के आत्मविश्वास में वृद्धि देखी जा सकेगी.

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