शहीदों की शहादत की उपेक्षा बेहद चिंताजनक
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: March 26, 2026 05:22 IST2026-03-26T05:22:54+5:302026-03-26T05:22:54+5:30
प्रति सहज श्रद्धा और हार्दिकता का भाव हम खोते जा रहे हैं. न तो हमको स्वाधीनता सेनानियों की कदर रह गई है और न उस आजादी की, जिसके लिए उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे.

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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सड़क सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत जिस तरह से काकोरी ट्रेन कार्रवाई के शहीदों की मूर्तियों को गिराकर कचरे में फेंक दिया गया, वह बेहद हैरान और स्तब्ध कर देने वाला है. हालांकि विपक्ष द्वारा इस संबंध में हल्ला मचाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीदों की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने की आरोपी एक फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है, लेकिन इस तरह की घटना का होना ही अपने आप में बेहद अनुचित और अपमानजनक है.
या तो संबंधित फर्म को अमर शहीदों- राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और रोशन सिंह की शहादत के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी, या फिर उसने सोचा कि उनकी प्रतिमाओं को ढहाए जाने का कोई विरोध ही नहीं होगा और बिना किसी शोर-शराबे के ही वह अपने मकसद में कामयाब हो जाएगी! दोनों ही स्थितियां अक्षम्य हैं.
दरअसल देश की आजादी के लिए अपने प्राण देने वाले शहीदों को हम जयंती-पुण्यतिथि के अवसर पर साल में एक-दो बार औपचारिकतावश भले ही स्मरण कर लें लेकिन हकीकत यही है कि उनके प्रति सहज श्रद्धा और हार्दिकता का भाव हम खोते जा रहे हैं. न तो हमको स्वाधीनता सेनानियों की कदर रह गई है और न उस आजादी की, जिसके लिए उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे.
गिरावट तो यहां तक आ गई है कि अब हम उनको भी अपनी राजनीतिक विचारधारा के खांचे में बांटकर देखने लगे हैं. हम अगर देश के प्रति अपने देशभक्तों जितना प्राण उत्सर्ग करने का जज्बा नहीं भी रख सकते तो कम से कम जिन्होंने ऐसा किया है उनके प्रति मन में आदर का भाव तो रखें! चिंता की बात यह है कि अगर अपने देशभक्तों के प्रति हमारा ऐसा ही उदासीन रवैया रहा तो भविष्य में कभी जरूरत पड़ने पर देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने कौन आगे आएगा?
इसलिए शहीदों की प्रतिमाओं का अपमान करने वालों पर कार्रवाई करना तो जरूरी है ही, हमें समाज में ऐसा वातावरण भी तैयार करना होगा कि देश के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वालों के आगे सबका सिर श्रद्धा से अपनेे आप झुके, न कि लोग उनके बारे में अनभिज्ञ नजर आएं. जो समाज अपने देशभक्तों की इज्जत करना जानता है, वही अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रख पाता है.