आदिवासी खेल: नई प्रतिभाओं की तलाश में एक सार्थक पहल
By रवींद्र चोपड़े | Updated: April 6, 2026 05:25 IST2026-04-06T05:25:24+5:302026-04-06T05:25:24+5:30
Tribal Games: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 106 तमगों का बंटवारा हुआ, जिनमें से 23 स्वर्ण, आठ रजत तथा सात कांस्य पदक लेकर कर्नाटक ने तालिका में अव्वल स्थान हासिल किया.

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Tribal Games: रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के उद्घाटन पर्व पर आईं मैरी कोम ने प्रेस कांफ्रेंस में तथ्यात्मक बयान दिया. छह बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता इस मुक्केबाज का कहना था कि ट्राइबल्स (आदिवासियों) में खेलों का हुनर जन्मजात होता है. बस उन्हें अवसर की दरकार है. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में यह बात सच साबित हुई. इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए तकरीबन ढाई हजार खिलाड़ियों ने कई खेलों में अपनी प्रतिभा दुनिया को दिखाई. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 106 तमगों का बंटवारा हुआ, जिनमें से 23 स्वर्ण, आठ रजत तथा सात कांस्य पदक लेकर कर्नाटक ने तालिका में अव्वल स्थान हासिल किया. 21 स्वर्ण के साथ ओडिशा ने दूसरा जबकि 16 स्वर्ण पदकों के साथ झारखंड ने तीसरा स्थान अर्जित किया.
इस आयोजन के लिए भारत सरकार और स्पोर्ट्स अथाॅरिटी ऑफ इंडिया (साई) की यकीनन प्रशंसा की जानी चाहिए. आदिवासी बच्चों में मौजूद खेल प्रतिभाओं को ढूंढ़कर उन्हें ओलंपिक जैसे खेलों के महाकुंभ में पदक जीतने के काबिल बनाने में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स एक मील का पत्थर साबित हो सकता है.
अगर यह प्रयास सार्थक दिशा में बढ़ता रहा तो आनेवाला कल भारतीय खेलों में उन लोगों का होगा जो आज आदिवासी होने के कारण उपेक्षित हैं. भारत में संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति (शेड्यूल ट्राइब्स-एसटी) के तहत उस समुदाय को आदिवासी का दर्जा दिया गया है जो पीढ़ियां गुजर जाने के बावजूद समाज की मुख्य धारा से दूर हैं, भौगोलिक रूप से अलग-थलग हैं,
जंगलों-पहाड़ों में घूमते हैं और जिनकी संस्कृति, भाषा तथा जीवनशैली भिन्न हैं. भारत में इनकी आबादी नौ फीसदी के करीब (लगभग 11 करोड़) बताई जा रही है और इनमें तकरीबन सभी प्रदेशों की 700 से अधिक जनजातियां शामिल हैं. महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों समेत मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर में आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं.
इतिहास के पन्नों में झांकें तो असल में आदिवासी ही भारत के मूल नागरिक हैं और यह सप्रमाण साबित भी हुआ है. बाद में आक्रांताओं के सामंती रवैये के कारण इस विशाल जनसमुदाय कोे मुख्यधारा से विलग कर दिया गया. हालांकि अब संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आदिवासियों को विशेष सुरक्षा दी गई है.
नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिलने से आदिवासियों को प्रगति का बोध हुआ है. सो, 11 करोड़ आदिवासियों में यदि तलाश शिद्दत से की जाए तो कई खेल प्रतिभाएं सामने आएंगी. एक खिलाड़ी बनने के लिए जरूरी शारीरिक क्षमता, शारीरिक रचना आदिवासियों में प्रकृति प्रदत्त है.
हम देखते हैं कि मेलों में, बाजार में या सड़कों पर जो आदिवासी बच्चियां रस्सियों पर, रिंग पर कितनी सफाई से अपना खेल दिखाती हैं, उन्हें अगर उचित तरीके से तराशा जाए तो जिम्नास्टिक, दौड़, तैराकी जैसे ताकत के खेलों में भारत पदकों का दावेदार बन सकता है. आदिवासियों की प्रकृत्ति प्रदत्त क्षमताओं को यदि भुनाया जाए तो क्यों नहीं उसैन बोल्ट जैसा दुनिया का सबसे तेज धावक भारत में तैयार होगा.
हमारा देश 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने जा रहा है. ओलंपिक में पदकों के मामले में हमारा रिकॉर्ड सुहाना नहीं है और सौ करोड़ से भी अधिक आबादी के बावजूद तमगे हासिल करने में भारत पर फिसड्डीपन का आरोप लगता रहा है.
तमगे तभी मिलेंगे जब खेल प्रतिभाओं को चुन-चुनकर सामने लाया जाएगा और इस दिशा में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स सार्थक पहल साबित हो सकती है. इसका लाभ निश्चित तौर 2036 ओलंपिक में मिलेगा. इस ओलंपिक की शान तभी बढ़ेगी जब भारत मेजबान होने के नाते पदक तालिका में शीर्ष 10 में शामिल रहेगा.